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March 13, 2026

चूल्हे से सिलेंडर तक रसोई का सफर… प्रकृति से कितनी दूर आ गए हैं हम

The CSR Journal Magazine
पारंपरिक चूल्हे से एलपीजी तक, भारतीय रसोई ने लंबा और मुश्किल सफर तय किया है। पहले गाँवों में आत्मनिर्भरता का मतलब स्थानीय फसलें, दूध और दही खुद से उगाना था। पर अब पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भरता बढ़ गई है। पहले भारत के गाँवों में खाने की तैयारी लकड़ी के चूल्हे पर होती थी, जो स्वास्थ्य और स्वाद दोनों के लिए बेहतर मानी जाती थी। आलम यह है कि अब हम कुकिंग गैस पर पूरी तरह से निर्भर हो चुके हैं।

स्वाद का बदलाव और सरलता का असर

हाल ही में एक गाँव में जाकर मैंने देखा कि कैसे एक पारंपरिक परिवार ने अपने पुराने तरीके को नहीं छोड़ा। घर की बहू ने लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाया और उसका स्वाद ऐसा था कि मैंने खुद को पांच रोटियाँ खाने से रोक नहीं पाया। लेकिन यह सच है कि हमने कुकिंग गैस के चलते अपने खाने के निराले स्वाद को खो दिया है। अब दाल की वो ख़ुशबू और स्वाद नहीं रह गया, जो पहले हुआ करता था।

बाजार पर बढ़ती निर्भरता

गाँवों की आत्मनिर्भरता अब बाजार पर निर्भरता में बदल चुकी है। पहले किसान अपने खेतों की फसलें खुद उगाते थे, लेकिन अब उन्हें बाज़ार की तरफ देखना पड़ता है। कभी मिट्टी के तेल के लिए लाइन लगानी पड़ती थी, तो कभी गैस सिलेंडर के लिए। आज अगर ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध होता है, तो खाद्य वस्तुओं की डिमांड और भी बढ़ सकती है।

वैश्विक तेल संकट का असर

अमेरिका और कनाडा में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। हालाँकि, यहाँ कच्चा तेल उत्पादन होता है, फिर भी कीमतें अंतरराष्ट्रीय दर के अनुसार तय होती हैं। भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में इजाफा होना तय है, क्योंकि दुनिया भर में तेल का संकट गहराता जा रहा है।

पारंपरिक ईंधन की यादें

1970 के दशक में, बड़े शहरों में कुकिंग गैस के कनेक्शन मिलना भी मुश्किल था। लोग आज भी याद करते हैं कि कैसे जलावन लकड़ी से खाना बनाना शायद उनकी आँखों के लिए जानलेवा होता था। लेकिन LPG आने से महिलाओं को राहत मिली। अब आंगन में स्वास्थ्यकर तरीके से खाना बनाना संभव हो गया।

उज्ज्वला योजना का प्रभाव

2014 में नरेंद्र मोदी सरकार ने उज्ज्वला योजना की शुरूआत की थी, जिससे गाँवों में भी कुकिंग गैस पहुँची। यह निश्चित रूप से एक सामाजिक बदलाव था। साथ ही, पेट्रोल-डीज़ल की खपत कम करने के लिए CNG वाहनों का प्रचलन भी बढ़ा। लेकिन इसका अर्थ यह है कि हम प्राकृतिक संसाधनों पर अधिक निर्भर हो गए हैं।

भारतीय कच्चे तेल की विशेषता

भारत में प्राकृतिक संसाधनों का मामला बहुत गंभीर है। अधिकांश पेट्रोरिफाइनरी अमेरिका द्वारा संचालित होती हैं। हालाँकि देश में कई कच्चे तेल के भंडार मौजूद हैं, पर हमें अन्य देशों पर निर्भर रहना पड़ता है।

तरह-तरह के ईंधन का अंतःविरोध

LPG और CNG ने सुविधा तो बढ़ाई, लेकिन पारंपरिक ईंधन की पहचान को छीन लिया। प्राचीन भारतीय संदर्भों में भी ईंधन का उपयोग सदियों से होता आया है

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