app-store-logo
play-store-logo
February 8, 2026

भागवत ने कहा कि RSS राजनीति में सीधे शामिल नहीं है और सकारात्मकता पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि संघ का किसी के खिलाफ कोई इरादा नहीं है। भागवत ने ये बातें शनिवार को RSS के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि RSS को राजनीति में सीधे तौर पर शामिल होने की कोई इच्छा नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि संघ का ध्यान देश में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को समर्थन देने पर है। वो किसी भी रिएक्शन में काम नहीं करता है, बल्कि सकारात्मकता की दिशा में आगे बढ़ता है।

संघ का मंतव्य: नहीं एक पैरामिलिट्री फोर्स

भागवत ने कहा कि RSS को एक पैरा-मिलिट्री फोर्स की तरह नहीं देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ के रूट मार्च और स्वयंसेवकों के लाठी अभ्यास का महत्व है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि संघ एक सैन्य संगठन है। भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य राष्ट्र की सेवा है और इसे एक परोपकार की भावना से जोड़कर समझा जाना चाहिए।

राजनीति में संघ की भूमिका: सीमित ही सही

भागवत ने यह भी कहा कि संघ कुछ लोगों के माध्यम से राजनीति में सक्रिय है, लेकिन संघ खुद राजनीति में सीधे शामिल नहीं होता। उन्होंने भारत के धार्मिक बंटवारे का जिक्र करते हुए कहा कि यह धर्म के कारण हुआ था। उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान करने की बात की और कहा कि संघ का मानना है कि सभी धर्म एक साथ रह सकते हैं।

हिंदू भाव की पहचान: एकजुटता की आवश्यकता

भागवत ने अपने भाषण में कहा कि हिंदू भाव को नजरअंदाज करना भारत के बंटवारे का एक बड़ा कारण था। उन्होंने टिप्पणी की कि देश में झड़पें होती हैं, लेकिन इसके बावजूद देश की एकजुटता महत्वपूर्ण है। उन्होंने विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के बीच भाईचारे को बनाए रखने की बात भी की।

सामाजिक सुधारकों की बात: ऐतिहासिक संदर्भ

भागवत ने समाज सुधारकों जैसे राजा राम मोहन रॉय, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन महान व्यक्तियों ने समाज को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भागवत ने बताया कि समाज को दिशा देने का कार्य बड़े स्तर पर नहीं हो पा रहा है, और इसी कारण संघ अपनी गतिविधियों को लगातार बढ़ा रहा है।

हेडगेवार की प्रेरणा: संघर्ष का एक उदाहरण

संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के संघर्ष को भी भागवत ने याद किया। उन्होंने बताया कि हेडगेवार ने 13 साल की उम्र में अपने माता-पिता को खो दिया, लेकिन फिर भी आजादी की लड़ाई में अपनी हिस्सेदारी को कभी नहीं छोड़ा। भागवत ने हेडगेवार के क्रांतिकारी दृष्टिकोण की सराहना की।

मौजूदगी में चमक: सलमान खान का योगदान

इस कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान, फिल्ममेकर सुभाष घई और गीतकार प्रसून जोशी भी मौजूद रहे। सलमान खान भागवत की स्पीच को ध्यान से सुनते नजर आए। इस अवसर पर उनकी उपस्थिति कार्यक्रम की खासियत थी। इस तरह के आयोजन से समाज में महत्वपूर्ण चर्चाएं होती हैं।

Latest News

Popular Videos