Train में पैसेंजर नहीं, फिर भी मिट्टी से भरे कट्टे क्यों, क्या है इसके पीछे की वजह?

The CSR Journal Magazine
ट्रेन में सफर करते समय आपने कई बार देखा होगा कि कुछ डिब्बों में सीटें खाली होती हैं। लेकिन वहां मिट्टी से भरे कट्टे, बोरे या प्लास्टिक के जरीकेन रखे दिखाई देते हैं। यह एक आम सवाल है कि जब ट्रेन में कोई यात्री नहीं है, तो इतना वजन क्यों रखा गया है? क्या रेलवे कोई सामान ढो रहा है या इसके पीछे कोई खास कारण है? दरअसल, ये मिट्टी या जरीकेन हमेशा किसी यात्री का सामान नहीं होते। कई बार इनका उपयोग ट्रेन की जांच और टेक्निकल टेस्ट के दौरान किया जाता है। ट्रेन का प्रदर्शन और क्षमता समझने के लिए खाली स्थिति में चलाना पर्याप्त नहीं है।

ट्रेन की टेस्टिंग में भूमिका

असल सफर के दौरान जब डिब्बे में बड़ी संख्या में यात्री और उनका सामान होता है, तो कोच का वजन काफी बढ़ जाता है। इसीलिए तकनीकी जांच के दौरान यात्रियों के संभावित वजन के बराबर आर्टिफिशियल वेट रखा जाता है। ट्रेन में दिखाई देने वाले ऐसे कट्टे सिर्फ सामान की ढुलाई के लिए नहीं होते। कई बार यही कट्टे ट्रेन के टेस्टिंग और तकनीकी जांच के लिए भी होते हैं। उदाहरण के लिए, ट्रेन की वर्गीकृत जांच के दौरान, डिब्बों और पहियों पर पड़ने वाले भार का प्रभाव समझना बेहद महत्वपूर्ण है।

वजन की आवश्यकता क्यों होती है?

जब ट्रेन पटरी पर चलती है, तो डिब्बों और पहियों पर पड़ने वाला भार ज्यादा सटीक ढंग से समझा जाना चाहिए। अगर डिब्बा खाली है, तो ट्रेन का व्यवहार पूरी तरह भरे डिब्बे से अलग हो सकता है। इसी कारण कुछ परीक्षणों में डिब्बे के अंदर अतिरिक्त वजन रखा जाता है, ताकि ट्रेन और उसके उपकरण भार की स्थिति में किस तरह काम करते हैं, यह समझा जा सके। इसके लिए ऐसा सामान चुना जाता है जिसे आसानी से डिब्बे में रखा और हटाया जा सके।

मिट्टी का चयन क्यों?

कुछ लोगों के मन में सवाल उठ सकता है कि अगर वजन डालना है तो मिट्टी ही क्यों? मिट्टी या अन्य भराव सामग्री आसानी से उपलब्ध होती है और इसे अलग-अलग मात्रा में बोरे, जरीकेन या दूसरे कंटेनर में भरा जा सकता है। जरूरत पड़ने पर वजन बढ़ाया या घटाया भी जा सकता है, जिससे ट्रेन में एक निश्चित अतिरिक्त भार तैयार किया जा सकता है। लेकिन हर ट्रेन में जो मिट्टी का कट्टा दिखाई देता है, वह टेस्टिंग के लिए ही नहीं होता। कई बार यह रेलवे या किसी ठेकेदार से जुड़े काम का सामान भी हो सकता है।

टीकाकरण का महत्व

एक खाली ट्रेन को भी टेस्टिंग के लिए चलाना आवश्यक होता है। केवल खाली चलाकर ट्रेन की क्षमता का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता। असल सफर में ट्रेन में सैकड़ों यात्री होते हैं, जिनके बैठने, खड़े होने और सामान रखने से डिब्बे का कुल वजन बढ़ जाता है। इसलिए जब किसी ट्रेन, कोच या किसी तकनीकी व्यवस्था की जांच की जाती है, तो वास्तविक परिस्थितियों के करीब जाकर परीक्षण करना जरूरी होता है। ऐसे समय पर डमी लोड का उपयोग होता है।

सामग्री का सामान्य उपयोग

यह समझना आवश्यक है कि डिब्बे में रखे मिट्टी से भरे कट्टे देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि ट्रेन पूरी तरह खाली थी। हो सकता है कि उस समय विशेष कोच में यात्री कम हों। रेलवे के रखरखाव, निर्माण या तकनीकी काम से जुड़ी सामग्री भी ट्रेन के जरिए एक जगह से दूसरी जगह ले जाई जाती है। इसलिए ट्रेन में रखे मिट्टी के कट्टे या जरीकेन देखकर घबड़ाने की जरूरत नहीं है। उनके पीछे सामान्य संचालन, परीक्षण, रखरखाव या सामान की ढुलाई जैसी वजह हो सकती है।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos