मुसलमान बाहरी नहीं, सत्ता के लिए लड़े गए युद्ध, नेशनल हिस्ट्री कॉन्फ्रेंस में इतिहासकारों की राय

The CSR Journal Magazine
इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में हाल ही में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय इतिहास सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारतीय इतिहास के पुनः अध्ययन और उसमें मुसलमानों की भूमिका को उजागर करना था। इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों के बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। इसका आयोजन इंडिया हिस्ट्री फोरम ने किया। सम्मेलन में प्रमुख बुद्धिजीवियों, इतिहासकारों, शिक्षकों और छात्रों ने भाग लिया।

धार्मिक नहीं, सत्ता के लिए लड़ाई

सम्मेलन में वक्ताओं ने इतिहास की पुरानी व्याख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि अतीत में होने वाले युद्धों का असली कारण धार्मिक नहीं बल्कि राजनीतिक और सामर्थ्य का संघर्ष था। डॉ राम पुनियानी ने कहा कि पिछले तीन दशकों में भारत में इतिहास को गलत तरीके से पेश करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इसका उपयोग नफरत फैलाने के लिए किया जा रहा है।

भारतीय मुसलमानों का योगदान

अब्दुल सलाम पुतगे ने कहा कि भारतीय मुसलमान इस धरती के मूल निवासी हैं। उन्हें बाहरी मानना ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है। उन्होंने DNA अध्ययन का उल्लेख किया, जिसमें यह दिखाया गया है कि भारत के विभिन्न वर्गों के लोगों ने समय-समय पर इस्लाम को अपनाया।

आधुनिक भारत का निर्माण

पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारतीय मुसलमानों की भूमिका केवल अतीत में नहीं, बल्कि आधुनिक भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने नफरत और गलतफहमियों को दूर करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

शैक्षिक और सांस्कृतिक योगदान

प्रोफेसर एसएम अजीजुद्दीन हुसैनी ने मुसलमानों के शैक्षिक और सांस्कृतिक योगदान की बात की। उन्होंने कहा कि मुसलमानों ने न केवल धार्मिक विज्ञान, बल्कि विज्ञान, साहित्य और दर्शन में भी महत्वपूर्ण कार्य किया।

इंसानियत का संदेश

डॉ इश्तियाक हुसैन ने बताया कि मध्यकालीन भारत में विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों के बीच आदान-प्रदान हुआ। इस समय कई महत्वपूर्ण ग्रंथों का अनुवाद स्थानीय भाषाओं में किया गया। इस प्रकार इस्लामी शिक्षाओं की भूमिका सुधार आंदोलनों में महत्वपूर्ण रही है।

पाठ्यपुस्तकों का महत्व

प्रोफेसर अनीता रामपाल ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों की सामग्री नई पीढ़ी के विचारों के निर्माण में महत्वपूर्ण होती है। यह जरूरी है कि हम आगामी पीढ़ियों को एक सही और ऐतिहासिक दृष्टिकोण दें।

विज्ञान और शोध पर जोर

सम्मेलन में शोधार्थियों ने भारत में इस्लाम और मुसलमानों के योगदान पर 20 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए। सभी प्रतिभागियों ने सहमति व्यक्त की कि इतिहास को पूर्वाग्रह से मुक्त होकर समझना चाहिए।

एकजुटता के संदेश

इस सम्मेलन ने भारतीय इतिहास में मुसलमानों के योगदान को सही तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया। यह सम्मेलन साबित करता है कि ऐतिहासिक भिन्नताएँ हमें एकजुट करती हैं, न कि विभाजित।

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