गूगल में स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने का विकल्प बढ़ा, कनाडा से जापान तक कर्मचारियों को मिलेगा एग्जिट पैकेज

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पांच देशों में कर्मचारियों के लिए वॉलंटरी एग्जिट योजना, AI पर बढ़ते निवेश के बीच गूगल की नई रणनीति, कर्मचारियों को सेवा अवधि के हिसाब से मिलेगा मुआवजा

Google Voluntary Exit Program: अल्फाबेट की कंपनी गूगल ने दुनिया के कई देशों में कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक नौकरी छोड़ने की योजना का विस्तार किया है। कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में कुछ कर्मचारियों को इस योजना के तहत आर्थिक लाभ लेकर कंपनी से अलग होने का विकल्प दिया गया है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब दुनिया की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां अपने खर्च, कर्मचारियों की संख्या और कामकाज के ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित कर रही हैं। हालांकि, स्वैच्छिक निकास योजना को सभी कर्मचारियों की छंटनी या कंपनी से बड़े पैमाने पर अनिवार्य विदाई के रूप में देखना सही नहीं होगा।

पांच देशों में कर्मचारियों को दिया गया विकल्प

गूगल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, जून 2026 में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में कंपनी के कुछ विभागों के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक निकास पैकेज की शुरुआत की गई थी। इसका मतलब यह है कि इन देशों में काम करने वाले सभी कर्मचारियों को यह प्रस्ताव नहीं दिया गया, बल्कि योजना चुनिंदा विभागों और कर्मचारियों तक सीमित रही। गूगल के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी की कुछ टीमों ने 2025 में ही सेवा समाप्ति लाभ के साथ स्वैच्छिक निकास कार्यक्रम शुरू किया था। इसके बाद जून 2026 में कंपनी ने भविष्य के महत्वपूर्ण कार्यों को ध्यान में रखते हुए कुछ अन्य देशों में भी इसका विस्तार किया।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऐसे कर्मचारियों को कंपनी से सम्मानजनक तरीके से अलग होने का अवसर देना है, जो कंपनी की बदलती कार्यशैली, प्राथमिकताओं और काम की गति के साथ खुद को सहज महसूस नहीं करते। इसके बदले उन्हें निर्धारित शर्तों के अनुसार आर्थिक मुआवजा दिया जाता है। हालांकि, गूगल ने पांचों देशों में इस योजना के तहत पात्र कर्मचारियों की कुल संख्या, आवेदन करने वालों की संख्या और प्रस्ताव स्वीकार करने वाले कर्मचारियों का आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कंपनी ने इन देशों में कितने कर्मचारियों की नौकरी समाप्त कर दी है।

स्विट्जरलैंड में सामने आई पैकेज की जानकारी

इस पूरे मामले में स्विट्जरलैंड की स्थिति सबसे अधिक स्पष्ट होकर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, स्विट्जरलैंड में गूगल के लगभग 5,000 कर्मचारी काम करते हैं। ज्यूरिख में कंपनी का एक बड़ा इंजीनियरिंग केंद्र भी है। रिपोर्ट के अनुसार, वहां कंपनी ने जून के मध्य में कर्मचारियों को स्वैच्छिक निकास पैकेज की जानकारी दी थी। इसके लिए आवेदन करने वाले कर्मचारियों को जुलाई के मध्य तक निर्णय बता दिया गया। जिन कर्मचारियों ने प्रस्ताव स्वीकार किया, उन्हें अगस्त से कंपनी छोड़ना शुरू करना था। स्विट्जरलैंड में प्रस्ताव स्वीकार करने वाले कर्मचारियों के लिए मुआवजे की एक विशेष व्यवस्था सामने आई। इसके तहत कर्मचारी को कंपनी में बिताए गए प्रत्येक वर्ष के बदले एक महीने के वेतन के बराबर राशि दी गई। हालांकि, इस भुगतान की अधिकतम सीमा 12 महीने के वेतन तक निर्धारित थी। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई पात्र कर्मचारी कंपनी में पांच साल से काम कर रहा था, तो उसे इस व्यवस्था के तहत पांच महीने के वेतन के बराबर भुगतान मिल सकता था। वहीं, 15 साल की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारी के लिए भी अधिकतम भुगतान 12 महीने के वेतन तक सीमित था। रिपोर्ट में एक कर्मचारी के हवाले से बताया गया कि लगभग 50 लोगों की एक टीम में कम से कम चार कर्मचारियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया।

अमेरिका और ब्रिटेन में पहले भी शुरू हुई थी योजना

गूगल का स्वैच्छिक निकास कार्यक्रम अचानक शुरू नहीं हुआ है। कंपनी ने 2025 में अमेरिका में अपने कई विभागों के कर्मचारियों को इस तरह के प्रस्ताव दिए थे। जनवरी 2025 में गूगल की प्लेटफॉर्म्स एंड डिवाइसेज टीम ने अमेरिका में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक निकास कार्यक्रम शुरू किया था। इस विभाग में Android, Chrome और Pixel जैसे प्रमुख उत्पादों से जुड़े कर्मचारी शामिल थे। यह कदम कंपनी की विभिन्न टीमों को एकीकृत करने और उनके कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने की प्रक्रिया के बाद उठाया गया था। इसके बाद जून 2025 में कंपनी ने अमेरिका में इस योजना का दायरा बढ़ाया। कोर इंजीनियरिंग, मार्केटिंग, रिसर्च, नॉलेज एंड इंफॉर्मेशन तथा कम्युनिकेशन जैसे विभागों के कुछ कर्मचारियों को भी सेवा समाप्ति लाभ के साथ कंपनी छोड़ने का विकल्प दिया गया। नवंबर 2025 में ब्रिटेन में भी कुछ कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक निकास पैकेज की पेशकश की गई थी। हालांकि, वहां भी पात्र कर्मचारियों और प्रस्ताव स्वीकार करने वालों की पूरी संख्या सार्वजनिक नहीं की गई थी।
इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि गूगल पिछले कुछ समय से अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की भूमिका और संगठनात्मक जरूरतों की समीक्षा कर रहा है। कंपनी सभी विभागों में एक साथ कर्मचारियों की संख्या घटाने के बजाय चुनिंदा इकाइयों में स्वैच्छिक निकास का विकल्प अपना रही है।

AI पर बढ़ता निवेश बना बड़ी वजह

गूगल के इस फैसले के पीछे सबसे महत्वपूर्ण संदर्भ कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और निवेश है। दुनिया की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां अब अपने कारोबार का बड़ा हिस्सा AI आधारित सेवाओं, कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा केंद्रों और उन्नत तकनीकी ढांचे पर खर्च कर रही हैं। गूगल भी इस प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है। कंपनी का AI मॉडल Gemini, क्लाउड सेवाएं और AI आधारित खोज सुविधाएं उसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। AI के क्षेत्र में बढ़ते निवेश के कारण कंपनियों को अपने उपलब्ध संसाधनों का नए सिरे से इस्तेमाल करना पड़ रहा है। ऐसे में कुछ पुराने विभागों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा रहा है, कुछ कामों को दूसरी टीमों के साथ जोड़ा जा रहा है और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में कर्मचारियों की जरूरत बढ़ रही है। गूगल की वित्त प्रमुख अनात अश्केनाजी ने भी कंपनी की वित्तीय प्रस्तुतियों में AI और क्लाउड कंप्यूटिंग को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में रेखांकित किया है। कंपनी की रणनीति से संकेत मिलता है कि वह भविष्य में उन क्षेत्रों को अधिक संसाधन देना चाहती है, जहां से कारोबार की वृद्धि और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को मजबूती मिल सकती है।

AI और क्लाउड विभागों में कर्मचारियों की मांग बरकरार

गूगल की इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कंपनी जहां कुछ विभागों में कर्मचारियों को स्वैच्छिक निकास का विकल्प दे रही है, वहीं दूसरी ओर AI और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में नियुक्तियों को प्राथमिकता दे रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के पिछले स्वैच्छिक निकास कार्यक्रमों में Google Cloud और AI इकाई DeepMind के कर्मचारियों को इस तरह के प्रस्तावों से बाहर रखा गया था। पांच देशों में शुरू किए गए नए कार्यक्रम में भी यही रुझान दिखाई देता है, हालांकि सभी देशों और विभागों की पात्रता सूची सार्वजनिक नहीं हुई है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनी का उद्देश्य केवल कर्मचारियों की संख्या कम करना नहीं, बल्कि अलग-अलग विभागों में उपलब्ध मानव संसाधन को अपनी भविष्य की व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थित करना भी है। AI के कारण सॉफ्टवेयर विकास, डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग, क्लाउड सेवाओं और कंप्यूटिंग ढांचे से जुड़े काम तेजी से महत्वपूर्ण हो रहे हैं। ऐसे में कंपनियां उन क्षेत्रों में अधिक निवेश कर रही हैं, जिन्हें भविष्य में कारोबार की वृद्धि का आधार माना जा रहा है।

2023 की बड़ी छंटनी से अलग है मौजूदा योजना

गूगल के मौजूदा स्वैच्छिक निकास कार्यक्रम को समझने के लिए वर्ष 2023 की छंटनी का उल्लेख भी जरूरी है। जनवरी 2023 में गूगल ने दुनियाभर में लगभग 12,000 कर्मचारियों की नौकरियां समाप्त करने की घोषणा की थी। यह उस समय कंपनी के कुल कर्मचारियों का लगभग 6 प्रतिशत था। उस दौरान कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने आर्थिक परिस्थितियों और पिछले वर्षों में तेजी से हुई नियुक्तियों को कर्मचारियों की संख्या घटाने की प्रमुख वजहों में शामिल किया था। लेकिन मौजूदा कार्यक्रम की प्रकृति इससे अलग है। इसमें चुनिंदा विभागों के कर्मचारियों को अपनी इच्छा से कंपनी छोड़ने और उसके बदले आर्थिक मुआवजा प्राप्त करने का विकल्प दिया जा रहा है। इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी संबंधित कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

कर्मचारियों के लिए क्या मायने

स्वैच्छिक निकास योजना कर्मचारियों को कंपनी छोड़ने का एक आर्थिक रूप से सहायक विकल्प देती है। लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए सेवा अवधि के आधार पर मिलने वाला मुआवजा नई नौकरी तलाशने, अपना कारोबार शुरू करने या दूसरे पेशे में जाने के दौरान मददगार हो सकता है। दूसरी ओर, ऐसे कार्यक्रमों से कर्मचारियों के बीच भविष्य को लेकर अनिश्चितता भी पैदा हो सकती है। विशेष रूप से उन विभागों में काम करने वाले लोगों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, जहां कंपनी की प्राथमिकताएं तेजी से बदल रही हैं। कर्मचारियों के सामने यह फैसला लेने की चुनौती होती है कि वे कंपनी में बने रहकर बदलती जिम्मेदारियों के साथ काम करें या आर्थिक लाभ लेकर नया अवसर तलाशें। कंपनी के लिए भी यह जरूरी होता है कि स्वैच्छिक निकास के कारण अनुभवी और महत्वपूर्ण कर्मचारियों की कमी न हो।

क्या भारत में भी लागू होगी यह योजना?

फिलहाल सामने आई जानकारी के अनुसार, जून 2026 में जिन पांच देशों में कार्यक्रम का विस्तार किया गया, उनमें भारत का नाम शामिल नहीं है। गूगल की ओर से भारत में कर्मचारियों के लिए इसी तरह की नई स्वैच्छिक निकास योजना घोषित किए जाने की कोई पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है। इसलिए भारत में भी बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का प्रस्ताव दिए जाने की अटकलों को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

तकनीकी कंपनियों में बदल रहा रोजगार का स्वरूप

गूगल का यह कदम पूरी प्रौद्योगिकी दुनिया में हो रहे बड़े बदलावों के बीच आया है। Microsoft समेत कई बड़ी कंपनियां भी कर्मचारियों की संख्या, खर्च और संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से व्यवस्थित करने के लिए अलग-अलग उपाय अपना रही हैं। दरअसल, AI का बढ़ता इस्तेमाल कंपनियों के काम करने के तरीके को बदल रहा है। कुछ पारंपरिक कार्यों की जरूरत कम हो रही है, जबकि नई तकनीकों को विकसित करने और संचालित करने के लिए विशेष कौशल वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में आने वाले समय में तकनीकी कंपनियों में केवल कर्मचारियों की कुल संख्या ही नहीं, बल्कि उनके कौशल, काम की प्रकृति और विभागों के बीच संसाधनों का वितरण भी महत्वपूर्ण होगा। कुल मिलाकर, गूगल का स्वैच्छिक निकास कार्यक्रम कंपनी की बदलती कारोबारी रणनीति का हिस्सा है। पांच देशों में इसका विस्तार बताता है कि कंपनी अपने वैश्विक कार्यबल को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालना चाहती है। हालांकि, कितने कर्मचारी इस प्रस्ताव को स्वीकार करेंगे और इसका कंपनी के विभिन्न विभागों पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

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