दिल्ली हाईकोर्ट में ANI-OpenAI केस का फैसला सुरक्षित रखी गई: कानूनी जंग का नया अध्याय

The CSR Journal Magazine
दिल्ली हाईकोर्ट ने ANI की याचिका पर सुनवाई पूरी कर ली है, जिसमें OpenAI पर ChatGPT को प्रशिक्षित करने के लिए ANI की खबरों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। जस्टिस अमित बंसल ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला भारत में AI ट्रेनिंग और कॉपीराइट कानून से जुड़ा पहला बड़ा मामला माना जा रहा है। कोर्ट में यह मामला 19 नवंबर 2024 को आया था, और तब से इस पर कुल 32 बार सुनवाई हो चुकी है। ANI का आरोप है कि OpenAI ने उनके न्यूज़ आर्टिकल्स का इस्तेमाल बिना अनुमति और भुगतान के किया है।

ANI का आरोप और OpenAI का स्पष्टीकरण

ANI ने दावा किया है कि OpenAI ने वेब टूल्स के जरिए उनके कंटेंट को इकट्ठा किया और ChatGPT अपने जवाबों में ANI की खबरों के कुछ हिस्से दोहरा सकता है। ANI का मुख्य तर्क है कि यह “फेयर डीलिंग” के नियमों में नहीं आता, क्योंकि इसका उपयोग व्यापारिक लाभ के लिए किया जा रहा है। वहीं, OpenAI ने इन आरोपों को नकारा करते हुए कहा है कि उनका सिस्टम केवल सार्वजनिक जानकारी का उपयोग करता है। कंपनी के अनुसार, यह मॉडल पूरा आर्टिकल नहीं कॉपी करता, बल्कि केवल डेटा से पैटर्न सीखता है।

कानूनी विमर्श: AI और कॉपीराइट

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने AI और कॉपीराइट से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानूनी सवालों पर विचार किया। कई मीडिया संस्थानों और अन्य संगठनों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कुछ समूहों ने ANI का समर्थन किया और कॉपीराइट की सुरक्षा की मांग की, जबकि अन्य ने OpenAI का पक्ष लिया। उनका तर्क था कि मौजूदा कानून AI ट्रेनिंग को अनुमति देता है। ANI का कहना है कि कॉपीराइट का उल्लंघन उसी समय शुरू हो जाता है, जब ट्रेनिंग के लिए डेटा इकट्ठा किया जाता है।

आरोप और अन्य दृष्टिकोण

ANI ने यह भी दावा किया कि ChatGPT के कुछ जवाबों में पेड कंटेंट जैसी सामग्री शामिल है। दूसरी ओर, OpenAI और उनके समर्थकों का कहना है कि AI मॉडल पूरे आर्टिकल्स को सेव नहीं करते, बल्कि केवल भाषा और डेटा के पैटर्न को सीखते हैं। उनका तर्क है कि डेटा का अस्थायी उपयोग कॉपी करना नहीं माना जाना चाहिए। इस मामले का सबसे ज्यादा ध्यान “फेयर डीलिंग” की सही व्याख्या पर है। ANI का कहना है कि AI कंपनियों को इसका फायदा नहीं उठाना चाहिए, जबकि OpenAI का कहना है कि AI ट्रेनिंग एक रिसर्च गतिविधि की तरह है।

भविष्य की दिशा तय करना

अब अदालत को यह तय करना है कि AI मॉडल की ट्रेनिंग के लिए कंटेंट का उपयोग कॉपीराइट कानून के तहत “कॉपी करना” माना जाएगा या नहीं। यह फैसला न केवल इस मामले के लिए, बल्कि भविष्य के AI और कॉपीराइट नियमों की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, और अब सभी की नजरें इस महत्वपूर्ण निर्णय पर टिकी हैं।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos