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February 11, 2026

राज्यपाल की नशा मुक्त यात्रा पर कांग्रेस ने समझौता यात्रा का आरोप लगाते हुए प्रश्न उठाए हैं।

The CSR Journal Magazine
पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया द्वारा निकाली जा रही चार दिन की नशा विरोधी पद यात्रा ने राजनीतिक हलचलों को जन्म दिया है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने इस यात्रा को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, इस कार्यक्रम में सुखबीर बादल की मौजूदगी इसे समझौता यात्रा में तब्दील कर रही है, जो बीजेपी और अकाली दल के बीच एक निश्चित राजनीतिक गठबंधन को दर्शाती है।

कांग्रेस ने जाना समझौता यात्रा के तौर पर

कांग्रेस ने इस पदयात्रा को नशे के खिलाफ नहीं, बल्कि समझौता यात्रा करार दिया है। वडिंग ने राज्यपाल पर आरोप लगाया है कि वह नशा मुक्त समाज की आड़ में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच आने वाले विधानसभा चुनावों के लिए गठबंधन की तैयारी कर रहे हैं। इस विवाद ने यात्रा के पहले दिन ही पंजाब के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है।

कांग्रेस के सवालों का सिलसिला

राजा वडिंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल से सीधा सवाल किया। उन्होंने पूछा कि क्या यह पदयात्रा सच में नशीली दवाओं के खिलाफ है या यह समझौता एक्सप्रेस का हिस्सा है? उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से चर्चा करने का भी अनुरोध किया, यह बताते हुए कि सीमा सुरक्षा का अधिकार अब बीएसएफ के पास है।

मार्च के साथ नेताओं की एकजुटता

यात्रा के दौरान सुखबीर बादल और पंजाब बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा एक ही मंच पर नजर आए। इससे यह संकेत मिलता है कि यह कार्यक्रम कितना राजनीतिक हो चुका है। वडिंग ने यह भी उल्लेख किया कि इस यात्रा की तस्वीरें इतनी सुंदर हैं कि उनका संदेश नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

खूबसूरत तस्वीरों का सामंजस्य

राजा वडिंग ने कहा कि यह तस्वीरें केवल एक नशा मुक्त समाज के संदेश नहीं दे रही हैं, बल्कि एक राजनीतिक गठबंधन की ओर भी इशारा कर रही हैं। उनका मानना है कि राज्यपाल की इस यात्रा को लेकर जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे इसे नशा मुक्त मुहिम से अधिक राजनीतिक अभियान साबित कर रही हैं।

समरूपता की ओर अग्रसर

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इस तरह की यात्राएं केवल चुनावी रंजिशों को बढ़ावा देने का काम कर रही हैं। राज्य की स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्होंने सवाल उठाए कि क्या राज्यपाल के इस कदम से नशे की समस्या का समाधान निकलेगा या यह सिर्फ राजनीतिक निहितार्थों तक सिमट कर रह जाएगा।

राजनीतिक मुद्दों के बीच नशा मुक्ति का संदेश

राज्यपाल द्वारा निकाली जा रही इस यात्रा को लेकर आम लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल है। सवाल यह है कि क्या वास्तव में नशा मुक्त समाज बनाना प्राथमिकता है या फिर चुनावी रणनीतियों का हिस्सा? इस विवाद ने आश्चर्यजनक रूप से जन सामान्य की जिज्ञासा को और बढ़ा दिया है।

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