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February 26, 2026

पंजाब के किसानों को फिरोजपुर फीडर नहर की सौगात, 6 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई में होगी मदद

The CSR Journal Magazine
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फिरोजपुर फीडर नहर के पुनर्निर्माण की ऐतिहासिक परियोजना का उद्घाटन किया। इस परियोजना से नहर की क्षमता 11,192 क्यूसेक से बढ़कर 13,873 क्यूसेक हो गई है। इससे क्षेत्र के किसानों को बड़ी सौगात मिली है, जो कृषि के लिए आवश्यक पानी की उपलब्धता को सुनिश्चित करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान नहीं दे पाईं, जबकि वर्तमान सरकार ने जमीन पर सुधार किए हैं।

किसानों की ज़रूरतों का ख्याल

भगवंत मान ने इस नहर को मालवा क्षेत्र की जीवनरेखा बताया। उन्होंने कहा कि यह नहर फिरोजपुर, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब और फाजिल्का जिलों के लिए वरदान साबित होगी। इससे सिंचाई की क्षमता में वृद्धि होगी और खेतों तक पानी गहराई तक पहुंचेगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब के पास साझा करने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं है और राज्य का हित सर्वोपरि है।

पूर्व सरकारों की नाकामी पर हमले

मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकारों पर कटाक्ष किया, जो पानी के मुद्दे पर समझौते कर पंजाब के हितों के प्रति विश्वासघात कर चुकी थीं। उन्होंने कहा कि जो पार्टियाँ एक समिति नहीं बना सकतीं, वे पंजाब में चुनाव जीतने का सपना देख रही हैं। उनका कहना था कि विकास के लिए ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है और इस पुनर्निर्माण परियोजना से बड़ी संख्या में किसानों को लाभ होगा।

बिजली और जल का समन्वय

इस पुनर्निर्माण के पहले चरण पर 180 करोड़ रुपये का व्यय किया गया है। 35 दिनों के भीतर 15 किलोमीटर नहर का पुनर्निर्माण किया गया है, जिसमें 126 सरकारी कर्मचारी और 4,000 श्रमिक शामिल थे। नहर की गहराई और चौड़ाई में सुधार किया गया है, जिससे पानी की उपलब्धता में वृद्धि होगी। इससे 6,45,200 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई का पानी मिलने वाला है।

जलापूर्ति का नया अध्याय

फिरोजपुर फीडर नहर से अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे क्षेत्रों, जैसे फाजिल्का और जलालाबाद को पानी की आपूर्ति की जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले राज्य में सिंचाई के लिए केवल 21% नहर का पानी उपयोग हो रहा था, जो अब 68% तक पहुँच चुका है। उनका लक्ष्य इसे धान के मौसम तक 85% तक बढ़ाना है।

जल बंटवारे पर स्पष्टता

मुख्यमंत्री ने जल बंटवारे के मुद्दे पर अपने दृढ़ रुख को दोहराया। उन्होंने कहा कि पंजाब में जल की कोई कमी नहीं होनी चाहिए और किसी भी अन्य राज्य को राज्य के जल का एक बूंद भी नहीं दिया जाएगा। यह संदेश स्पष्ट करता है कि पंजाब की जल आवश्यकताओं का सम्मान किया जाएगा।

राजनीतिक दांव और सच्चाई

मुख्यमंत्री ने पारंपरिक राजनीतिक दलों की नाकामियों को उजागर करते हुए कहा कि ऐसे नेता केवल अपने स्वार्थों के लिए काम करते हैं। उन्होंने सतलुज-यमुना लिंक नहर के मुद्दे पर भी चर्चा की, यह बताते हुए कि इसका समाधान यमुना-सतलुज लिंक के माध्यम से ही संभव है। पंजाब की जल की रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
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