मुंबई और महानगर क्षेत्र में पुरानी इमारतों के पुनर्विकास को गति देने के लिए महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) कई नए डिजिटल पोर्टल शुरू करने जा रहा है। म्हाडा के उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजीव जायसवाल (MHADA CEO and VP Sanjeev Jaiswal, IAS) ने बताया कि पुनर्विकास परियोजनाओं की निगरानी के लिए जल्द ही एक विशेष पोर्टल शुरू किया जाएगा। इसके माध्यम से परियोजनाओं की प्रगति, निर्माण की स्थिति और जरूरी जानकारियां ऑनलाइन उपलब्ध होंगी। इसके अलावा, जर्जर उपकरप्राप्त इमारतों के पुनर्विकास के लिए डेवलपर्स को NOC देने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन की जाएगी। इसका उद्देश्य NOC जारी करने में लगने वाले समय को मौजूदा लगभग 14 महीने से घटाकर तीन महीने करना है।
पुनर्विकास परियोजनाओं की निगरानी अब एक क्लिक पर
बांद्रा में आयोजित पुनर्विकास सम्मेलन और हितधारकों के साथ चर्चा कार्यक्रम में संजीव जायसवाल ने इन योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि म्हाडा के भूखंडों पर चल रही पुनर्विकास परियोजनाओं और समूह पुनर्विकास परियोजनाओं की निगरानी के लिए पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इस पोर्टल के जरिए म्हाडा के भवन अनुमति विभाग, डेवलपर्स और आर्किटेक्ट के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। डेवलपर और आर्किटेक्ट को निर्माण शुरू करने का प्रमाणपत्र मिलने के बाद हर तीन महीने में परियोजना की प्रगति रिपोर्ट अपडेट करनी होगी। इसके साथ ही निर्माण कार्य की मौजूदा स्थिति दर्शाने वाली तीन तस्वीरें भी पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। इस व्यवस्था से म्हाडा के संबंधित कार्यकारी अभियंताओं को परियोजनाओं की ताजा स्थिति एक क्लिक पर मिल सकेगी। इससे काम की निगरानी आसान होगी और परियोजनाओं में देरी की पहचान करने में भी मदद मिल सकती है।
NOC के लिए अब 14 महीने नहीं, तीन महीने का लक्ष्य
म्हाडा की मुंबई भवन मरम्मत एवं पुनर्निर्माण बोर्ड के अंतर्गत आने वाली उपकरप्राप्त इमारतों के पुनर्विकास के लिए भी नया ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा। फिलहाल डेवलपर्स को NOC मिलने में लगभग एक साल और दो महीने का समय लग रहा है। पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन होने के कारण इसमें देरी होती है। संजीव जायसवाल के मुताबिक, नई डिजिटल व्यवस्था के जरिए NOC जारी करने का समय घटाकर तीन महीने करने का लक्ष्य है। पोर्टल पर इमारतों की पहचान के लिए GIS तकनीक, दस्तावेजों की जांच के लिए OCR, ऑटोमेटेड वैलिडेशन और डिजिटल माध्यम से सहमति एवं मंजूरी की व्यवस्था की जाएगी।
इससे आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि, तीन महीने की अवधि प्रस्तावित नई व्यवस्था का लक्ष्य है।
2030 तक 8 लाख घर बनाने का लक्ष्य
कार्यक्रम में जायसवाल ने बताया कि नीति आयोग ने मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) को आवास क्षेत्र के ग्रोथ हब के रूप में चुना है। वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में लगभग 30 लाख किफायती घर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से आठ लाख घरों के निर्माण की जिम्मेदारी म्हाडा ने ली है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पुनर्विकास परियोजनाओं में डेवलपर्स और निर्माण कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। म्हाडा ने इससे पहले निवेश सम्मेलन और पुनर्विकास सम्मेलन भी आयोजित किए हैं। जायसवाल ने पुनर्विकास परियोजनाओं में प्रदूषण नियंत्रण के जरूरी उपाय अपनाने की अपील की। उन्होंने हितधारकों से एकीकृत विकास नियंत्रण एवं संवर्धन विनियम (UDCPR) में ऐसे बदलाव सुझाने का भी आग्रह किया, जिनसे भविष्य में किफायती घरों का निर्माण बढ़ाया जा सके।
भूखंडों का किराया ऑनलाइन भरने की सुविधा
म्हाडा अपने पट्टे पर दिए गए भूखंडों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भी एक पोर्टल विकसित कर रहा है। इसके शुरू होने के बाद संबंधित नागरिक ऑनलाइन वार्षिक भू-किराया भर सकेंगे और घर बैठे पट्टे का नवीनीकरण भी करा सकेंगे। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध कराने की योजना है। इससे पट्टे पर दिए गए भूखंडों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और भुगतान तथा नवीनीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके अलावा, किराये पर उपलब्ध घरों के लिए भी एक अलग पोर्टल बनाया जा रहा है। कार्यक्रम में म्हाडा के मुख्य अभियंता अनिल अंकलगी ने किराये के आवास से जुड़ी नीति का प्रारूप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि इस नीति का उद्देश्य किराये के घरों की उपलब्धता बढ़ाना है। सम्मेलन में म्हाडा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ MCHI, CREDAI और NAREDCO जैसे निर्माण क्षेत्र के संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
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