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February 19, 2026

क्या 20 करोड़ मुसलमानों को हिंदू बना दोगे? संघ प्रमुख के बयान पर मदनी का तगड़ा जवाब

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भागवत ने कहा था कि भारत में रहने वाले मुसलमान भी हिंदू हैं और उन लोगों की ‘घर वापसी’ को तेज किया जाना चाहिए। इस बयान के बाद मदनी ने कहा कि ऐसा भाषण देश में अशांति और नफरत फैलाने वाला है, जो भारतीय संविधान का उल्लंघन है।

साठ साल की परंपरा की अनदेखी

मदनी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया जिसमें उन्होंने कहा कि वो बातें आज कही जा रही हैं जो सत्तर वर्षों में नहीं कही गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह मान्यता सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए है जो खुद को भारत का असली निवासी मानते हैं। वह कहते हैं, “ऐसा लगता है मानो केवल उन्होंने ही अपनी मां का दूध पिया है, बाकी सभी ने नहीं।” इससे स्पष्ट होता है कि यह सोच कितनी विभाजनकारी है।

नफरत की आग को भड़काना?

अरशद मदनी ने टिप्पणी की कि आज देश में नफरत की आग भड़काई जा रही है। लिंचिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं और सरकार इस षड्यंत्र पर चुप है। उन्होंने कहा, “बेजुबान लोगों को गाय के नाम पर मरने दिया जा रहा है।” यह सब कुछ कहीं न कहीं संविधान का उल्लंघन है और देश की एकता के लिए खतरा है।

मुसलमानों का अस्तित्व

मदनी ने स्पष्ट किया कि जमीयत उलमा-ए-हिंद ऐसे सांप्रदायिक बयानों का विरोध करती रहेगी। उन्होंने कहा कि मुसलमान अपने धर्म पर मजबूती से खड़े रहेंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि “मुसलमानों को मिटाने वाले खुद मिट गए, मगर इस्लाम जिंदा है।” यह संदेश सभी समुदायों के लिए भाईचारे का है।

धर्म और हिंसा

मदनी ने अपने बयान में कहा कि धर्म के नाम पर हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने बताया कि सभी धर्म मानवता, सहिष्णुता और प्रेम का संदेश देते हैं। जो लोग इन मूल्यों का उल्लंघन करते हैं, वे अपने धर्म के सच्चे अनुयायी नहीं हो सकते।

संघ प्रमुख का विवादित बयान

मोहन भागवत ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ दौरे के दौरान ये विवादित बातें की थीं। उन्होंने कहा कि घर वापसी का कार्य तेज होना चाहिए और घुसपैठियों को डिटेक्ट और डिलीट करना चाहिए। उनके इस बयान से न केवल राजनीतिक विवाद उत्पन्न हुआ है बल्कि धार्मिक समुदायों के बीच टकराव का भी खतरा बढ़ गया है।

बैठक का असर

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में उथल-पुथल मच गई है। कई नेता और धार्मिक व्यक्तित्व इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। अब देखने की बात होगी कि इस बयान का समाज पर क्या असर पड़ता है। क्या यह बयान वास्तव में कोई बदलाव ला सकेगा या सिर्फ राजनीतिक खेल का हिस्सा रहेगा? यह सब कुछ आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
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