बिहार के समस्तीपुर जिले से पुलिस बर्बरता का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ज्वेलरी शॉप से 26 किलो चांदी चोरी के मामले में एक युवक ने दुकानदार और पुलिस पर अमानवीय यातना देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का दावा है कि उसे कई दिनों तक अवैध हिरासत में रखकर बेरहमी से पीटा गया और उसके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल तक डाला गया।
कस्टडी में थर्ड डिग्री टॉर्चर का आरोप
पीड़ित युवक मनीष कुमार का कहना है कि उसे 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक पुलिस हिरासत में रखा गया। इस दौरान उसके साथ लगातार मारपीट की गई और मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मनीष के अनुसार, हालत गंभीर होने पर पांच जनवरी को उसे छोड़ा गया। घर पहुंचने के बाद परिजनों ने उसे इलाज के लिए ताजपुर रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से उसे सदर अस्पताल रेफर किया गया।

परिवार को भी नहीं बख्शा गया
मनीष ने आरोप लगाया कि पुलिस ने सिर्फ उसे ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार को भी प्रताड़ित किया। उसके पिता और पत्नी को तीन दिनों तक थाने में बैठाकर रखा गया। इस दौरान उनके साथ मारपीट और धमकी दिए जाने का भी आरोप है। पुलिस ने घर की तलाशी ली, लेकिन कोई भी चोरी का सामान बरामद नहीं हुआ। इसके बावजूद कथित तौर पर यातनाएं जारी रहीं।
ज्वेलरी शॉप में नौकरी और चोरी का शक
पीड़ित के अनुसार, उसने नीम चौक स्थित सोनी फैंसी ज्वेलर्स में करीब एक महीने पहले काम शुरू किया था। 28 दिसंबर की शाम दुकान मालिक ने उसे छत का गेट लगाने को कहा, जिसके बाद वह घर चला गया। अगले दिन सुबह उसे दुकान बुलाया गया और बताया गया कि 26 किलो चांदी और कुछ सोने के गहने चोरी हो गए हैं। जब वह दुकान पहुंचा, तो वहां पहले से पुलिस मौजूद थी और उसी समय से उस पर शक किया जाने लगा।
दुकानदार पर निजी तौर पर पिटाई का आरोप
मनीष का दावा है कि 31 दिसंबर को जब वह काम पर पहुंचा, तो दुकान मालिक उसे छत पर ले गया। वहां मालिक ने अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर लोहे की रॉड और पाइप से उसकी पिटाई की और नीचे फेंक देने की धमकी दी। इसी बीच किसी ने पुलिस को सूचना दे दी, जिसके बाद उसे थाने ले जाया गया।


