छंटनी के बाद भी नौकरी पर खतरा! Amazon Meta जैसी Big Tech कंपनियों में क्यों जारी हैं कटौतियां

The CSR Journal Magazine

बिग टेक कंपनियों में छंटनी का डर: Amazon, Meta जैसी कंपनियों में कर्मचारियों की संख्या में बार-बार कटौती से बढ़ी चिंता

नौकरी जाने का डर सिर्फ उन कर्मचारियों को नहीं सताता, जिन्हें कंपनी से बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। कई बार छंटनी का डर उन कर्मचारियों पर भी दिखाई देता है, जो छंटनी के एक लहर से बच जाते हैं, मन में बस एक ही सवाल चलता है कि अगली बार किसकी बारी होगी। टेक सेक्टर में इन दिनों कुछ ऐसा ही माहौल देखने को मिल रहा है। Amazon, Meta, Oracle और Uber जैसी बड़ी कंपनियों में अलग-अलग समय पर कर्मचारियों की संख्या घटाई गई है। लेकिन खास बात यह है कि कई कंपनियों में छंटनी एकसाथ पूरी नहीं हुई बल्कि अलग-अलग चरणों में हुई है।

क्यों हो रही हैं बार-बार कटौतियां?

कंपनियां एक बार में ही छंटनी पूरी करने के बजाय बार-बार कर्मचारियों की संख्या क्यों घटाती हैं? यह सवाल कई लोगों के मन में है।  बार-बार होने वाली छंटनी का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि कंपनी किसी नए वित्तीय संकट से गुजर रही है। कई बार कंपनियां बड़े स्तर पर लागत घटाने या संगठन में बदलाव की योजना बनाती हैं, लेकिन इसे अलग-अलग विभागों और लोकेशन पर चरणों में लागू करती हैं।

Amazon और Meta की छंटनी की कहानी

Amazon में छंटनी के अलग-अलग दौर इसका उदाहरण हैं। कंपनी ने अक्टूबर 2025 में करीब 14 हजार कर्मचारियों की कटौती की थी। इसके बाद जनवरी 2026 में 16 हजार कॉरपोरेट नौकरियों में कटौती का ऐलान किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी की छंटनी उस रिस्ट्रक्चरिंग प्रक्रिया का हिस्सा थी, जो कई महीने पहले शुरू हुई थी। वहीं, Meta ने अप्रैल-मई में करीब 8,000 नौकरियां खत्म करने की योजना का ऐलान किया था, जो उसके ग्लोबल वर्कफोर्स का लगभग 10 फीसदी था।

बढ़ते रेवेन्यू के बावजूद कटौतियां

आमतौर पर माना जाता है कि कंपनी का कारोबार अच्छा चल रहा है तो कर्मचारियों की नौकरी भी सुरक्षित रहेगी। लेकिन कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन और उनकी हायरिंग नीतियों के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं होता। कई बार रेवेन्यू बढ़ने के बावजूद कंपनियां अपना मुनाफा बढ़ाने, उत्पादकता सुधारने या भविष्य की योजनाओं में निवेश करने के लिए कर्मचारियों की संख्या में कमी करती हैं।

AI का प्रभाव और नई जरूरतें

कंपनियां AI के बढ़ते यूज की वजह से भी कर्मचारियों की कमी कर रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन ने कंपनियों के काम करने के तरीके के साथ-साथ हायरिंग की जरूरतों को भी प्रभावित किया है। कंपनियां अब यह दोबारा देख रही हैं कि उन्हें किन पदों और स्किल वाले कर्मचारियों की जरूरत है. हालांकि, हर छंटनी की वजह AI नहीं है।

भारत के IT प्रोफेशनल्स पर असर

इस बदलाव का असर भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर पर भी पड़ सकता है। खासकर उन अनुभवी कर्मचारियों के लिए मुश्किल बढ़ सकती है, जिनकी स्किल किसी खास टेक्नोलॉजी, क्लाइंट या कंपनी से जुड़ी हुई है। Indeed के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 तक के तीन महीनों में सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़ी जॉब पोस्टिंग में 12.3 फीसदी की गिरावट आई।

क्या कर्मचारियों को दूसरी भूमिका दी जा सकती है?

कंपनियों के सामने एक विकल्प कर्मचारियों को नई स्किल सिखाकर दूसरी भूमिका में भेजने यानी री-डिप्लॉयमेंट का भी है। संजयोग डोवराह के मुताबिक, किसी पद की जरूरत खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि उस पद पर काम करने वाले कर्मचारी की प्रतिभा भी बेकार हो गई। अगर कंपनी में दूसरी जगह जरूरत है तो ट्रेनिंग देकर कर्मचारियों को वहां काम दिया जा सकता है।

अनिश्चितता का माहौल

टेक कंपनियों में बार-बार हो रही छंटनी के बीच कर्मचारियों की अनिश्चितता भी बनी हुई है। अनुभवी प्रोफेशनल्स को नई नौकरी खोजने में अधिक समय लग सकता है और कम सैलरी पर काम करना पड़ सकता है। वहीं, एंट्री-लेवल नौकरियों के कम होने से नए युवाओं के लिए अवसर सीमित हो सकते हैं। आगे रोजगार पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां, कर्मचारी और नीति निर्माता इस बदलाव से कैसे निपटते हैं।

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