एक महीने से ज्यादा इंतज़ार: ईरान युद्ध में शहीद भारतीय सैनिक का परिवार शव की मांग करने के लिए हाई कोर्ट पहुंचा

The CSR Journal Magazine
32 साल के नाविक दीक्षित अमृतलाल सोलंकी की मौत 1 मार्च को ईरान युद्ध के दौरान हुई। उनके परिवार का कहना है कि उन्हें उनका पार्थिव शरीर लौटाने और मामले की संपूर्ण जांच की आवश्यकता है। शहीद की बहन मिताली और पिता अमृतलाल ने हाई कोर्ट में याचिका दी है। इस याचिका के माध्यम से परिवार ने सरकार से मांग की है कि उन्हें दीक्षित का शव लौटाया जाए, ताकि वे उसे अंतिम विदाई दे सकें।

संदेह में परिवार: क्या हुई थी असलियत?

दीक्षित की मौत के बाद परिवार को कई सवाल परेशान कर रहे हैं। अमृतलाल ने कहा, “33 दिन हो चुके हैं। मुझे जवाब चाहिए। मेरे बेटे के साथ क्या हुआ?” परिवार की चिंता और दर्द गहरा है, क्योंकि उन्हें नहीं पता कि दीक्षित कब मरा। क्या वह दर्द में था, या उसे सही समय पर मदद नहीं मिल पाई? यह सब सवाल परिवार के लिए परेशान करने वाले हैं।

आधिकारिक सुरक्षा की अनदेखी? परिवार की याचिका

हाई कोर्ट में दी गई याचिका में कई संबंधित मंत्रालयों को प्रतिवादी बनाया गया है। विदेश मंत्रालय और जहाजरानी महानिदेशालय जैसे संस्थानों से गंभीरता से मामला उठाने की उम्मीद की जा रही है। परिवार ने मांग की है कि जांच व फॉरेंसिक रिकॉर्ड उनके साथ शेयर किए जाएं ताकि सही स्थिति का पता लगाया जा सके।

घटना की संदिग्धता: एक गंभीर टर्निंग पॉइंट

1 मार्च को MT MKD Vyom जहाज पर एक ज़ोरदार धमाका हुआ, जिससे दीक्षित की जान चली गई। जहाज पर आरोपी गतिविधि के कारण परिवार को अब भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही है। पहले उन्हें बताया गया कि दीक्षित लापता हैं, फिर सूचना मिली कि उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। इस सबके बीच 21 अन्य क्रू सदस्य सुरक्षित पाए गए हैं।

विकास की कमी: परिवार की निराशा

घटना के बाद परिवार ने कंपनी के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन उन्हें एक समान जवाब ही मिले। मिताली ने कहा कि ईमेल के माध्यम से उन्हें जो जवाब मिले, वे सभी एक जैसे थे। परिवार को आश्वासन मिला है कि V Ships दीक्षित के पार्थिव शरीर को जल्दी लौटाने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में देरी होने से परिवार सहित कई सवाल उठ रहे हैं।

आखिरी विदाई की तैयारी: परिवार की उम्मीदें

दीक्षित के परिवार की मुख्य मांग है कि शव जल्दी लौटाया जाए ताकि वे उसे उचित विदाई दे सकें। साथ ही सभी संज्ञानात्मक दस्तावेज और इस मामले की पूरी जानकारी भी मांगी गई है। परिवार की थकावट और चिंता इस बहाने ही उजागर होती है कि अधिकारी उन्हें सही जानकारी देने में नाकाम रहे हैं।

अंत में, क्या मिलेगा न्याय?

जैसे-जैसे मामले की सुनवाई अगली हफ्ते होने की उम्मीद की जा रही है, परिवार को उम्मीद है कि उन्हें उनके प्रिय का शव जल्द मिलेगा। यह मामला न केवल परिवार के लिए, बल्कि देश के लिए भी महत्वपूर्ण है, जो अपने वीरों को सम्मान देने में गर्व महसूस करता है।

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