नहीं दिखता खिलाड़ी कौन है ओ कौन है मोहरा- शशि थरूर ने फॉर्म-6 में बदलाव पर लिखी कविता, उठाए गंभीर सवाल

The CSR Journal Magazine

‘जो तुमने आंख मूंदी है, अंधेरा हो गया गहरा’, शशि थरूर ने फॉर्म-6 पर लिखी कविता, पूछा-‘किसने बदला, कौन बना मोहरा?

चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े नए वोटर्स के लिए ‘फॉर्म 6′ में किए गए ‘गैरकानूनी’ बदलावों के चलते विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर हुई बहस के बाद भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने ‘फॉर्म 6’ में हुए बदलावों को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने संकेत दिया कि चुनाव आयोग से रिपोर्ट मिलने के बाद यह जांच की जाएगी कि ये बदलाव किसने किए थे।

कविता के माध्यम से पूछी गई प्रश्न

CJI सूर्यकांत के बयान पर, कांग्रेस सांसद डॉ. शशि थरूर ने एक कविता के माध्यम से सवाल किया। उन्होंने लिखा, ‘जो तुमने आंख मूंदी है, अंधेरा हो गया गहरा। तुम्हारे जागने से ही, तो लगना था यहां पहरा। बताओ, आजकल मालूम है सबको सियासत फिर, नहीं दिखता खिलाड़ी कौन है औ’ कौन है मोहरा?’ थरूर ने यह कविता CJI की टिप्पणी को आधार बनाकर लिखी। इसके साथ ही उन्होंने सीधा सवाल उठाया कि किसने बदलाव की मंजूरी दी है।

सरकारी प्रक्रिया पर उठाए गए सवाल

थरूर ने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय ने संशोधित फॉर्म 6 को मंजूरी नहीं दी, तो इसे किसने बदला और किसके आदेश पर यह बदलाव हुआ? CJI ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि अभिलेख सामने आने पर यह जांच होगी कि बदलाव किसने किया। चुनाव आयोग ने अपने कुछ दावों को सिद्ध करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया, लेकिन अब CJI की टिप्पणी ने उन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मतदाता अधिकारों की सुरक्षा पर चिंता

थरूर ने कहा कि देश के नागरिक जानना चाहते हैं कि फॉर्म-6 में बदलाव के पीछे की कहानी क्या है। उन्होंने कहा कि ‘फॉर्म 6’ कोई आम कागज नहीं है, यह हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा हुआ है। अब सवाल यह है कि इस बदलाव की अनुमति किसने दी और इसके पीछे का आधार क्या है? लोगों को स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब चाहिए।

फॉर्म 6 का महत्व

भारत के चुनाव आयोग (ECI) द्वारा जारी ‘फॉर्म 6’ नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए आवदेन पत्र है। यह उन व्यक्तियों के लिए भी आवश्यक है जिनके नाम पहले हटा दिए गए थे। यह फ़ॉर्म व्यक्तिगत जानकारी, उम्र, निवास प्रमाण और नागरिकता से जुड़ी जानकारियों की मांग करता है। हाल ही में, ऑनलाइन फॉर्म में एक नया सेक्शन जोड़ा गया है, जिसमें आवेदक के माता-पिता की जानकारी मांगी गई है। हालांकि, असली कानूनी फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

चुनाव आयोग की स्थिति

चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को यह घोषणा की थी कि गैर-SIR अवधि के लिए मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के अनुसार ही फॉर्म का उपयोग होगा। इलेक्ट्रॉनिक पोर्टल के माध्यम से फॉर्म में किए गए बदलाव हटा दिए गए हैं, जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो गई थी। विवाद अब इस बात पर है कि क्यों और कैसे फॉर्म में बदलाव किया गया, और यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कैसे प्रभावित कर सकता है।

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