चुनाव बाद 22 राज्यों में शुरू होगा नया वोटर वेरिफिकेशन, 39 करोड़ लोग होंगे शामिल

The CSR Journal Magazine
भारत के चुनाव आयोग ने चुनावों के बाद स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया शुरू करने की योजना बनाई है। इसमें देश के 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया जाएगा। इस प्रक्रिया का मकसद मतदाता सूची को अपडेट करना और सही करना है। इसमें 39 करोड़ मतदाता शामिल होंगे, जो कि देश के करीब 99 करोड़ वोटरों में से हैं। SIR की तैयारी 29 अप्रैल को होने वाले चुनावों के बाद शुरू होगी।

मतदान कराने वाले राज्य

इस बार विधानसभा चुनाव कर्नाटका, तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी में हो रहे हैं, जिनके नतीजे 4 मई को आएंगे। SIR प्रक्रिया की शुरुआत इन चुनावों के बाद होगी। चुनाव आयोग ने पहले ही SIR को लागू करने की समयसीमा निर्धारित की है, जिसके अनुसार सभी राज्यों में 24 जून 2025 तक प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

पहला और दूसरा चरण की जानकारी

Pehle phase में SIR बिहार में किया गया था, जबकि दूसरे चरण में उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख राज्यों में 28 अक्टूबर 2025 से यह प्रक्रिया शुरू होगी। अब तक 12 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया चल रही है। इस अभियान के तहत 60 करोड़ मतदाता वेरिफाई किए जा चुके हैं।

SIR क्या है और यह कैसे काम करता है?

SIR एक चुनावी प्रक्रिया है, जिसमें BLOCK Level Officers (BLO) और Booth Level Agents (BLA) घर-घर जाकर मतदाताओं का वेरिफिकेशन करते हैं। इस दौरान वोटरों से फॉर्म भरवाए जाते हैं और उनकी जानकारी को अपडेट किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति का नाम दो जगह पर लिस्ट में है, तो उसे एक जगह से हटवाना होगा।

क्या दस्तावेज चाहिए होंगे?

SIR के दौरान वोटरों को कुछ जरूरी दस्तावेज पेश करने होंगे। इनमें पेंशनर पहचान पत्र, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट और आधार कार्ड जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। ये सभी दस्तावेज सही पहचान और प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं।

SIR का मकसद और लाभ

ये प्रक्रिया मौजूदा मतदाता सूची में आवश्यक सुधार करने के लिए जरूरी है। इसमें लोगों का माइग्रेशन, मृतक मतदाता के नामों को हटाना, और योग्य मतदाताओं को जोड़ना शामिल है। SIR का मुख्य उद्देश्य यह है कि कोई भी योग्य मतदाता मतदाता सूची में न छूटे और कोई भी अयोग्य मतदाता सूची में न रहे। इस प्रक्रिया से चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

पश्चिम बंगाल में स्थिति

पश्चिम बंगाल में SIR के चलते करीब 60 लाख आपत्तियों में से लगभग 47 लाख आपत्तियों का निपटारा किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जानकारी 31 मार्च को दी थी। सभी संबंधी मुद्दों का समाधान 7 अप्रैल तक किया जाएगा, ताकि चुनावी प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।

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