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February 21, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के ‘ग्लोबल टैरिफ़’ पर लगाई रोक, फिर भी अड़े राष्ट्रपति बोले भारत करेगा भुगतान

The CSR Journal Magazine
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वैश्विक टैरिफ़ नीति को 6-3 के बहुमत से अवैध करार दे दिया है। अदालत ने कहा कि बिना कांग्रेस की स्पष्ट अनुमति इतने व्यापक टैरिफ़ लागू करना संवैधानिक सीमा से परे है। बावजूद इसके, ट्रंप ने नया 10% वैश्विक टैरिफ़ लागू करने का एलान किया है और भारत के साथ हुई ट्रेड डील को “निष्पक्ष” बताते हुए कहा है कि अब भारत भुगतान करेगा।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, 6-3 से टैरिफ़ अवैध घोषित

अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति Donald Trump की वैश्विक टैरिफ़ नीति को बड़ा झटका देते हुए उसे असंवैधानिक ठहराया। 6-3 के बहुमत से दिए गए इस निर्णय में चीफ़ जस्टिस John Roberts ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों की सीमा लांघी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि आयात शुल्क लगाने की मूल शक्ति अमेरिकी संविधान के अनुसार कांग्रेस के पास है। ट्रंप प्रशासन ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत टैरिफ़ लगाने का आधार लिया था, लेकिन अदालत ने माना कि इस कानून में सीधे तौर पर व्यापक टैरिफ़ की अनुमति नहीं दी गई है। यह पहली बार है जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की किसी प्रमुख नीति को पूरी तरह रद्द किया है। कोर्ट ने कहा कि अगर कांग्रेस राष्ट्रपति को इतनी असाधारण शक्ति देना चाहती, तो वह इसे स्पष्ट शब्दों में कानून में शामिल करती।
170 अरब डॉलर रिफंड का सवाल, नई अनिश्चितता पैदा
फैसले के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले से वसूले गए टैरिफ़ राजस्व का क्या होगा। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह रकम 170 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं दिया और मामला निचली अदालतों पर छोड़ दिया है।
इस चुप्पी ने व्यापार जगत में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। छोटे व्यवसायों ने पहले ही अदालत में याचिका दायर कर कहा था कि इतने व्यापक टैरिफ़ का असर आयातकों और उपभोक्ताओं दोनों पर पड़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर कोर्ट की आलोचना की और कहा कि रिफंड को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन न देना “भयानक और हास्यास्पद” है। उन्होंने चेतावनी दी कि यह मामला सालों तक अदालतों में चल सकता है।ट्रंप का पलटवार नया 10% वैश्विक टैरिफ़ लागू
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही घंटों बाद ट्रंप ने पीछे हटने से इनकार करते हुए ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 के तहत नए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ़ पर हस्ताक्षर करने की घोषणा कर दी। यह टैरिफ़ अधिकतम 150 दिनों तक लागू रह सकता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए सेक्शन 232 के टैरिफ़ और सेक्शन 301 के तहत ‘अनुचित व्यापार’ मामलों से जुड़े टैरिफ़ जारी रहेंगे। ट्रंप ने कहा, “हम पीछे नहीं हटेंगे। हम और ज़्यादा पूंजी जुटाएंगे।” उन्होंने दोहराया कि उनके पास कई “शक्तिशाली कानूनी विकल्प” मौजूद हैं।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर क्या असर?

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर सवाल पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा, “कुछ भी नहीं बदला है। भारत टैरिफ़ का भुगतान करेगा, हम नहीं।” ट्रंप ने भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi को “शानदार” बताते हुए कहा कि उनके साथ संबंध बहुत अच्छे हैं, लेकिन भारत पहले अमेरिका से ज्यादा शुल्क वसूल रहा था। उन्होंने दावा किया कि नई डील के तहत अमेरिका ने “मामला पलट दिया है।” नई व्यापार व्यवस्था के तहत अमेरिका में जाने वाले भारतीय उत्पादों पर सामान्य टैरिफ़ दर 50% से घटाकर 18% कर दी गई है। हालांकि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि 18% टैरिफ़ किस कानूनी प्रावधान के तहत लागू रहेगा, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक टैरिफ़ को अवैध ठहराया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नया टैरिफ़ ढांचा भी अदालत में चुनौती पाता है, तो भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में अस्थिरता बढ़ सकती है।

असहमति रखने वाले जज और आगे की कानूनी लड़ाई

इस फैसले से तीन कंजर्वेटिव जजों Clarence Thomas, Samuel Alito और Brett Kavanaugh ने असहमति जताई। जस्टिस कैवनॉ ने कहा कि कई कानून राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में टैरिफ़ लगाने की अनुमति देते हैं और 1977 का कानून विदेशी खतरों से निपटने के लिए लचीला अधिकार प्रदान करता है। लेकिन बहुमत का मत था कि राष्ट्रपति को “अनियंत्रित शक्ति” नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कार्यपालिका और विधायिका के बीच संतुलन बनाए रखना लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अमेरिका की व्यापार नीति और संवैधानिक संतुलन दोनों के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ने नए कानूनी रास्तों से टैरिफ़ जारी रखने का संकेत दिया है, जिससे आने वाले महीनों में व्यापारिक और कानूनी संघर्ष और तेज होने की संभावना है।
भारत समेत दुनिया के कई देशों के लिए यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी अदालतों की अगली कार्रवाई क्या दिशा तय करती है और क्या वास्तव में भारत पर 18% टैरिफ़ स्थायी रूप से लागू रह पाता है या नहीं।

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