Affidavit की अनिवार्यता खत्म कर प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया को सरल बनाएगा तकनीक

The CSR Journal Magazine
भारत में प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। 1840 के रेगुलेशन से शुरू होकर, शपथ पत्रों की प्रक्रिया में कई बदलाव हुए हैं। पहले लोग धार्मिक ग्रंथों के नाम पर शपथ लेते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया तकनीक के माध्यम से आसान बनाई जा रही है।
विधि आयोग की रिपोर्टों के अनुसार, शपथ पत्र और ओथ के बीच कानूनी अंतर को समझना बेहद जरूरी है। इससे पहले, सरकारी कामकाज में राजपत्रित अधिकारी के सत्यापन की आवश्यकता होती थी, जिससे भ्रष्टाचार और लालफीताशाही बढ़ती थी। इस समस्या का समाधान करने के लिए पंजाब ने 2009 में पहल की थी।

प्रधानमंत्री मोदी के सुधार

जून 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी सेवाओं को सरल बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। इसके तहत, केंद्र सरकार के सभी विभागों में शपथ पत्र और राजपत्रित अधिकारी के सत्यापन की अनिवार्यता खत्म की गई। अब ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए भी शपथ पत्र की आवश्यकता को समाप्त किया जा रहा है।

टेक्नोलॉजी का प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस डी.वाई.चंद्रचूड़ ने कहा था कि न्यायिक सिद्धांत भले ही पुराने हों, लेकिन प्रक्रियाओं को आधुनिक तकनीक के अनुरूप बनाना आवश्यक है। कोरोना महामारी के दौरान, वर्चुअल सुनवाई और लाइव स्ट्रीमिंग ने न्यायपालिका में तकनीक का उपयोग बढ़ाया है।
अब डिजिटल सिग्नेचर वाले ऑनलाइन आदेशों से लोगों की मुश्किलें कम हुई हैं। इसी तर्ज पर, आधार ऑथेंटिकेशन के माध्यम से लोगों के सेल्फ डिक्लेरेशन को शपथ पत्र की मान्यता दी जानी चाहिए। इससे प्रक्रिया में तेजी आएगी और लोगों का समय बचेगा।

चुनावों में शपथ पत्र की अनिवार्यता

रिप्रजेंटेशन ऑफ पीपल एक्ट के तहत चुनावी प्रत्याशियों के लिए शपथ पत्र देना अनिवार्य है। गलत जानकारी देने पर विजयी उम्मीदवार का चुनाव रद्द हो सकता है और उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा भी चल सकता है। यह प्रक्रिया चुनावों की पारदर्शिता को बढ़ावा देती है।

कानूनी मान्यता की आवश्यकता

सिविल प्रोसिजर कोड (CPC) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत, मैजिस्ट्रेट या जज शपथ पत्र से गवाही देने का आदेश दे सकते हैं। सामान्य मामलों में इसकी अनिवार्यता से लोगों की परेशानी बढ़ती है, जबकि पेशेवरों के लिए यह प्रक्रिया आसान होती है।

निवेशकों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस

विदेशी निवेशकों को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत कई छूट मिलती है। सरकार नए आपराधिक कानूनों और न्याय-सेतु, ई-समन व ई-साक्ष्य जैसे टूल्स से जल्द न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। इससे प्रशासन और न्यायिक व्यवस्था में सुधार होगा।
अभी अदालतों में 5.83 करोड़ मुकदमे लंबित हैं। झूठे शपथ पत्र देने पर आपराधिक मुकदमा चलाने की आवश्यकता है। झूठा हलफनामा देने पर जुर्माना लगाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है।

सख्ती की जरूरत

अमेरिका जैसे देशों में झूठा शपथ पत्र या गवाही देने पर जेल होती है। इससे मुकदमों का बोझ घटने के साथ सुनवाई में तेजी आती है। इसी तर्ज पर, मुकदमे की शुरुआत में शिकायतकर्ता, जांच अधिकारी और गवाहों के पॉलीग्राफ टेस्ट होने चाहिए।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos