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February 6, 2026

UPSC 2026 से चयनित उम्मीदवार केवल एक बार ही रैंक सुधारने के लिए परीक्षा दे सकेंगे.

The CSR Journal Magazine
यूपीएससी ने साल 2026 की सिविल सेवा परीक्षा के लिए नया नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बार कुल 933 पदों पर भर्तियां की जाएंगी। इसके साथ ही परीक्षा से जुड़े कुछ बड़े नियम भी बदल दिए गए हैं, जो लाखों उम्मीदवारों को सीधे तौर पर प्रभावित करेंगे।

नौकरी लगने के बाद बार-बार परीक्षा नहीं दे सकेंगे

अब जो कैंडिडेट एक बार सलेक्ट हो जाएगा, वह अगली बार सिर्फ एक बार ही फिर से परीक्षा देकर रैंक सुधार सकता है। इसके बाद अगर फिर से सिविल सेवा परीक्षा देना चाहता है, तो उसे अपनी नौकरी से इस्तीफा देना पड़ेगा। यह नियम 2026 के एग्जाम से लागू होगा।

IAS और IFS के लिए पहले जैसे ही हैं नियम

IAS और IFS अधिकारियों को लेकर नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन सेवाओं के चयनित उम्मीदवारों को अभी भी पुराने नियमों के हिसाब से ही मौका मिलेगा। नया नियम बाकी सेवाओं यानी जैसे IPS आदि पर लागू होगा।

IPS के लिए दोबारा वही सेवा नहीं मिलेगी

अगर कोई उम्मीदवार पहले से ही IPS है, तो वह दोबारा परीक्षा देकर फिर से IPS नहीं बन सकता। यानी पहले से चयनित उम्मीदवार अपनी सेवा को दोहराने के लिए दोबारा सिलेक्शन नहीं पा सकेंगे।

प्रीलिम्स पास करने के बाद IAS/IFS बनने वालों को मेन्स का मौका नहीं

अगर कोई उम्मीदवार प्रीलिम्स पास कर लेता है, लेकिन मेन्स से पहले IAS या IFS में चयनित हो जाता है, तो उसे मेन्स परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिलेगी। ये भी एक बड़ा बदलाव है जो सीधा असर परीक्षा के क्रम पर डालेगा।

हर साल UPSC के लिए लाखों आवेदन

साल 2025 में करीब 10 लाख से ज्यादा छात्रों ने UPSC के लिए आवेदन किया था। इनमें से करीब 14 हजार ने प्रीलिम्स पास किया और 2,700 से ज्यादा मेन्स के बाद इंटरव्यू तक पहुंचे। फाइनल सिलेक्शन 979 पदों पर हुआ।

पहले भी भारी संख्या में आए थे आवेदन

2024 में करीब 13 लाख कैंडिडेट्स ने आवेदन किया और लगभग 5.8 लाख छात्र प्रीलिम्स परीक्षा में बैठे थे। उस साल 1,009 उम्मीदवारों का फाइनल चयन हुआ। 2023 में भी ऐसी ही स्थिति रही, जहां 13 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हुए और 1,016 का चयन हुआ।

लद्दाख के उम्मीदवारों के लिए भाषा पेपर पर सवाल

लोकसभा में ये मुद्दा उठा कि क्या लद्दाख के उम्मीदवारों को सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा में भारतीय भाषा के अनिवार्य पेपर से छूट मिलेगी या नहीं। सरकार ने साफ किया कि अभी ऐसा कोई फैसला नहीं लिया गया है।

छह राज्यों को पहले से भाषा पेपर में छूट

फिलहाल अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मणिपुर, नागालैंड, मेघालय और सिक्किम के उम्मीदवारों को पेपर-A यानी भारतीय भाषा का पेपर अनिवार्य नहीं है। बाकी उम्मीदवारों के लिए यह जरूरी बना रहेगा।

कैडर एलोकेशन सिस्टम में भी बदलाव लागू

UPSC चयन के बाद IAS, IPS और IFS अधिकारियों के लिए अब नया ‘साइकिल सिस्टम’ लागू किया गया है। 2017 से इस्तेमाल हो रहे जोन सिस्टम को खत्म कर दिया गया है। यह बदलाव साल 2026 से लागू होगा।

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