न बाइट-न बहस, ‘साइलेंट’ सिपाही बनकर काम करेंगे बाहरी नेता, बंगाल चुनाव में BJP की नई रणनीति

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने एक खास रणनीति बनाई है। पार्टी ने तय किया है कि बाहरी नेता चमक-दमक से दूर रहकर, स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर काम करेंगे। यह कदम तृणमूल कांग्रेस द्वारा फैलाए गए ‘बाहरी-भीतरी’ नैरेटिव को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बीजेपी ने अपने प्रवासी नेताओं को निर्देश दिए हैं कि वे जमीन पर चुपचाप काम करें और किसी प्रकार की राजनीतिक चर्चा से बचें।

साइलेंट सिपाही का रोल, निश्चित दिशा निर्देश

सूत्रों के अनुसार, बीजेपी ने प्रवासी नेताओं को स्पष्ट रूप से बताया है कि उन्हें क्या करना है और क्या नहीं। इनमें शामिल हैं: चमक-दमक से दूर रहना, स्थानीय नेताओं के सहयोगी बनकर काम करना और हर जगह उपस्थित रहकर बिना किसी हलचल के काम करना। इसके अलावा उनके कपड़े साधारण और स्थानीय रंग-रूप के होने चाहिए, ताकि वे स्थानीय लोगों में घुलमिल सकें।

विशेषताएँ: बाहर का न होना

कोलकाता में रहने वाले प्रवासी नेताओं को खासतौर पर अनजान महिलाओं के साथ दूरी बनाने का निर्देश दिया गया है। यदि कोई उनसे पूछता है कि वे वहां क्यों हैं, तो उन्हें केवल अपने रिश्तेदारों के घर आने का बहाना करना होगा। इसके साथ ही, मीडिया में बाइट देने का कार्य पूरी तरह से स्थानीय नेताओं के हाथ में रहेगा। बाहरी नेता केवल ग्राउंड लेवल पर काम करेंगे।

पार्टी द्वारा नेताओं की तैनाती

बीजेपी ने इस बार दो चरणों में प्रवासी नेताओं को काम पर लगाया है। पहले चरण में नवंबर से बूथ स्तर पर काम करने के लिए नेताओं की तैनाती की गई थी। पार्टी ने इस प्रक्रिया में 60,000 से अधिक बूथ स्तर की टीमों का निर्माण किया है। दूसरे चरण में फरवरी में, विधानसभा स्तर पर कार्य करने के लिए प्रवासी नेताओं को तैनात किया गया है।

500 से अधिक नेता कार्यरत

मिली जानकारी के अनुसार, बंगाल में बीजेपी के करीब 500 से ज्यादा प्रवासी नेता सक्रिय हैं। इनमें से 225 नेता विधानसभा में विस्तारक के रूप में काम कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों से लाकर ये नेता जिले और विधानसभा स्तर पर पार्टी की स्थिति को मजबूत करने का कार्य कर रहे हैं।

स्थानीय भावना का ख्याल रखना

बीजेपी इस बार तृणमूल कांग्रेस के द्वारा फैलाए गए बाहरी-भीतरी नैरेटिव को गंभीरता से लेते हुए हर कदम बहुत सोच-समझ कर उठा रही है। पार्टी का यह प्रयास है कि प्रवासी नेताओं के जरिए स्थानीय जनमानस की भावना को प्रभावित न होने दिया जाए। इसके चलते बीजेपी ने अपनी रणनीति को काफी मजबूत और विचारशील बनाया है।

बंगाल में सत्ता की ओर कदम बढ़ाते हुए

बीजेपी की यह नई रणनीति दर्शाती है कि पार्टी अब हर क्षेत्र में स्थानीय लोगों के साथ एकजुटता से काम करने की दिशा में कितनी गंभीर है। इससे न केवल पार्टी की पैठ बढ़ेगी, बल्कि चुनावों के परिणामों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है।

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