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February 12, 2026

स्लीपर बस आग हादसों के बाद केंद्र सरकार सख्त, राज्यों को नए सुरक्षा नियमों का आदेश

The CSR Journal Magazine
केन्द्र सरकार ने हाल ही में जैसलमेर-जोधपुर और कुरनूल-बेंगलुरु रूट पर जानलेवा स्लीपर-बस आग दुर्घटनाओं के बाद महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। राज्यों और यूनियन टेरिटरीज़ को ऐलान किया गया कि वे रजिस्ट्रेशन और फिटनेस इंस्पेक्शन के लिए AIS:052 और AIS:119 से जुड़ी सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 के नियम 62 का सख्ती से पालन करें। देश के विभिन्न हिस्सों में बस हादसे आम हो गए हैं, जहाँ यात्रियों को जान से हाथ धोना पड़ा है। इसी गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए सरकार ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

हादसों के पीछे की वजहें

जैसलमेर से जोधपुर रूट पर हाल ही में हुई एक घटना में यह देखा गया कि स्लीपर कोच की लंबाई तय लिमिट से ज्यादा थी। इमरजेंसी दरवाजे की साइज के मानक पूरे नहीं किए गए थे। इसके अलावा, पैसेंजर सीटों ने इमरजेंसी दरवाजे तक पहुंचने में रुकावट डाली। यह भी पाया गया कि बस में दो रूफ हैच की जगह केवल एक ही उपलब्ध था। यहीं नहीं, रूफ लगेज कैरियर में सीढ़ी भी लगी थी, जो सुरक्षा नियमों के खिलाफ है।

नियमों की अनदेखी पर सवाल

ड्राइवर केबिन में पार्टीशन था और फायर डिटेक्शन और सप्रेशन सिस्टम का पालन नहीं किया गया। सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल्स के तहत इन सभी सुरक्षात्मक मानकों को अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए था। लोकल ट्रांसपोर्ट अधिकारियों को गाड़ी के सर्टिफिकेशन के समय इन खामियों का पता लगाना जरूरी था, जो कि नहीं हुआ।

जानकारी का छुपाव कर रही बस ऑपरेटर

6 फरवरी, 2026 तक रजिस्टर्ड स्लीपर कोच की संख्या 49,616 है, जिसमें 886 बस बॉडी बिल्डर्स को मान्यता दी गई है। कुरनूल से बेंगलुरु रूट पर हुई आग लगने की घटना में यह पाया गया कि बस के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में सिर्फ़ सीटिंग कैपेसिटी का उल्लेख था, अन्य आवश्यक जानकारी छिपाई गई थी। इस प्रकार की अनियमितताओं का निवारण करने के लिए सरकार ने नियमों को सख्त करने का निर्णय लिया है।

सरकार के प्रयास

सरकार का मानना है कि यदि इन नियमों का कड़ाई से पालन किया गया तो बस हादसों में होने वाली जानमाल की क्षति को काफी हद तक रोका जा सकता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यों की परिवहन एजेंसियाँ इन दिशा-निर्देशों को कितनी गंभीरता से लागू करती हैं। लोग सड़क यात्रा करते समय अपनी सुरक्षा की दृष्टि से आरक्षित महसूस करें, यह सरकार की प्राथमिकता है।
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