जम्मू में वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज का एमबीबीएस कोर्स में मुस्लिम छात्रों की संख्या ज्यादा होने पर हिंदूवादी संगठनो का विरोध, मान्यता रद्द सियासत और सांप्रदायिक विवाद के बीच छात्रों का भविष्य अधर में
जम्मू के रियासी स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल एक्सीलेंस में एमबीबीएस कोर्स की अनुमति राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने गंभीर खामियों के आधार पर रद्द कर दी है। कॉलेज में मुस्लिम छात्रों की संख्या अधिक होने को लेकर पहले से चल रहे विरोध और राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच यह फैसला लिया गया, जिससे छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं।
एनएमसी का फ़ैसला निरीक्षण में उजागर हुईं गंभीर ख़ामियां
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने 2 जनवरी को कॉलेज का आकस्मिक निरीक्षण किया था, जिसके बाद 6 जनवरी को एमबीबीएस कोर्स संचालित करने की अनुमति वापस ले ली गई। एनएमसी ने अपने आदेश में साफ़ किया कि संस्थान न्यूनतम मानकों पर खरा नहीं उतर पाया। निरीक्षण के दौरान फैकल्टी की संख्या कम पाई गई, क्लिनिकल मटीरियल की पर्याप्त उपलब्धता नहीं थी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आईं।
यह कॉलेज का पहला एमबीबीएस बैच था, जिसे सितंबर 2025-26 सत्र के लिए 50 सीटों पर अनुमति मिली थी।
एनएमसी के मुताबिक़, मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता और तय मानकों का पालन न होने की स्थिति में मान्यता रद्द करना अनिवार्य है।
दाख़िलों को लेकर विवाद विरोध से आंदोलन तक
कॉलेज में 50 सीटों में से 40 से अधिक पर मुस्लिम छात्रों के दाख़िले के बाद नवंबर 2025 में विरोध शुरू हुआ। ये दाख़िले नीट परीक्षा की मेरिट के आधार पर हुए थे, लेकिन इसके बावजूद श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति के बैनर तले कई हिंदूवादी संगठनों ने इसे मुद्दा बनाया।
22 नवंबर को समिति का गठन हुआ, जिसमें आरएसएस और बीजेपी से जुड़े संगठनों सहित 50 से अधिक संगठन शामिल थे। बजरंग दल द्वारा उग्र प्रदर्शन किए गए, धरने हुए और जम्मू सिविल सचिवालय के बाहर चक्का जाम की चेतावनी भी दी गई। एनएमसी के फ़ैसले से एक दिन पहले तक आंदोलन जारी रहा।
एनएमसी की कार्रवाई के बाद संघर्ष समिति ने इसे अपने आंदोलन की “जीत” बताया और जश्न मनाया।
मिठाइयाँ बांटी गईं और ढोल-नगाड़ों के साथ समारोह आयोजित हुए, जिसने इस पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया।




