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February 22, 2026

भाषाई अस्मिता का तीर: ममता बनर्जी ने बीजेपी को घेरा

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में भाजपा पर जबरदस्त हमला करते हुए भाषाई अस्मिता और बंगालियों के सम्मान की मांग की। 21 फरवरी को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाली बोलने वालों को “घुसपैठिया” कहना बेहद अस्वीकार्य है। ममता ने भाषाई पहचान को एक अहम मुद्दा बनाते हुए स्वतंत्रता संग्राम में बंगाल की भूमिका और संस्कृति का जिक्र किया। उनके इस बयान ने चुनावी सियासत में एक नई हलचल पैदा कर दी है।

अपमान सहन नहीं होगा

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि जब किसी भाषा पर हमला होता है, तो वह सबके लिए खतरा है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह उनकी भाषा और संस्कृति का अपमान कर रही है। ममता का कहना है कि हमारे राज्य में बाहरी लोगों का सम्मान किया जाता है, फिर क्यों बंगालियों को निशाना बनाया जा रहा है? उन्होंने यह सवाल उठाया कि क्या सिर्फ अपनी भाषा बोलना अपराध है? ममता के इस बयान ने एक नए विवाद को जन्म दिया है।

भाषाई विविधता का सम्मान

ममता ने विभिन्न भाषाओं की मान्यता की बात करते हुए कहा कि राजबंशी, नेपाली, गुरुमुखी और उर्दू जैसी कई भाषाओं को भी मान्यता दी गई है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बंगाली को अपमानित करने वाले कुछ खास लोग ही इस भाषा को विदेशी बताते हैं। ममता का तर्क है कि बंगाली इस देश की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा है।

दिल्ली के खिलाफ खुली चुनौती

मुख्यमंत्री ने दिल्ली में साहित्य अकादमी के पक्षपात पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि हर बार बंगाल के लेखकों और सांस्कृतिक हस्तियों को नजरअंदाज किया जाता है। यह स्पष्ट दिखाता है कि बंगाल की पहचान को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं। ममता ने यह भी कहा कि यदि यह सब नहीं बदला, तो बंगाल की आवाज को उठाने से पीछे नहीं हटेंगी।

बंगाल का गौरव और संघर्ष

ममता ने आगे कहा कि बंगाल की मिट्टी में ही आजादी की लड़ाई का कण-कण है। उनके मुताबिक, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में बंगालियों ने मुख्य भूमिका निभाई थी, और आज भी उनकी पहचान को मिटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बंगाली कभी भी अपनी संस्कृति, भाषा और पहचान के लिए झुकेंगे नहीं।

घुसपैठियों का हौसला बढ़ना चिंता का विषय

बीजेपी की ओर से बंगालियों को घुसपैठिया कहने के आरोपों ने ममता बनर्जी को और मुखर बना दिया है। उन्होंने सभी से अपील की कि भारत की विविधता को सम्मान दिया जाए, और किसी विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभाव नहीं होना चाहिए। ममता ने कहा कि बंगाल के लोग किसी भी परिस्थिति में अपनी पहचान को बचाएंगे।

संस्कृति और कल्चर की रक्षा

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बंगाल की भाषा और संस्कृति का अपमान करना लोकतंत्र के खिलाफ है। सभी धर्मों के बीच सद्भाव का दृष्टांत पेश करते हुए ममता ने कहा कि किसी भी वर्ग का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि अगर लोकतंत्र की रक्षा करनी है, तो सभी को एकजुट होना होगा। उनके इस बयान ने आगामी चुनावों में एक नई ऊर्जा भर दी है।

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