आसमान में जीवन और मृत्यु का गुप्त संकेत: जानिए क्या है विमानों के आपातकालीन ‘स्क्वॉक कोड’ 7500, 7600 और 7700 का पूरा सच
हवाई यात्रा के दौरान जब कोई विमान हवा में हजारों फीट की ऊंचाई पर होता है, तब पायलट और जमीन पर मौजूद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के बीच लगातार संचार बेहद महत्वपूर्ण होता है। लेकिन क्या हो अगर कॉकपिट में अचानक कोई बड़ी मुसीबत आ जाए, कोई अपराधी विमान पर नियंत्रण करने की कोशिश करे या रेडियो सिस्टम पूरी तरह ठप हो जाए? ऐसी किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) ने कुछ गुप्त कोड निर्धारित किए हैं, जिन्हें स्क्वॉक कोड (Squawk Codes) कहा जाता है। हाल ही में दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुए एक भयानक कॉकपिट हमले के दौरान जब पायलट ने 7700 और 7500 कोड का उपयोग किया, तो पूरी दुनिया की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर आ गईं। विमानन क्षेत्र में 7500 का मतलब विमान अपहरण (Hijack), 7600 का मतलब संचार विफलता (Radio Failure), और 7700 का मतलब सामान्य आपातकाल (General Emergency) होता है। ये चार अंकों के कोड विमान में लगे ट्रांसपोंडर उपकरण के जरिए एटीसी के रडार स्क्रीन पर सीधे भेजे जाते हैं, जिससे बिना एक भी शब्द बोले जमीन पर मौजूद कंट्रोलर्स को स्थिति की गंभीरता का पता चल जाता है।
फ्लाईदुबई FZ1073 हादसा: हवा में जब पायलट पर हुआ जानलेवा हमला
30 सितंबर 2026 की सुबह फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 ने लगभग 170 यात्रियों के साथ दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट से इजरायल के तेल अवीव के लिए उड़ान भरी थी। विमान जब सऊदी अरब और जॉर्डन की सीमा के करीब 34,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था, तभी कॉकपिट के भीतर एक अप्रत्याशित और हिंसक घटना घटी। रिपोर्टों के अनुसार, सह-पायलट ने अचानक कैप्टन स्मित मछार पर चाकू से जानलेवा हमला कर दिया और विमान का नियंत्रण अपने हाथ में लेकर उसे क्रैश करने की कोशिश करने लगा। इस खूनी संघर्ष के दौरान विमान महज एक मिनट में 4,000 मीटर (लगभग 13,000 से 15,000 फीट) नीचे आ गिरा। ऐसी गंभीर स्थिति में जब कैप्टन गंभीर रूप से घायल थे और रेडियो पर विस्तार से बात करना असंभव था, उन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए विमान के ट्रांसपोंडर पर आपातकालीन कोड दर्ज किए। विमान ने पहले 05:28 UTC पर सामान्य आपातकाल का संकेत देने वाला कोड 7700 भेजा और उसके कुछ ही मिनटों बाद इसे बदलकर 7500 कर दिया, जो कि विमान में किसी भी प्रकार के अवैध हस्तक्षेप या अपहरण का वैश्विक कोड है।
जैसे ही ये कोड ATC के रडार स्क्रीन पर चमके, इजरायली वायुसेना ने तुरंत अपने लड़ाकू विमानों को हवा में उतार दिया और सऊदी अरब की सरकार भी सतर्क हो गई। कॉकपिट में यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों ने मिलकर हमलावर को काबू में किया और घायल कैप्टन की मदद से विमान को सुरक्षित रूप से सऊदी अरब के तबुक हवाई अड्डे पर डायवर्ट कर आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आसमान में ये तीन जादुई अंक किसी भी बड़े हादसे को टालने में कितने निर्णायक साबित हो सकते हैं।
क्या होते हैं स्क्वॉक कोड और यह प्रणाली कैसे काम करती है?
सरल शब्दों में कहें तो स्क्वॉक कोड चार अंकों के ऐसे ट्रांसपोंडर कोड होते हैं जिनका उपयोग पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ संवाद करने के लिए करते हैं। प्रत्येक कोड में 0 से 7 तक के अंकों का उपयोग किया जाता है, जिससे कुल 4,096 संभावित संयोजन बनते हैं। जब कोई विमान सामान्य उड़ान पर होता है, तो एटीसी उसे एक विशिष्ट कोड (जैसे 1200 या कोई अन्य रैंडम नंबर) आवंटित करता है ताकि रडार पर उस विमान की अलग से पहचान की जा सके। लेकिन आपातकालीन स्थितियों के लिए तीन विशेष कोड पूरी दुनिया में मानकीकृत (Standardized) किए गए हैं। जब पायलट इन तीन कोडों में से किसी एक को ट्रांसपोंडर में डायल करता है, तो एटीसी के रडार स्क्रीन पर उस विमान का सिंबल एक अलग चमकीले रंग में ब्लिंक करने लगता है और वहां एक अलार्म बज उठता है। इससे विमान क्षेत्र का सुरक्षा तंत्र बिना किसी देरी के सक्रिय हो जाता है।
कोड 7500: अवैध हस्तक्षेप और अपहरण (Hijacking / Unlawful Interference)
विमानन जगत में कोड 7500 को सबसे खतरनाक और संवेदनशील माना जाता है। यह कोड तब एक्टिवेट किया जाता है जब विमान के नियंत्रण या सुरक्षा में कोई बाहरी या आंतरिक अवैध हस्तक्षेप हो रहा हो, जैसे कि विमान का अपहरण।
• कब उपयोग होता है: यदि कोई आतंकी या अपराधी कॉकपिट में घुस जाए, पायलट को बंधक बना ले, या फ्लाईदुबई की घटना की तरह कोई व्यक्ति विमान को जबरन क्रैश करने की कोशिश करे।
• इसके बाद क्या होता है: कोड 7500 के एक्टिवेट होते ही एटीसी पायलट से रेडियो पर बार-बार सवाल नहीं पूछता, क्योंकि इससे अपहरणकर्ता सतर्क हो सकता है। एटीसी चुपचाप सुरक्षा एजेंसियों, सेना और संबंधित देशों के रक्षा मंत्रालयों को सूचित करता है। वायुसेना के लड़ाकू विमान तुरंत उस यात्री विमान को घेर लेते हैं और उसे किसी सुरक्षित जगह पर उतारने की रणनीति बनाई जाती है।
कोड 7600: संचार विफलता (Radio Communication Failure / NORDO)
यह कोड तब उपयोग किया जाता है जब विमान के दो-तरफा रेडियो संचार उपकरण पूरी तरह से खराब हो जाते हैं। इसका मतलब यह होता है कि विमान यांत्रिक रूप से पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन पायलट न तो एटीसी की आवाज सुन पा रहा है और न ही अपनी आवाज वहां तक पहुंचा पा रहा है।
• कब उपयोग होता है: बिजली के फेल होने, हेडसेट खराब होने या रेडियो फ्रीक्वेंसी में तकनीकी खराबी आने पर।
• इसके बाद क्या होता है: इस कोड को देखने के बाद एटीसी समझ जाता है कि पायलट को निर्देश बोलकर नहीं दिए जा सकते। ऐसी स्थिति में विमान पहले से तय रूट और नियमों (Avenue FMEA या स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल) के तहत आगे बढ़ता है। जब विमान एयरपोर्ट के नजदीक पहुंचता है, तो एटीसी टावर से विशेष ‘लाइट गन’ के जरिए लाल, हरी और सफेद रंग की रोशनी फेंककर पायलट को लैंडिंग के संकेत दिए जाते हैं।
कोड 7700: सामान्य आपातकाल (General Emergency / Distress)
यह एक व्यापक आपातकालीन कोड है जो विमान या यात्रियों की सुरक्षा को तत्काल खतरा होने पर इस्तेमाल किया जाता है। यह किसी एक विशिष्ट समस्या को नहीं दर्शाता, बल्कि यह बताता है कि विमान को तुरंत प्राथमिकता के आधार पर मदद की जरूरत है।
• कब उपयोग होता है: विमान के इंजन में खराबी आने, केबिन का दबाव अचानक कम होने, विमान में आग लगने, गंभीर तकनीकी खराबी होने या किसी यात्री को दिल का दौरा पड़ने जैसी गंभीर मेडिकल इमरजेंसी होने पर पायलट 7700 डायल करते हैं।
• इसके बाद क्या होता है: कोड 7700 मिलते ही एटीसी उस विमान को हवा में सबसे पहली प्राथमिकता (Priority Handling) देता है। आसपास के सभी अन्य विमानों को रोक दिया जाता है या उनका रास्ता बदल दिया जाता है। जमीन पर रनवे को तुरंत खाली करा लिया जाता है और एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड तथा आपदा प्रबंधन की टीमों को रनवे पर तैनात कर दिया जाता है ताकि लैंडिंग के तुरंत बाद राहत कार्य शुरू किया जा सके।
याद रखने का आसान फॉर्मूला और विमानन सुरक्षा
दुनिया भर के पायलटों को उनके प्रशिक्षण के दौरान इन कोडों को कंठस्थ कराया जाता है। इसे याद रखने के लिए विमानन उद्योग में एक प्रसिद्ध अंग्रेजी मुहावरा या तुकबंदी भी प्रचलित है:
• “75 – Stay Alive (हाईजैक से जिंदा बचना)”
• “76 – Radio Sick (रेडियो का खराब होना)”
• “77 – Going to Heaven (गंभीर आपातकाल या संकट)”
फ्लाईदुबई विमान में कैप्टन द्वारा समय रहते सूझबूझ दिखाने और ट्रांसपोंडर के सटीक उपयोग ने 170 से अधिक मासूम जिंदगियों को मौत के मुंह में जाने से बचा लिया। यह घटना दर्शाती है कि विमानन तकनीक में भले ही कितने भी आधुनिक बदलाव आ जाएं, लेकिन दशकों पुरानी यह चार अंकों की ‘स्क्वॉक कोड’ प्रणाली आज भी आसमान में सुरक्षा की सबसे मजबूत दीवार बनी हुई है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
Captain Smit Machchhar, an Indian pilot, reportedly sustained severe injuries while thwarting an alleged attempt by his co-pilot to crash a Flydubai flight. The...