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February 10, 2026

बांग्लादेश चुनाव में महिला उम्मीदवार ‘टारगेट’ पर: साइबर बुलिंग, चरित्र हनन और धमकियों का तूफान, राजनीति में महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

The CSR Journal Magazine
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने जा रहे संसदीय चुनाव सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि महिला प्रतिनिधित्व और सुरक्षा की भी एक बड़ी परीक्षा बनते जा रहे हैंI देश की कुल आबादी में महिलाएं लगभग आधी हैं, लेकिन चुनावी मैदान में उनका प्रतिनिधित्व महज 4 फीसदी के आसपास सिमटा हुआ हैI 350 सदस्यीय संसद में 300 सीटों पर सीधे चुनाव हो रहे हैं, जबकि 50 सीटें महिलाओं के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर तय होती हैंI चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 51 राजनीतिक दलों में से 30 दलों ने एक भी महिला उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारीI रिपोर्ट्स बताती हैं कि बिगड़ती कानून-व्यवस्था और असुरक्षा का माहौल महिलाओं को राजनीति से दूर रखने की बड़ी वजह बन चुका हैI

चुनावी मैदान में महिला उम्मीदवार ‘सॉफ्ट टारगेट’

चुनावी प्रचार के बीच महिला प्रत्याशियों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैंI साइबर बुलिंग, चरित्र हनन, यौन उत्पीड़न और जान से मारने की धमकियां अब आम होती जा रही हैंI स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई महिला उम्मीदवारों ने ऑनलाइन ट्रोलिंग और जमीनी स्तर पर डराने-धमकाने की शिकायत दर्ज कराई हैI इन हमलों का मकसद साफ है — महिलाओं को डराकर चुनावी प्रक्रिया से बाहर करनाI
ढाका-19 सीट से नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) की उम्मीदवार दिलशाना पारुल का कहना है कि उन्हें लगातार ऑनलाइन निशाना बनाया जा रहा है, खासकर उनके पहनावे और हेडस्कार्फ को लेकर उन्होंने कहा कि ट्रोलिंग सिर्फ राजनीतिक विरोधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि खुद को प्रोग्रेसिव बताने वाले लोग भी इसमें शामिल हैंI उनके मुताबिक, महिला उम्मीदवारों पर व्यक्तिगत हमले किए जाते हैं, जबकि पुरुष नेताओं की आलोचना नीतियों और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर होती हैI

धमकियां, हिंसा और डर का माहौल

पारुल ने यह भी आरोप लगाया कि उनके अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं को शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकियां दी गई हैंI कुछ इलाकों में उनके समर्थकों पर हमले हुए और महिला वोटर्स को डराने की घटनाएं भी सामने आईंI उनका कहना है कि जैसे-जैसे विरोधी दलों की हार की आशंका बढ़ती है, वैसे-वैसे धमकियों का स्तर भी तेज हो जाता हैI इसके बावजूद उन्होंने साफ कहा कि वह डर के आगे झुकने वाली नहीं हैं और अपने क्षेत्र के विकास पर फोकस बनाए रखेंगीI

“इंस्टीट्यूशनल सपोर्ट” पर सवाल

ढाका-20 से एनसीपी उम्मीदवार नबीला तस्नीद ने प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल उठाए हैंI उन्होंने आरोप लगाया कि उनके प्रचार बैनर और पोस्टर फाड़ दिए गए, लेकिन जब शिकायत की गई तो अधिकारियों ने सबूत मांगकर मामले को टाल दियाI तस्नीद का कहना है कि महिला नेतृत्व को लेकर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है और यह नैरेटिव गढ़ा जा रहा है कि समाज महिला नेताओं को स्वीकार नहीं करेगाI उनका एजेंडा खेती, किसानों के अधिकार, रोजगार, तकनीकी शिक्षा और महिलाओं के लिए वैश्विक अवसरों पर केंद्रित है, लेकिन प्रचार का मुख्य हथियार उनके खिलाफ चरित्र हनन बन गया हैI

“बिना महिलाओं के गवर्नेंस सुधार असंभव”

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की पोती और बीएनपी नेता तारिक रहमान की बेटी जाइमा रहमान ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का रूप दे दिया हैI ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी के बिना किसी भी तरह का सार्थक गवर्नेंस सुधार संभव नहीं हैI उन्होंने राजनीतिक दलों से मांग की कि महिला नेताओं की सुरक्षा के लिए एक कानूनी आचार संहिता बनाई जाए, जो उन्हें साइबर बुलिंग और शारीरिक खतरों से बचा सकेI
जाइमा रहमान ने कहा कि महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि संरचनात्मक बदलाव जरूरी हैं — जिसमें राजनीतिक पहुंच, वित्तीय संसाधन, बोलने की आजादी, मेंटरशिप और ट्रेनिंग कार्यक्रम शामिल हों. उन्होंने छात्र राजनीति से लेकर स्थानीय सरकार तक महिलाओं के लिए एक मजबूत “पाथवे” बनाने की जरूरत पर जोर दियाI
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