दो ईरानी बहनें विशाखापत्तनम में फंसी, मदद की कर रही हैं गुहार

The CSR Journal Magazine
विशाखापत्तनम में उच्च शिक्षा के दौरान दो ईरानी बहनें गंभीर संकट में हैं। जैनब मोहम्मदी और सोलमाज मोहम्मदी, जो फार्मेसी की पढ़ाई कर रही हैं, अब आर्थिक तंगी का सामना कर रही हैं। उनके परिवार से पिछले दस दिनों से कोई संपर्क नहीं हो पाया है, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है। परिवार द्वारा भेजी जाने वाली सहायता बंद हो गई है, और अब वे अधिकारियों से मदद की गुहार लगा रही हैं।

पैसों की तंगी और परिवार की चिंता

पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति ने ईरानियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जैनब और सोलमाज को समझ में नहीं आ रहा कि वे विशाखापत्तनम में कैसे गुज़ारा करें। उनके पास पैसे खत्म हो चुके हैं और उन्हें यह भी नहीं पता कि ईरान में उनके परिवार का क्या हाल है। चिंता है कि न केवल वे खुद, बल्कि उनके तीन बच्चे भी मुसीबत में हैं।

स्कूल में बच्चों की फीस का भी संकट

जैनब और सोलमाज ने अपने बच्चों को स्थानीय स्कूल में दाखिला दिलाया था, लेकिन अब उन्हें स्कूल की फीस तक भरने में कठिनाई हो रही है। स्कूल प्रशासन ने इनकी दयनीय स्थिति को देखा है और उनकी मदद के लिए कुछ राहत देने का आश्वासन दिया है। लेकिन क्या यह पर्याप्त होगा? यह सवाल सबके मन में है।

स्थानीय प्रशासन से मिली सहायता

ईरानी बहनों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी मुसीबत के बारे में बताया। वहाँ मौजूद अधिकारियों ने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया और तत्परता से मदद करने का आश्वासन दिया। डीआरओ विश्वेश्वर नायडू ने कहा कि वे सभी संभव सहायता प्रदान करेंगे। उनकी कोशिश है कि ईरानी बहनों को सही समय पर फ़ंड मिल सके।

आखिर क्या होगा इनका भविष्य?

जैनब ने कहा, “हमने सोचा था कि यहां पढ़ाई पूरी करने के बाद घर लौटेंगे। लेकिन अब, हमें नहीं पता कि हमारे परिवार का क्या हाल है। हम हर दिन नई समस्याओं का सामना कर रहे हैं।” यह सुनकर स्थानीय प्रशासन भी चौंक गया। इन्हें न केवल आर्थिक मदद की जरूरत है, बल्कि भावनात्मक समर्थन की भी आवश्यकता है।

आवश्यकता मानवता की

शिक्षण संस्थान की प्रधानाध्यापिका अनुपमा ने भी इस स्थिति पर संवेदनाएँ व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण इनकी स्थिति बहुत कठिन हो गई है। इनकी बीमारी और आर्थिक कठिनाइयों के बारे में सभी को ध्यान देना चाहिए। क्या भारत सरकार इनके साथ खड़ी होगी? यह सवाल सभी के मन में है।

भारत का सहयोग, क्या है आगे का रास्ता?

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इनकी समस्याओं को कलेक्टर के माध्यम से उच्च स्तर पर लाया जाएगा। क्या भारत सरकार इन बहनों की मदद करेगी? इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। ईरान की मुश्किलें इन बहनों के लिए न केवल एक चुनौती बल्कि एक परीक्षण बन गई हैं। इनके जीवन में बदलाव लाने की आवश्यकता है, जो अब समय की मांग है।

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