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February 18, 2026

हिमाचल के ग्रामीणों ने बनाया ‘आइस स्केटिंग रिंक’: 84 बच्चे बन रहे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी

The CSR Journal Magazine

सरकार का दावा कागजों में, ग्रामीणों ने की कमाल

शिमला की चियोग पंचायत में स्थानीय लोगों ने मिलकर एक अद्भुत आइस स्केटिंग रिंक तैयार किया है। हिमाचल प्रदेश सरकार पिछले 10 सालों से आइस स्केटिंग रिंक बनाने का वादा कर रही थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। ग्रामीणों ने बिना सरकारी सहायता के अपने प्रयासों से यह रिंक बनाया है। यहां 84 बच्चे आइस स्केटिंग की ट्रेनिंग ले रहे हैं।

ग्रामीणों की मेहनत रंग लाई

चियोग के लोगों ने अपने देवता सोगू की भूमि पर स्केटिंग रिंक बनाने के लिए पहाड़ी को समतल किया। उन्होंने इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का 30×60 मीटर का रिंक तैयार किया। यह पहल बच्चों की दीवानगी को देखते हुए की गई थी, जिसमें सुबह 6 बजे बच्चे स्केटिंग के लिए अभ्यास करने आ रहे हैं। यहां स्केटिंग क्लास सुबह 7 से 10 बजे और शाम को 4 से 6 बजे तक होती है।

बच्चों का बढ़ता उत्साह

चियोग का रिंक अब केवल एक खेल का मैदान नहीं रह गया, बल्कि यह बच्चों के सपनों का केंद्र बन गया है। यहां से कई बच्चे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर सफलता प्राप्त कर चुके हैं। इस साल 14 बच्चे ओपन नेशनल चैंपियनशिप में हिस्सा ले चुके हैं, 6 बच्चे ‘खेलो इंडिया’ में भाग लेकर चमक रहे हैं और 8 वर्षीय रुद्रवीर गांगटा ने एशियन चैम्पियनशिप में मेडल जीतकर सबको गर्व महसूस कराया है।

रुद्रवीर का सफलता का सफर

रुद्रवीर गांगटा ने बताया कि वह पिछले एक साल से चियोग रिंक में प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर दो मेडल जीते हैं, जिसमें सिल्वर और ब्रॉन्ज शामिल हैं, साथ ही एशियन चैम्पियनशिप में भी उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया। उनकी मेहनत और लगन यह दर्शाती है कि बच्चे भी बड़े प्लेटफार्म पर अपनी पहचान बना सकते हैं।

स्थानीय जागरूकता का असर

चियोग निवासी शुभम ठाकुर ने कहा कि वह दो साल से आइस स्केटिंग कर रहे हैं। वह ‘खेलो इंडिया’ और एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग ले चुके हैं। नोर्विन ने भी कोच प्रदीप कंवर से स्केटिंग की ट्रेनिंग ली है। स्थानीय लोगों ने मिलकर धन इकट्ठा कर इस रिंक को स्थापित किया है, जहां अब रोजाना 84 बच्चे स्केटिंग की ट्रेनिंग ले रहे हैं।

कोचों की महत्वपूर्ण भूमिका

कोच रविंद्र वर्मा ने बताया कि दिसंबर से उन्हें नियमित रूप से स्केटिंग की ट्रेनिंग करवाई जा रही है। सुबह 7 से 10 बजे तक बच्चे आइस स्केटिंग का अभ्यास करते हैं, जबकि शाम को फिटनेस के लिए ऑफ-आइस एक्सरसाइज कराई जाती है। यह प्रशिक्षण बच्चों की समग्र विकास में योगदान दे रहा है।

संसाधनों से परे प्रतिभा

चियोग का आइस स्केटिंग रिंक साबित कर रहा है कि प्रतिभा सीमित संसाधनों की मोहताज नहीं होती। यहां के बच्चे प्रशिक्षण और सही मार्गदर्शन के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने सपनों को पूरा कर रहे हैं। यह कहानी ग्रामीणों की मेहनत और सपनों की प्रतीक बन गई है, जो सभी को प्रेरित कर रही है।
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