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March 17, 2026

क्यों CJI सूर्यकांत ने पूछा फैमिली कोर्ट में काले चोगे जरूरी हैं?

The CSR Journal Magazine
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि फ़ैमिली कोर्ट का माहौल बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालता है। उन्होंने सुझाव दिया कि फैमिली कोर्ट में पारंपरिक पोशाक, जैसे कि काले चोगे, नहीं होनी चाहिए। CJI ने यह बात दिल्ली के रोहिणी में एक फैमिली कोर्ट की आधारशिला पर कही। उन्होंने कहा कि जब हम बच्चों के पक्ष में नई सोच की ओर बढ़ रहें हैं, तो क्या पारंपरिक पोशाक उनके मन में डर पैदा नहीं करेगी?

जजों और वकीलों के यूनिफॉर्म का मुद्दा

CJI सूर्यकांत ने कहा कि यदि हम चाहते हैं कि बच्चे कोर्ट में सुरक्षित महसूस करें, तो जजों और वकीलों को भी बिना यूनिफॉर्म के आना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारियों को भी वर्दी में नहीं आना चाहिए। यह सब कुछ एक डरावने माहौल को टालने के लिए आवश्यक है। बच्चे इस व्यवस्था के सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, इसलिए बदलाव बेहद जरूरी हैं।

कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सुप्रीम कोर्ट के अन्य जज भी शामिल हुए। जस्टिस मनमोहन ने दिल्ली में न्यायपालिका को सामने आ रहे चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने बजट, कर्मचारी और स्थान को मुख्य चुनौतियों के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए ताकि कोर्ट की कार्यवाही में और सुधार हो सके।

महिलाओं के लिए पेड लीव की याचिका खारिज

दिल्ली हाई कोर्ट में एक और महत्वपूर्ण मामले में, CJI सूर्यकांत ने पीरियड्स में पेड लीव देने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी याचिकाएं अनजाने में महिलाओं के प्रति बनी हुई रूढ़ियों को और मजबूत करती हैं। CJI ने कहा कि यदि ऐसा कानून बनाया गया, तो नौकरी देने वाले महिलाएं को काम देने से कतराएंगे, जिससे उनका करियर प्रभावित होगा।

नई सोच की जरूरत

CJI सूर्यकांत के परामर्श ने दिखाया कि फेमिली कोर्ट में बच्चों की सुरक्षा और उनके मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखा जाना चाहिए। पारंपरिक पोशाक को छोड़कर, एक ऐसा माहौल तैयार करना होगा जहां बच्चे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें। यह एक सकारात्मक बदलाव की ओर कदम है, जो न्यायपालिका में नई सोच लाएगा।

बदलाव का स्वागत

फैमिली कोर्ट में होने वाले इस बदलाव का स्वागत किया गया है। जब बच्चे सुरक्षित महसूस करेंगे, तभी न्याय प्रणाली पर उनका विश्वास मजबूत होगा। यह सही दिशा में एक कदम है, जो समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है। केवल कानूनों का पालन करने से नहीं, बल्कि एक संवेदनशील वातावरण बनाने से ही वास्तविक बदलाव आएगा।
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