चुनाव आयोग में खत्म हुआ महीनों पुराना विवाद? EC ने जारी किया नया वर्क एलोकेशन ऑर्डर

The CSR Journal Magazine
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने हाल ही में आंतरिक जिम्मेदारियों और विभागों के बंटवारे को लेकर नया वर्क एलोकेशन ऑर्डर जारी किया है। यह आदेश 4 नवंबर को जारी किया गया और यह चुनाव आयुक्त एस. एस. संधू और विवेक जोशी द्वारा जुलाई में उठाए गए ऐतराज और विवाद के बाद का पहला आधिकारिक कदम है। इस नए आदेश के माध्यम से प्रशासनिक, आईटी और जन शिकायत निवारण (PGRS) से जुड़ी मुख्य जिम्मेदारियों का फिर से औपचारिक वितरण किया गया है। यह कदम आयोग के भीतर के विवाद को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जुलाई 2026 का विवाद क्या था?

चुनाव आयोग में आंतरिक विवाद की शुरुआत 28 जुलाई 2026 को हुई थी। उस दिन एक विवादित आदेश जारी किया गया था, जिसके तहत आईटी, जन शिकायत (PGRS) और वोटर लिस्ट की जिम्मेदारी डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (DEC) संजय कुमार के पास थी। इससे पहले 23 सितंबर 2025 के आदेश के अनुसार, महानिदेशक (IT) सीमा खन्ना अपनी फाइलें संजय कुमार के माध्यम से आयोग को भेजती थीं। लेकिन 28 जुलाई को तत्कालीन कार्यवाहक वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग ने नया आदेश जारी कर आईटी और PGRS का प्रभार संजय कुमार से छीनकर सीधे सीमा खन्ना को सौंप दिया।

आयोग में उठे सवाल

इस अचानक बदलाव पर चुनाव आयुक्त एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने 29 जुलाई को सीधे कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर काम के बंटवारे, रोस्टर और आदेश जारी करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि तय परंपरा के अनुसार वर्क एलोकेशन का कोई भी फैसला पूरे चुनाव आयोग की सहमति और मंजूरी के बाद ही लागू होता है। इस मामले में स्थापित प्रशासनिक प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया था, जिससे आयोग के भीतर असमंजस की स्थिति उत्पन्न हुई।

विवाद के बाद क्या कदम उठाए गए?

चुनाव आयुक्तों के विरोध के बाद 28 जुलाई का आदेश रोक दिया गया। सीमा खन्ना को फिर से DEC संजय कुमार के जरिए फाइलें आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए, लेकिन इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं हुआ था। जुलाई विवाद के करीब एक महीने बाद, DoPT के आदेश से DEC संजय कुमार को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया गया। इस स्थिति ने आयोग के भीतर और भी जटिलताएँ पैदा कीं।

4 नवंबर का नया आदेश क्यों जरूरी था?

हाल के हफ्तों में चुनाव आयोग के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में बदलाव हुए हैं। एक नए डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर ने पदभार संभाला है, जिससे विभागों के स्पष्ट बंटवारे के लिए एक नया लिखित आदेश आवश्यक हो गया था। 4 नवंबर के इस आदेश ने जुलाई विवाद के बाद बने असमंजस को खत्म कर दिया है। अब सभी वरिष्ठ अधिकारियों के काम और रिपोर्टिंग लाइन को पूरी तरह से तय कर दिया गया है। चुनाव आयोग का यह नया वर्क एलोकेशन ऑर्डर न केवल आंतरिक विवाद को सुलझाने में मदद करेगा, बल्कि इससे आयोग की कार्यप्रणाली में भी सुधार होगा। यह आदेश आयोग के कार्यों को और अधिक सुचारू बनाने में सहायक सिद्ध होगा। अब देखना यह है कि क्या यह नया आदेश आयोग के भीतर स्थायी शांति लाएगा या फिर भविष्य में और भी विवाद उत्पन्न होंगे।

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