खाने में ‘जहर’ घोलने वालों पर चल रहा हंटर, ये रहा FSSAI और राज्यों की कार्रवाई का लेखा-जोखा

The CSR Journal Magazine
FSSAI और राज्यों ने खाद्य सुरक्षा को लेकर तेजी से कदम उठाए हैं। लाखों जगहों पर जांच की गई है और हजारों खाद्य सैंपल का विश्लेषण किया गया है। इस दौरान कई सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिससे सुरक्षा मानकों पर ध्यान देने की जरूरत महसूस हुई।

खुदाई की गई गंदगी

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने मिलकर राज्यों के साथ एक बड़ा अभियान चलाया है। इस साल लगभग 3.97 लाख स्थानों पर जांच का काम किया गया। इनमें से 1.65 लाख खाद्य सैंपल लिए गए थे, जिनमें से करीब 17% सैंपल नियमों का पालन नहीं कर पाए। इस मानहाने की वजह से लोगों के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता था।

कानूनी कार्रवाई की गई तेज

कानूनी कार्रवाई में भी तेजी लाई गई है। 23,580 मामलों का निपटारा किया गया है, जिनमें 1,756 मामलों में सजा भी दी गई। नियम तोड़ने वालों पर 154.87 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा, 945 बार बाजार से खराब खाद्य उत्पाद वापस मंगाए गए हैं।

सड़क खाद्य विक्रेताओं का समावेश

स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को अब इस सिस्टम में लाया गया है। इस वर्ष 10 लाख से अधिक स्ट्रीट फूड वेंडर्स को नियमों के दायरे में शामिल किया गया है, जिससे साफ-सफाई और खाद्य गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है। इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक खाना मिल सकेगा।

लाइसेंस के नए नियम लागू

खाद्य व्यवसाय के अनुसार लाइसेंस की नई श्रेणियाँ निर्धारित की गई हैं। 1.5 करोड़ रुपये तक के कारोबार के लिए बेसिक रजिस्ट्रेशन, 1.5 से 50 करोड़ तक के लिए स्टेट लाइसेंस और 50 करोड़ रुपये से अधिक के लिए सेंट्रल लाइसेंस अनिवार्य किया गया है। यह कदम खाद्य सुरक्षा को और मजबूत करेगा।

नई लैब की मंजूरी

खाद्य सुरक्षा जांच को और मजबूत करने के लिए सरकार ने 18 नई लैब की मंजूरी दी है। इनमें सिक्किम और आंध्र प्रदेश की आधुनिक लैब शामिल हैं। ये नई लैब जांच प्रक्रिया को और प्रभावी बनाएंगी।

राज्यों की जिम्मेदारी

जिला स्तर पर अधिकारी जांच, सैंपलिंग और शिकायतों के समाधान पर काम कर रहे हैं। कोर्ट और ट्रिब्यूनल के माध्यम से मामलों का निपटारा किया जा रहा है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि लोगों को सुरक्षित खाना मिले।

FSSAI डेटा लीक पर कार्रवाई

हाल ही में FSSAI से जुड़ी जांच जानकारी के लीक होने की रिपोर्ट ने हलचल पैदा कर दी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई मीडिया को दबाने के लिए नहीं बल्कि लीक करने वालों को पकड़ने के लिए की जा रही है। इस मामले में दिल्ली पुलिस में अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।

जांच की विश्वसनीयता बनाए रखना

अधिकारियों का कहना है कि लीक से जांच प्रक्रिया प्रभावित होती है, और दोषियों को जानकारी हासिल करने का मौका मिल जाता है। इसलिए इस पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। पुलिस जांच का मुख्य उद्देश्य जांच की विश्वसनीयता को बनाए रखना और संभावित दोषियों को पकड़ना है।</h

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