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February 21, 2026

पराली जली तो सब्सिडी गई: बिहार में 1807 किसानों पर सरकार का बड़ा एक्शन, DBT पर लगा ब्रेक

The CSR Journal Magazine
बिहार में पराली जलाने के मामलों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए 1,807 किसानों को बड़ा झटका दिया है। राज्य सरकार ने इन किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया है। कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2025-26 में फसल अवशेष जलाने की घटनाओं के चलते इन किसानों का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) रजिस्ट्रेशन रोक दिया गया है। इसका सीधा असर किसानों को मिलने वाली सब्सिडी, इंसेंटिव और आर्थिक सहायता पर पड़ा है।

 पराली जलाने पर सख्ती, DBT रजिस्ट्रेशन पर रोक

राज्य विधानसभा में कृषि विभाग द्वारा पेश की गई रिपोर्ट में बताया गया कि 2025 में पराली जलाने की वजह से 1,807 किसानों का DBT रजिस्ट्रेशन सस्पेंड कर दिया गया। इससे पहले भी सरकार ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई कर चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी एडवाइजरी का उल्लंघन करने पर 1,758 किसानों की सब्सिडी और इंसेंटिव पहले ही रोके जा चुके थे। इसके अलावा, हाल के महीनों में 49 और किसानों पर भी यही कार्रवाई की गई है।
DBT सिस्टम के तहत किसानों को विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में मिलता है। इसमें बीज, खाद, उपकरण, बिजली, डीजल सब्सिडी और अन्य आर्थिक सहायता शामिल होती है। ऐसे में DBT रजिस्ट्रेशन रुकने का मतलब है कि किसान कई सरकारी सुविधाओं से सीधे तौर पर बाहर हो गए हैं।

वायु प्रदूषण और मिट्टी की सेहत बचाने की मुहिम

सरकार का यह कदम केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी बेहद अहम माना जा रहा है। खेतों में पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, सांस संबंधी बीमारियां फैलती हैं और मिट्टी की उर्वरता भी नष्ट होती है। इसी कारण राज्य सरकार ने फसल अवशेष जलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया है।
इस मुद्दे पर Bihar State Pollution Control Board के अध्यक्ष Devendra Kumar Shukla ने साफ कहा कि सरकार पहले ही चेतावनी दे चुकी थी कि पराली जलाने वाले किसानों को किसी भी तरह की सरकारी वित्तीय सहायता और सब्सिडी नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों को रियायती दरों पर बिजली, सब्सिडी वाला डीजल और कई योजनाओं के तहत आर्थिक मदद देती है, लेकिन नियम तोड़ने वालों को इन सुविधाओं से वंचित किया जाएगा।

 जागरूकता अभियान और तकनीकी विकल्पों पर जोर

सरकार सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि समाधान की दिशा में भी काम कर रही है। किसानों के बीच जागरूकता फैलाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। खेती से जुड़े आधुनिक उपकरणों पर सब्सिडी दी जा रही है ताकि किसान फसल अवशेष जलाने के बजाय तकनीकी विकल्प अपनाएं।
जिलों में अधिकारियों को कंबाइन हार्वेस्टर के उपयोग को बढ़ावा देने और पराली जलाने के “हॉटस्पॉट” क्षेत्रों में कड़ी निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, कृषि विभाग ने एक इंटर-डिपार्टमेंटल वर्किंग ग्रुप का गठन किया है, जो किसानों और आम जनता को फसल अवशेष जलाने के नुकसान के बारे में जागरूक करेगा।

बायोमास ब्रिकेट: पराली का नया भविष्य

सरकार अब पराली और ग्रीन वेस्ट के उपयोग को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत के रूप में बढ़ावा दे रही है। किसानों को बायोमास ब्रिकेट बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे फसल अवशेष को जलाने के बजाय उसे ईंधन में बदला जा सके। ये ब्रिकेट खाना पकाने और गर्मी के ईंधन के रूप में उपयोग किए जाते हैं और पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित माने जाते हैं।

 घटी घटनाएं, लेकिन सख्ती बरकरार

बिहार इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के मुताबिक, 2024 में 4,596 किसानों के DBT रजिस्ट्रेशन रोके गए थे, जबकि 2025 में यह संख्या कम हुई है। इससे साफ है कि सख्ती और जागरूकता अभियानों का असर दिखने लगा है, लेकिन सरकार किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।
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