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February 6, 2026

चारधाम यात्रा 2026 से पहले फुल तैयारी: शासन को 44 करोड़ के प्रस्ताव, 2200 बसें, प्रशासनिक मशीनरी एक्टिव — जानें और कौन-कौन सी व्यवस्थाएं होंगी?

The CSR Journal Magazine
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। यात्रा शुरू होने से पहले व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए सात जिलों से करीब 44 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। चारधाम यात्रा प्रबंधन और नियंत्रण संगठन के माध्यम से ये प्रस्ताव सरकार तक पहुंचाए गए हैं, जिससे जल्द बजट जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है। प्रशासन का फोकस इस बार समय से पहले तैयारियां पूरी करने पर है, क्योंकि यात्रा अप्रैल मध्य के बाद ही शुरू हो जाएगी और तैयारियों के लिए समय बेहद सीमित है।

अक्षय तृतीया से शुरू होगी आस्था की यात्रा

परंपरा के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को पड़ रही है। वहीं बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलेंगे। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि के दिन तय की जाएगी। वसंत पंचमी पर पहले ही कपाट खुलने के मुहूर्त तय किए जा चुके हैं। ऐसे में अप्रैल से ही लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही शुरू होने की संभावना है।

सात जिले, एक मिशन – सफल चारधाम यात्रा

चारधाम यात्रा से सीधे तौर पर चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिले जुड़े हैं, जहां चारों धाम स्थित हैं। इसके अलावा अन्य जिले ट्रांजिट और पड़ाव के रूप में अहम भूमिका निभाते हैं। 17 जनवरी को ऋषिकेश स्थित यात्रा ट्रांजिट कैंप में हुई पहली समीक्षा बैठक में मंडलायुक्त विनय शंकर पांडेय ने सभी जिलों को जल्द प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद सात जिलों ने अपने-अपने प्रस्ताव चारधाम यात्रा संगठन को सौंप दिए, जिन्हें अब शासन को भेज दिया गया है।

स्वास्थ्य से सफाई तक, हर मोर्चे पर तैयारी

प्रस्तावों में चिकित्सा व्यवस्था, परिवहन प्रबंधन, सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग, आवास गृहों की मरम्मत, एंबुलेंस सेवाएं, पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती, पर्यटन सुविधाओं का उन्नयन जैसे अहम कार्य शामिल हैं। ऋषिकेश ट्रांजिट कैंप में निर्माण कार्यों के लिए करीब सात करोड़ रुपये के प्रस्ताव भी शामिल किए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य है कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी मूलभूत सुविधाएं ज़मीन पर दिखने लगें।

2200 बसें, किराया और रूट प्लानिंग पर मंथन

चारधाम यात्रा के लिए संयुक्त रोटेशन के तहत परिवहन विभाग और 10 परिवहन कंपनियों की जल्द अहम बैठक होने वाली है। इन कंपनियों के पास लगभग 2200 बसों का बेड़ा है, जो यात्रियों को धामों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। बैठक में लोकल रूट बसों की संख्या, किराया संरचना और टैक्स से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। परिवहन कंपनियों का कहना है कि टैक्स बढ़ाने से पहले किराया संशोधन किया जाना चाहिए।

कम समय, बड़ी चुनौती

इस बार यात्रा अप्रैल के मध्य में शुरू होने जा रही है, जबकि पिछले साल यात्रा अप्रैल के अंत में शुरू हुई थी। इसका मतलब साफ है कि प्रशासन के पास तैयारियों के लिए कम समय है और जिम्मेदारी ज्यादा। इसी वजह से बजट जारी होने को लेकर तेजी दिखाई जा रही है, ताकि सभी विभाग समय रहते अपने काम पूरे कर सकें।

अधिकारियों का बयान

चारधाम यात्रा संगठन के विशेष कार्याधिकारी डा. प्रजापति नौटियाल के अनुसार, सात जिलों से प्राप्त करीब 44 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शासन को भेज दिए गए हैं और जल्द ही बजट जारी होने की उम्मीद है।
चारधाम यात्रा सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था, पर्यटन और आजीविका का सबसे बड़ा आधार भी है। ऐसे में इस बार की तैयारियां केवल व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और श्रद्धालु–हितैषी यात्रा सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं।
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