सरकार का दावा- NTA का पेपर लीक नहीं, लेकिन धांधली के 474 मामले कोर्ट में

The CSR Journal Magazine
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण दावा किया है कि 2017 में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के गठन के बाद से अब तक कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। हालांकि, मंत्रालय ने यह भी माना है कि परीक्षाओं में धांधली और व्यवधान अवश्य हुए हैं। यह जानकारी संसद की स्थायी समिति के सामने उच्च शिक्षा विभाग ने दी। समिति के कुछ सदस्यों ने इस दावे पर असहमति जताई है, जिससे मामला और भी पेचीदा हो गया है।

474 मामले अदालत में चल रहे हैं

राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि NTA की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी से जुड़े कुल 474 मामले अदालतों में चल रहे हैं। इनमें से कुछ मामलों में NTA खुद याचिकाकर्ता है। 2024 में NEET परीक्षा से जुड़े 356 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि NTA से जुड़े 69 मामले सुप्रीम कोर्ट में हैं। यह आंकड़े पेपर लीक के मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाते हैं।

नीट पेपर लीक मामले में चार्जशीट दाखिल

इस बीच, सीबीआई ने नीट पेपर लीक केस में एक आरोपी के खिलाफ दिल्ली की अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। विशेष जज अजय गुप्ता ने 14वें आरोपी शेषराव बजरंग सूर्यवंशी उर्फ राज सूर्यवंशी के वकील को सप्लीमेंट्री चार्जशीट की कॉपी देने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। एजेंसी का आरोप है कि सूर्यवंशी ने सह-आरोपी शुभम खैरनार के साथ मिलकर नीट का पेपर कई अभ्यर्थियों तक पहुंचाया और पैसे वसूले।

पेपर लीक पर कार्रवाई की कमी

संसदीय समिति ने इस बात पर हैरानी जताई है कि पेपर लीक, एफआईआर और सीबीआई व अन्य एजेंसियों में चल रही जांच का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया है। समिति ने सिफारिश की है कि उच्च शिक्षा विभाग, सरकार की अन्य एजेंसियों और विभागों के साथ मिलकर NTA की एक रिपोर्ट तैयार करे। इस रिपोर्ट में पेपर लीक के मामलों से जुड़ी सभी जानकारी और जांच का पूरा स्टेटस होना चाहिए।

2024 में पेपर लीक पर बनाया गया कानून

उच्च शिक्षा विभाग का दावा 2024 के नीट यूजी पेपर लीक के एकदम उलट है। उस समय जनाक्रोश के बाद संसद ने पेपर लीक पर एक कानून बनाया था। रिपोर्ट में 2024 की अनियमितता को ‘पेपर लीक केस’ के तौर पर दर्ज किया गया है। समिति ने लोक परीक्षा अधिनियम 2024 पारित होने के बाद से विभिन्न परीक्षाओं में दर्ज की गई एफआईआर का ब्योरा भी दिया है।

भविष्य की परीक्षाओं पर नजर

सीएसआईआर यूजीसी नेट को लेकर 2025 में एक, जेईई मेन को लेकर 2026 में तीन और नीट यूजी को लेकर 2024 में 14 और 2025 में एक एफआईआर हुई है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

सार्वजनिक जागरूकता की जरूरत

समिति ने यह भी कहा कि पेपर लीक के मामलों में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। छात्रों और अभिभावकों को सही जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी से बच सकें। इसके लिए सरकार को एक प्रभावी सूचना प्रणाली विकसित करनी होगी।

कुल मिलाकर स्थिति चिंताजनक

इस स्थिति से यह स्पष्ट होता है कि NTA के दावों के बावजूद, परीक्षा प्रणाली में कई चुनौतियाँ हैं। पेपर लीक और धांधली के मामलों की बढ़ती संख्या ने छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। ऐसे में सरकार और संबंधित एजेंसियों को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालने की जरूरत है।

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