PM मोदी पर आपत्तिजनक पोस्टर करने वाले को कोर्ट ने क्यों दी जमानत?

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री मोदी की आपत्तिजनक AI तस्वीर पोस्ट करने वाले मुजाहिद जमाल शेख को पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत दे दी है। कोर्ट ने आरोपी के अपराधिक रिकॉर्ड न होने, जांच में सहयोग करने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को आधार बनाते हुए यह निर्णय लिया। शेख पर आरोप है कि उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक AI द्वारा बनाई गई तस्वीर शेयर की थी, जिसमें PM को बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को झुककर सलाम करते दिखाया गया था।

कोर्ट के तर्क स्पष्ट

पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि आरोपी का पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और उसके भागने या सबूतों से छेड़छाड़ करने की संभावना नहीं है। मामले के सबूत मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक हैं और आरोपी ने जांच में पूरी तरह से सहयोग किया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी का मोबाइल फोन पहले ही जब्त किया जा चुका है और जिस सोशल मीडिया अकाउंट से पोस्ट किया गया था, उसे जांच अधिकारी के कहने पर बंद कर दिया गया है।

पुलिस की तरफ से आरोप गंभीर

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मुजाहिद जमाल शेख के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(4) (जालसाजी), धारा 356(2) (आपराधिक मानहानि) और धारा 353(2) (नफरत फैलाना) के साथ-साथ IT एक्ट की धारा 66 भी लगाई है। सुनवाई के दौरान, दिल्ली पुलिस ने कहा कि इस पोस्ट से समाज में तनाव या विवाद उत्पन्न हो सकता है।

वकील का विरोध

हालांकि, मुजाहिद जमाल शेख के वकील ने दिल्ली पुलिस की ओर से लगाई गई धाराओं को गलत बताया। वकील ने तर्क दिया कि यह केवल एक कॉमेडी पोस्ट थी और इसमें किसी तरह की आपराधिक मंशा नहीं थी। पुलिस के तर्कों का जवाब देते हुए वकील ने कहा कि समाज में कोई तनाव उत्पन्न नहीं हुआ है।

AI का बढ़ता उपयोग और उसके प्रभाव

भारत में पिछले कुछ समय से AI का उपयोग कर गलत अफवा फैलाने और लोगों की छवि को नुकसान पहुंचाने के कई मामले सामने आए हैं। सुरक्षा एजेंसियों और सायबर क्राइम पुलिस लगातार ऐसे मामलों पर नजर बनाए हुए हैं। इस तरह की घटनाओं से यह सवाल उठता है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग किस तरह किया जा रहा है और इसके प्रति सामाजिक जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए।

समाज में प्रतिक्रिया होती है तेजी से

यह मामला केवल मुजाहिद जमाल शेख तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में ऑनलाइन टिप्पणी के बढ़ते मामलों का संकेत भी है। ऐसे में यह देखना होगा कि न्यायपालिका और कानून व्यवस्था इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए किन कदमों को उठाते हैं। क्या भविष्य में ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी या यह बस एक और घटना बनकर रह जाएगी?

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