The CSR Journal Magazine
महाराष्ट्र स्टेट कॉरपोरेशन बैंक घोटाले से जुड़े 25 हजार करोड़ रुपये के मामले में सुनवाई के दौरान स्पेशल कोर्ट ने सुनेत्रा पवार और उनके पति अजित पवार समेत 70 से अधिक लोगों को क्लीन चिट दी है। आर्थिक अपराध विंग (EOW) की क्लोजर रिपोर्ट को कोर्ट ने स्वीकार किया, जिसमें साफ कहा गया कि जांच में कोई आपराधिक मामला नहीं बनता। इससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।

कोर्ट ने दी बड़ी राहत

स्पेशल जज महेश जाधव ने EOW की C-समरी रिपोर्ट को मान्यता दी। C-समरी का मतलब यह है कि जांच में किसी भी प्रकार की आपराधिक गतिविधि नहीं पाई गई। इसलिए जिन लोगों को पहले आरोपी समझा गया था, उन्हें अब क्लीन चिट मिल गई है। यह निर्णय सुनेत्रा पवार और अजित पवार के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्होंने इस पूरे मामले में अपनी संलिप्तता को खारिज किया था।

प्रोटेस्ट पिटीशन को खारिज किया गया

स्पेशल कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे समेत अन्य नागरिकों की प्रोटेस्ट पिटीशन को भी खारिज कर दिया। इसमें ईडी की इंटरवेंशन पिटीशन भी शामिल थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की हालिया शिकायतें अनावश्यक थीं।

मामले की शुरुआत की कहानी

यह मामला 2019 में शुरू हुआ जब मुंबई हाईकोर्ट ने आरोपों के आधार पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। आरोपित किया गया था कि MSCB और कुछ जिला सहकारी बैंकों ने शुगर फैक्टियों को नियमों के खिलाफ लोन दिये थे। यह आरोप था कि शुगर फैक्ट्रियों में गलत तरीके से लोन दिया गया और बाद में उन फैक्ट्रियों को बेहद कम दाम पर बेचा गया। इन गतिविधियों में बैंकों के अधिकारी और कुछ नेता भी शामिल थे।

EOW की जांच का क्या था नतीजा?

EOW की 35 पन्नों की रिपोर्ट में तीन मुख्य ट्रांजैक्शन की जांच की गई। सतारा की जरंदेश्वर शुगर फैक्ट्री समेत कुछ इकाइयों की जांच के दौरान किसी भी प्रकार की आपराधिक गड़बड़ी नहीं पाई गई। EOW ने अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने लाया, जिसमें यह भी बताया गया कि बैंक को कोई नुकसान नहीं हुआ और लोन से ₹1,343 करोड़ से ज्यादा की वसूली हो चुकी है।

ईडी के केस पर पड़ेगा असर

EOW की जांच के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था, जिसमें पहले चार्जशीट भी दाखिल की गई थी। अब जब कोर्ट ने EOW की क्लोजर रिपोर्ट को मान्यता दी है, तो इससे ईडी के केस पर महत्वपूर्ण असर पड़ सकता है। इस फैसले ने कई सवालों को उत्पन्न कर दिया है, खासकर राजनीतिक दलों में।
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