UP SIR: फाइनल वोटर लिस्ट में 84 लाख मतदाता बढ़े, जानें किस शहर में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ?

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश की फाइनल वोटर लिस्ट अब जारी हो गई है, जिसमें 10 अप्रैल को 84 लाख नए मतदाताओं का इजाफा देखने को मिला है। इस लिस्ट के बाद यूपी में कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 हो गई है। इस आंकड़े में पुरुष, महिला और थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं। फाइनल वोटर लिस्ट एसआईआर (Special Intensive Revision) अभियान के बाद आई है, जो 27 अक्टूबर 2025 से 10 अप्रैल 2026 तक चला। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता संख्या में बढ़ोतरी करना था।

छोटी-बड़ी बारीकियों का ध्यान

इस अभियान में 75 जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) और 5,82,877 बूथ लेवल एजेंट्स की सक्रिय भागीदारी रही। करोड़ों मतदाताओं ने इसमें सहयोग किया। महत्वपूर्ण टाइमलाइन के अनुसार, मसौदा सूची की घोषणा 6 जनवरी 2026 को की गई थी।

मतदाता आंकड़ों में वृद्धि की तुलना

मसौदा सूची में कुल मतदाता संख्या 12,55,56,025 थी, लेकिन अंतिम मतदाता सूची में यह आंकड़ा 13,39,84,792 पहुंच गया, जो कि 84,28,767 मतदाताओं की वृद्धि दर्शाता है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वाले विधानसभा क्षेत्र में साहिबाबाद (55) शामिल है, जहां 82,898 नए मतदाता जुड़े हैं।

व्यवस्थाओं का सराहनीय प्रयास

प्रशासनिक व्यवस्था के तहत 403 निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारियों की तैनाती की गई थी। मतदाताओं की सुविधा के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वे मतदाताओं और उनके प्रतिनिधियों को पूरी सहायता प्रदान करें। मामले में किसी भी तार्किक विसंगति के लिए बीएलओ को नोटिस की पावती और फोटो अपलोड करने की अनिवार्यता दी गई है।

राजनीतिक दलों की भागीदारी

इस विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कुल 107 ज्ञापन विभिन्न राजनीतिक दलों से प्राप्त हुए, जिनमें समाजवादी पार्टी ने 85 ज्ञापन भेजे। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और आम आदमी पार्टी से भी ज्ञापन प्राप्त हुए। सभी ज्ञापनों में उठाई गई शिकायतों का भी निस्तारण किया गया है।

शिकायतों का निवारण प्रणाली

इस प्रक्रिया के दौरान 1,08,529 शिकायतें NGSP पोर्टल पर प्राप्त हुईं। बीएलओ के साथ सीधे बात करने के लिए भी मतदाता अब कॉल बुक कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य स्तर पर एक हेल्पलाइन भी उपलब्ध है, जिससे मतदाता सहायता प्राप्त कर सकते हैं। जन शिकायत निवारण प्रणाली (PGRS) के अंतर्गत भी कुल 431 शिकायतें प्राप्त हुईं।

कैसे जुड़े रहें जानकारी से?

इस बार प्रशासन ने व्यवस्था को और बेहतर बनाने की कोशिश की है, ताकि चुनावी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए। मतदाता सहायता समर्पित है, जिससे लोग आसानी से अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें। चुनावी प्रक्रिया में इस तरह के प्रयास जरूरी हैं, ताकि लोकतंत्र की नींव मजूबत बनी रहे।

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