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February 19, 2026

इलाहाबाद HC का बड़ा फैसला: ट्रांसजेंडर और समलैंगिक जोड़े को Live-in में रहने की इजाजत

The CSR Journal Magazine
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए ट्रांसजेंडर और समलैंगिक जोड़े को लिव-इन रिलेशनशिप में रहने की इजाजत दी है। कोर्ट ने परिवारों को साफ निर्देश दिया है कि वे इन जोड़ों के जीवन में हस्तक्षेप न करें। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की पीठ ने यह निर्णय सुनाया, जिसमें कहा गया कि हर बालय व्यक्ति को अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुनने का अधिकार है।

संविधान के तहत जीवन की स्वतंत्रता

कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया। जस्टिस सिंह ने कहा कि परिवार या समाज को किसी भी व्यक्ति के जीवनसाथी को चुनने में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। मामले में याचिकाकर्ता ने कोर्ट में यह दावा किया कि उनके परिवार की ओर से उन्हें जान का खतरा है। इसलिए, उन्हें सुरक्षा की आवश्यकता है।

कोर्ट का स्पष्ट संदेश

कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के नवतेज सिंह जोहर बनाम भारत संघ (2018) मामले का हवाला दिया। इस मामले में समलैंगिक संबंधों को मान्यता दी गई थी, जिससे आईपीसी की धारा 377 को समाप्त किया गया। इस फैसले ने यह तय किया कि ऐसी रिश्ते संविधान का उल्लंघन नहीं करते।

कोर्ट ने सुरक्षा का दिया आश्वासन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्थानीय पुलिस को निर्देश दिया कि यदि याचिकाकर्ताओं के शांतिपूर्ण जीवन में कोई समस्या आती है, तो वे पुलिस से संपर्क कर सकते हैं। पुलिस को तत्काल सुरक्षा प्रदान करने का आदेश भी दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि वह सभी नागरिकों की स्वतंत्रता की रक्षा करे।

पुलिस की कार्रवाई पर ध्यान

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर पुलिस को किसी प्रकार का दस्तावेज नहीं मिलता है, तो भी वे बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट जैसे कानूनी तरीके का उपयोग करके उम्र की सच्चाई जान सकते हैं। हालांकि, अगर कोई अपराध दर्ज नहीं है, तो पुलिस जबरन कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।

लिव-इन संबंधों का महत्व

इस फ़ैसले से यह स्पष्ट है कि लिव-इन रिलेशनशिप की मान्यता सिर्फ समलैंगिकों के लिए ही नहीं, बल्कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए भी है। ऐसे रिश्ते जिस पर समाज या परिवार का अध्यादेश नहीं चलना चाहिए, उन्हें न्यायालय ने संरक्षण दिया है। यह फैसला उन लोगों के लिए राहत की किरण है, जो अपने जीवन को अपने तरीके से जीना चाहते हैं।

समाज में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद

इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला उन लोगों के लिए एक सकारात्मक दिशा में कदम है, जो अपने जीवन को अपने तरीके से जीने की ख्वाइश रखते हैं। यह फैसला न केवल एक कानूनी अधिकार की पुष्टि करता है, बल्कि समाज में समर्पण और सहिष्णुता का संदेश भी भेजता है।
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