चाबहार पोर्ट: भारत-ईरान दोस्ती का ‘गोल्डन ब्रिज’, बदल रहा खेल

The CSR Journal Magazine
भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह एक ऐसा स्थान बन गया है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत संबंधों का प्रतीक है। यह बंदरगाह भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद भी एक ‘स्वर्णिम पुल’ के रूप में उभर रहा है। चाबहार भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक प्रवेश द्वार है, जिससे वह मध्य एशिया और यूरोप तक आसानी से पहुंच सकता है। खास बात यह है कि यह पोर्ट पाकिस्तान को बायपास करने का अवसर भी देता है। भारत ने इस परियोजना में भारी निवेश किया है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा मिला है।

ईरानी दूतावास द्वारा चाबहार की तस्वीरें साझा

हाल ही में, भारत में ईरानी दूतावास ने चाबहार पोर्ट की तस्वीरें साझा कीं और इसे ‘ईरान-भारत दोस्ती का गोल्डन ब्रिज’ कहा। यह संदेश ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल के बीच संघर्ष विराम की वार्ता हो रही है। तस्वीरों में चाबहार बंदरगाह को सहयोग का प्रतीक बताया गया है, जो कि कई चुनौतियों के बावजूद क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा तय कर रहा है।

चाबहार का महत्व और भारत की नीतियाँ

चाबहार बंदरगाह की महत्वता केवल रणनीतिक नहीं है, बल्कि यह भारत की एक्ट ईस्ट और कनेक्ट सेंट्रल एशिया नीतियों का भी अहम हिस्सा है। यह पोर्ट अफगानिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, और उज्बेकिस्तान जैसे देशों के साथ भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करता है। इसके साथ ही, यह भारत के लिए रूस और यूरोप तक पहुंचने का एक महत्वपूर्ण मार्ग भी प्रदान करता है।

भारत और ईरान की 10 साल की साझेदारी

भारत और ईरान के बीच मई 2024 में 10 साल के लिए समझौता हुआ था। इसके तहत, इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड को शहीद बहेश्ती टर्मिनल का संचालन और विकास का अधिकार मिला। भारत ने चाबहार पोर्ट में लगभग 120 मिलियन डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपये) का निवेश किया है, जिससे भारत की इस क्षेत्र में उपस्थिति मजबूत हुई है।

संघर्ष विराम की वार्ता का महत्व

पाकिस्तान की मध्यस्थता से चल रही संघर्ष विराम वार्ता का उद्देश्य तनाव कम करना और महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों को फिर से खोलना है। इस वार्ता के दौरान, ईरान यह स्पष्ट करना चाह रहा है कि भारत के साथ उसकी आर्थिक भागीदारी महत्वपूर्ण है, चाहे भू-राजनीतिक स्थिति कैसी भी हो। चाबहार का स्थान भारत के लिए अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया से जुड़ने का एक तरीका है, जो दोनों देशों के संबंधों की नींव दर्शाता है।

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