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January 24, 2026

बंगाल में ‘अयोध्या 2.0’? बाबरी मस्जिद रेप्लिका से 90 KM दूर बनेगा राम मंदिर, बंगाली स्वरूप में विराजेंगे रामलला, फरवरी में रखी जाएगी आधारशिला

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल में धार्मिक प्रतीकों को लेकर एक बार फिर सियासी और सांस्कृतिक हलचल तेज हो गई है। मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद की प्रस्तावित रेप्लिका के ऐलान के बाद अब राज्य में राम मंदिर निर्माण की घोषणा की गई है। यह मंदिर मुर्शिदाबाद से करीब 90 किलोमीटर दूर नादिया जिले के शांतिपुर इलाके में बनेगा। खास बात यह है कि मंदिर को अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर बनाया जाएगा, लेकिन रामलला का स्वरूप पूरी तरह बंगाल की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा होगा।

15 बीघा जमीन पर बनेगा अयोध्या जैसा मंदिर

श्री कृत्तिबास राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से प्रस्तावित यह मंदिर नादिया जिले के शांतिपुर स्थित चंपटोला साधुरघाट क्षेत्र में बनाया जाएगा। ट्रस्ट के मुताबिक, मंदिर के लिए 15 बीघा यानी लगभग 9.73 एकड़ जमीन पहले से ही उपलब्ध है। यह स्थान बेलडांगा से लगभग 90 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां बाबरी मस्जिद की रेप्लिका की नींव रखे जाने का दावा किया गया था। इस भौगोलिक दूरी को लेकर भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

फरवरी में रखी जाएगी आधारशिला

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, राम मंदिर की आधारशिला फरवरी महीने में रखी जाएगी। हालांकि यह परियोजना नई नहीं है। ट्रस्ट का कहना है कि इसकी शुरुआत वर्ष 2017 में ही हो चुकी थी, लेकिन समय के साथ यह पहल ठंडे बस्ते में चली गई। अब विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले इसे दोबारा सक्रिय किया गया है, जिस पर राजनीतिक समय-सारिणी को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

कृत्तिबास रामायण से प्रेरित होगी प्रतिमा

मंदिर की सबसे खास बात भगवान राम की प्रतिमा होगी। ट्रस्ट के अनुसार, रामलला की मूर्ति 14वीं शताब्दी के प्रसिद्ध बंगाली कवि कृत्तिबास ओझा द्वारा रचित कृतिवासी रामायण में वर्णित स्वरूप के अनुसार बनाई जाएगी। भगवान राम का रंग हरा दर्शाया जाएगा और वे गर्भगृह में माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ विराजमान होंगे। यह स्वरूप अयोध्या के राम मंदिर से अलग, विशुद्ध रूप से बंगाली सांस्कृतिक पहचान को दर्शाएगा।

‘यह राजनीतिक नहीं, सांस्कृतिक पहल है’

ट्रस्ट के अध्यक्ष अरिंदम भट्टाचार्य ने इस परियोजना को लेकर साफ किया कि इसे राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। कांग्रेस के पूर्व विधायक रहे और बाद में बीजेपी में शामिल हुए भट्टाचार्य ने कहा कि यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक पहल है, जिसकी नींव 2017 में तब रखी गई थी जब वे शांतिपुर से विधायक थे। उनके अनुसार, कुछ समय तक वे क्षेत्र से बाहर रहे, जिससे टीम बिखर गई, लेकिन अब दोबारा पूरी तैयारी के साथ काम शुरू किया गया है।

मंदिर के साथ शोध और सांस्कृतिक केंद्र भी

राम मंदिर केवल पूजा स्थल तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रस्ट की योजना के अनुसार, मंदिर परिसर में एक अनुसंधान केंद्र, डिजिटल विरासत केंद्र और सांस्कृतिक केंद्र भी विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य बंगाल की रामकथा परंपरा, कृत्तिबास रामायण और स्थानीय धार्मिक इतिहास को संरक्षित और प्रचारित करना है। ट्रस्ट का दावा है कि मंदिर और प्रतिमा दोनों के डिजाइन को अंतिम रूप दे दिया गया है।

ममता सरकार के हालिया धार्मिक कदमों के बाद बढ़ी चर्चा

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाल ही में दीघा में जगन्नाथ धाम का उद्घाटन कर चुकी हैं। इसके अलावा न्यू टाउन में दुर्गांगन और सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर की आधारशिला भी रखी गई है। ऐसे में नादिया में राम मंदिर निर्माण की घोषणा को राज्य में बढ़ती धार्मिक गतिविधियों और उसके सियासी मायनों से जोड़कर देखा जा रहा है।

बंगाल में राम राजनीति या सांस्कृतिक पुनर्जागरण?

नादिया के शांतिपुर में प्रस्तावित राम मंदिर आने वाले समय में सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक विमर्श का भी केंद्र बन सकता है। बाबरी मस्जिद रेप्लिका और राम मंदिर के बीच की 90 किलोमीटर की दूरी भले भौगोलिक हो, लेकिन इसके निहितार्थ राज्य की राजनीति में दूर तक असर डाल सकते हैं।
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