app-store-logo
play-store-logo
January 19, 2026

UP के “जय श्रीराम” के बाद बिहार में गूंजेगा “बम-बम”: Motihari में बना विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग, जानें रामायण से जुड़ा रहस्य

The CSR Journal Magazine
बिहार के मोतीहारी जिले में अब भगवान शिव का विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित हो गया है। यह महाधाम सिर्फ श्रद्धालुओं के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक महत्व और वास्तुकला के लिहाज से भी ऐतिहासिक है। यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 2 लाख किलो वजनी है, जिसे एक ही ठोस काले पत्थर से तैयार किया गया है। इस शिवलिंग को “सहस्त्र शिवलिंगम” कहा जाता है, क्योंकि इसके भीतर 1008 छोटे शिवलिंग खुदे हुए हैं।

45 दिन की अद्भुत यात्रा

इस विशाल शिवलिंग को तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 96-पहियों वाले विशेष ट्रक पर 45 दिनों की यात्रा के बाद मोतिहारी लाया गया। 1008 कारीगरों ने इसे 10 वर्षों में तराशा था। इस यात्रा और निर्माण की कहानी ही भक्तों के लिए आस्था और प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

रामायण मंदिर: शैव, वैष्णव और शाक्त परंपरा का संगम

मोतिहारी में बन रहा रामायण मंदिर सिर्फ शिवलिंग के लिए ही नहीं बल्कि रामायण की पावन कथा से जुड़ा है। यह मंदिर 120 एकड़ क्षेत्र में फैल रहा है, जिसमें मुख्य मंदिर के साथ 22 अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी होंगे। यहां राम दरबार, भव्य शिवलिंग और 10 महाविद्याओं की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। महावीर मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, यह स्थल शैव, वैष्णव और शाक्त परंपरा का संगम होगा, जहां सभी साधक अपने आराध्य की पूजा कर सकेंगे।

रामायण से जुड़ा है खास कनेक्शन

रामायण मंदिर का स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि यह राम-जानकी पथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है। हिंदू मान्यता के अनुसार त्रेतायुग में भगवान राम की बारात इसी मार्ग से होकर निकली थी, और मोतीहारी के इस स्थल पर उसका ठहराव हुआ था। यहीं पहले से ही ठाकुरबाड़ी शिवलिंग भी मौजूद था, जिसे भक्त लंबे समय से पूजते आ रहे हैं।

अयोध्या के राम मंदिर से करीबी रिश्ता

महोदय सायन कुणाल के अनुसार, महावीर मंदिर ट्रस्ट ने पहले भी राम मंदिर निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये दान किए थे और वर्तमान में राम रसोई का संचालन भी ट्रस्ट करता है। रामायण मंदिर का यह निर्माण अयोध्या के राम मंदिर से आस्था और सेवा के दृष्टिकोण से जुड़ा है।

मंदिर का निर्माण और डिजाइन

रामायण मंदिर का निर्माण 2030 तक पूरा होगा। मंदिर 1080 फीट लंबा, 540 फीट चौड़ा और 270 फीट ऊंचा होगा। इसका डिजाइन वास्तुशिल्प विशेषज्ञ पीयूष सोमपुरा ने तैयार किया है, जिन्होंने सोमनाथ मंदिर और अयोध्या के राम मंदिर के डिज़ाइन में भी योगदान दिया है।

बिहार में सनातन चेतना का शंखनाद

स्वामी चिदानंद सरस्वती के अनुसार, बिहार में विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित होना सनातन चेतना और आस्था का प्रतीक है। रामायण मंदिर का निर्माण भी लोगों के संकल्प और साधना को विशाल स्वरूप देने का प्रयास है। भगवान राम ने वनवास काल में शिव की उपासना को सर्वोच्च माना, यही कारण है कि यह मंदिर रामायण से सीधे जुड़ा हुआ है।

आम आदमी की आस्था शिव में

इतिहासकार डॉ. सुशील पांडेय के अनुसार, शैव परंपरा में कई संप्रदाय हैं – पाशुपत, नाथ, वीरशैव और अघोरी। उत्तर भारत में आम जनता की अधिक आस्था भगवान शिव में देखने को मिलती है। शिव की साधना सरल और सहज है, इसलिए लोग उन्हें आसानी से पूजते हैं।

क्या यह शिवालयों का स्वर्णिम काल है?

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी के अनुसार, हाल के वर्षों में मंदिरों के नवीनीकरण और पुनर्निर्माण ने देश में मंदिर संस्कृति को नया स्वरूप दिया है। मोदी सरकार के समय से मंदिरों का स्वर्णिम युग शुरू हुआ है, जिससे आस्था और रोजगार दोनों को लाभ मिला है।

रामायण मंदिर का महत्व

रामायण मंदिर राम और शिव की आस्था का संगम है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि बिहार की सनातन चेतना को भी प्रदर्शित करता है। राम मंदिर के बाद अब रामायण मंदिर देश में आस्था और संस्कृति का नया केंद्र बन रहा है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates
App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540
Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos