स्पाइसजेट में 20% स्टाफ की छंटनी की तैयारी, सैलरी में देरी से कर्मचारियों का बुरा हाल

The CSR Journal Magazine
देश की प्राइवेट एयरलाइन स्पाइसजेट गंभीर संकट से गुजर रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने 20% स्टाफ कम करने का निर्णय लिया है जिसमें 500 से अधिक कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा जा सकता है। वर्तमान में एयरलाइन के पास 6,800 कर्मचारी हैं और वह केवल 13 विमान के जरिये परिचालन कर रही है। इन 13 विमानों में 10 बोइंग और 3 Q400 शामिल हैं। अन्य 14 विमान वेट-लीज पर संचालित हो रहे हैं।

आर्थिक चुनौतियों का सामना

सीनियर अफसरों को जनवरी से आज तक वेतन नहीं मिला है और अन्य कर्मचारियों को भी सैलरी 2-3 महीने की देरी से मिल रही है। कंपनी पर जीएसटी, टीडीएस और पीएफ का 100 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। टीडीएस अप्रैल 2025 से और जीएसटी पिछले 5 महीनों से जमा नहीं हुआ है। इस वित्तीय तंगी के चलते सैकड़ों इंजीनियरों ने इस्तीफा दे दिया है।

बाजार में चुनौती

स्पाइसजेट का घरेलू बाजार में हिस्सा गिरकर महज 3.9% रह गया है। इसके मुकाबले नई एयरलाइन अकासा ने 4.9% बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है। अधिकतर पुराने कर्मचारी अपने बकाए का भुगतान नहीं होने के कारण नाराज हैं। पायलटों की सैलरी में कमी की गई है, और उनके लिए अब 21 दिन काम करने का नया नियम लागू किया गया है।

वित्तीय आंकड़े बताते हैं चिंता का विषय

स्पाइसजेट का जुलाई-सितंबर तिमाही में घाटा बढ़कर ₹621 करोड़ पहुंच गया है, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹458 करोड़ था। कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू भी 13% घटकर ₹792 करोड़ रह गया है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति और भी बिगड़ गई है।

घाटे के प्रमुख कारण

स्पाइसजेट के घाटे के पीछे तीन मुख्य कारण हैं। पहला, ऑपरेटिंग कॉस्ट का बढ़ना। कंपनी ने कई प्लेन ग्राउंडेड रखे, जिसका खर्च ₹297 करोड़ तक पहुंच गया। दूसरी बात, लीजन डिमांड में कमी आई है। मानसून में यात्रा कम होती है, और इससे बिक्री में गिरावट आई है। तीसरा, सप्लाई चेन की समस्याएं हैं जो विमानों के संचालन में बाधा डाल रही हैं।

स्पाइसजेट का परिचय

स्पाइसजेट भारत की लो कॉस्ट एयरलाइन है जो देश के सुदूर कोनों को जोड़ती है। यह लगभग 48 डेस्टिनेशन पर और इंटरनेशनल डेस्टिनेशन के लिए लगभग 250 फ्लाइट डेली ऑपरेट करती है। स्पाइसजेट की स्थापना 2004 में हुई थी और यह अपनी पहली फ्लाइट 2005 में संचालित करने में सफल रही थी। हाल के संकट ने इसे नए चुनौतियों के समक्ष ला खड़ा किया है।

समय की मांग

आगे के समय में कंपनी को अपने फ्लीट को मजबूत करने तथा कर्मचारियों की भलाई पर ध्यान केंद्रित करना होगा। हालांकि, वर्तमान संकट के समय में कर्मचारियों की भरपूर सहायता और वित्तीय स्थिरता के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

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