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March 17, 2026

अनंत सिंह की जगह अब बेटा अंकित होगा मोकामा का सियासी चेहरा

The CSR Journal Magazine
मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने हाल ही में एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वह अगला चुनाव नहीं लड़ेंगे और उनके बड़े बेटे अंकित सिंह आगामी चुनावों में उम्मीदवार बनेंगे। अनंत सिंह ने जोर देकर कहा कि अगर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहे, तो वह विधायकी भी छोड़ देंगे। यह बयान उस समय आया जब अनंत सिंह बिहार विधानसभा में राज्यसभा की सीटों के लिए मतदान में शामिल हुए थे।

अंकित की पढ़ाई, नई जिम्मेदारी

अंकित सिंह, जो इंग्लैंड से पढ़ाई कर चुके हैं, अब मोकामा के विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अनंत सिंह के करीबी सूत्रों के अनुसार, यह कदम अंकित को सियासी तैयारियों में लाने के लिए उठाया गया है। अनंत सिंह चाहते हैं कि उनका बेटा जनाधार बनाए और स्थानीय राजनीति में अपनी पहचान बनाये।

अनंत सिंह का पारिवारिक पृष्ठभूमि

अनंत सिंह के घर में कुल पांच बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी राजनंदनी है, जो अब शादीशुदा हैं। इसके बाद एक और बेटी और जुड़वा बेटे अंकित और अभिषेक हैं, जिनका जन्म 14 मार्च 1999 को हुआ था। अंकित बड़े हैं, जबकि अभिषेक छोटे हैं। इसके अलावा, उनका एक और बेटा अभिनव है, जिसकी उम्र लगभग 16 साल है। परिवार में सभी सदस्य एक-दूसरे के साथ घनिष्ठ संबंध रखते हैं।

बिहार की राजनीति में अनंत सिंह का स्थान

अनंत सिंह की मोकामा में एक महत्वपूर्ण पहचान है। वह न केवल विधायक रहे हैं, बल्कि उनकी पत्नी नीलम देवी भी मोकामा से विधायक रह चुकी हैं। अनंत सिंह की उपस्थिति का मतलब उनकी जीत की संभावना को बढ़ाना होता है। असल में, मोकामा में उनकी लोकप्रियता और प्रभावशाली स्थिति को देखते हुए, उनके बेटे के चुनावी मैदान में उतरने का फैसला एक सुनहरा मौका साबित हो सकता है।

पारिवारिक और राजनीतिक तैयारी का मिलाजुला फंडा

अपने बेटे को चुनाव लड़ाने की तैयारी के तहत, अनंत सिंह ने विधायक फंड से मिलने वाली राशि के विकास कार्यों की देखरेख हेतु अंकित को जिम्मेदारी दी है। इस प्रक्रिया से वह अपने बेटे को जमीन पर उतरने का मौका देने के साथ-साथ उसके पाँवों तले मजबूत आधार बनाने का प्रयास कर रहे हैं। यह कदम स्पष्ट रूप से आने वाले चुनावों के लिए उनकी तैयारियों का संकेत देता है।

भविष्य की ओर नजरें

मोकामा में राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव की यह कहानी निश्चित रूप से सभी की नजरों में बसी हुई है। पिता के साथ बेटे का यह राजनीतिक सफर अनेक संदर्भों में महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अंकित सिंह अपने पिता की राजनीती की विरासत को और आगे बढ़ा पाएंगे या नहीं।
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