शेल कंपनियों और हवाला के जरिए भारत में भेजी गई करोड़ों की विदेशी राशि, ED की जांच शुरू

The CSR Journal Magazine

भारत के घरेलू मामलों में दखल की साजिश: 10 लाख डॉलर के संदिग्ध लेन-देन की ED जांच शुरू

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारत के घरेलू व आंतरिक मामलों में कथित विदेशी हस्तक्षेप और करीब 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 13.5 से 14.1 करोड़ रुपये) के संदिग्ध लेनदेन के मामले में एक बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। जांच एजेंसी को पुख्ता इनपुट मिले हैं कि भारत विरोधी गतिविधियों और देश के आंतरिक मामलों को प्रभावित करने के लिए टैक्स हैवन माने जाने वाले देशों, शेल कंपनियों और हवाला नेटवर्क का सहारा लेकर करोड़ों रुपये भारत भेजे गए। इस पूरे नेटवर्क में जर्मनी, दुबई, लिथुआनिया, कनाडा, सेंट किट्स एंड नेविस (कैरेबियन देश) और ब्रिटेन (UK) जैसे आधा दर्जन से अधिक अंतरराष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र शामिल हैं।

मनी ट्रेल का पूरा ढांचा: छह देशों में फैले नेटवर्क की कड़ियां

ईडी के खुफिया सूत्रों और वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, इस पूरे संदिग्ध वित्तीय लेनदेन को बेहद जटिल तरीके से डिज़ाइन किया गया था, ताकि पैसे के असली स्रोत (Ultimate Origin) को छुपाया जा सके। जांच में कुल 15 लाख अमेरिकी डॉलर (1.5 मिलियन डॉलर) की दो प्रमुख ट्रांजैक्शन सामने आई हैं, जो अलग-अलग रास्तों से घूमकर ब्रिटेन की एक ही कंपनी के खाते में पहुंचीं और वहां से इन्हें भारत में सक्रिय कुछ विशिष्ट संस्थाओं और व्यक्तियों को ट्रांसफर किया गया।

1. पहला रूट: जर्मनी से दुबई और लिथुआनिया के रास्ते ब्रिटेन

जांचकर्ताओं ने पाया कि 10 लाख डॉलर (1 मिलियन डॉलर) के पहले फंड का वास्तविक स्रोत जर्मनी में स्थित ‘डॉ. मथियास कार्ल वोग्ट ट्रस्ट’ (Dr Matthias Karl Vogt Trust) है।
डिजिटल एसेट और हवाला का खेल: जर्मनी के इस ट्रस्ट से पैसा सबसे पहले लिथुआनिया स्थित एक इकाई ‘एक्सबेस डिजिटल’ (XBase Digital UAB) के पास पहुंचा। इसके बाद इस राशि को डिजिटल करेंसी (क्रिप्टो परिसंपत्तियों) में बदला गया।
दुबई कनेक्शन: ईडी के इनपुट बताते हैं कि इन डिजिटल संपत्तियों को दुबई के जरिए ‘हवाला’ (अवैध धन हस्तांतरण) नेटवर्क में डाला गया।
टैक्स हैवन की एंट्री: इसके बाद, कैरेबियन द्वीप समूह के प्रसिद्ध टैक्स हैवन देश सेंट किट्स एंड नेविस में पंजीकृत ‘टीसीसी डिजिटल मार्केट्स लिमिटेड’ (TCC Digital Markets Ltd) की एंट्री हुई। इस कंपनी ने लेयरिंग (Layering) को और उलझाने के लिए इस पैसे को एक कानूनी “अनुदान” (Grant) का रूप दे दिया।
यूके ट्रांसफर: टीसीसी डिजिटल मार्केट्स ने यह राशि फरवरी और मार्च 2026 के बीच दो किस्तों (67,006 पाउंड और 71,746 पाउंड) में ब्रिटेन स्थित ‘एयरवॉलेक्स (यूके) लिमिटेड’ (Airwallex UK Ltd) के खाते में ट्रांसफर कर दी, जिसके तार सीधे भारत से जुड़े हुए हैं।

2. दूसरा रूट: कनाडा से सीधा ट्रांसफर

इसी अवधि के दौरान, मनी ट्रेल का दूसरा सिरा कनाडा से जुड़ा पाया गया। कनाडा में पंजीकृत एक अन्य वित्तीय इकाई ‘जेडबेस डिजिटल इंक’ (ZBase Digital Inc) ने फरवरी 2026 में सीधे 5,00,000 डॉलर (5 लाख अमेरिकी डॉलर) की राशि इसी ब्रिटेन की कंपनी ‘एयरवॉलेक्स (यूके) लिमिटेड’ के खाते में भेजी। इन दोनों संदिग्ध लेनदेनों को मिलाकर कुल राशि 1.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाती है, जो अंततः कई विदेशी परतों से गुजरने के बाद भारतीय जमीन पर मौजूद अंत-उपयोगकर्ताओं (End Users) तक पहुंची।

संदेह के घेरे में ‘एयरवॉलेक्स यूके’ और भारतीय प्राप्तकर्ता

भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियां वर्तमान में ब्रिटेन की वित्तीय सेवा प्रदाता कंपनी ‘एयरवॉलेक्स’ के साथ संपर्क में हैं ताकि इन खातों के विस्तृत लेनदेन विवरण (KYC और स्टेटमेंट) की पुष्टि की जा सके। ईडी का मुख्य ध्यान अब भारत के उन ‘अंतिम प्राप्तकर्ताओं’ (End-Recipients) पर है, जिनके बैंक खातों में ब्रिटेन से यह विदेशी फंडिंग आई है। प्रारंभिक जांच के अनुसार, इन फंडों को प्राप्त करने वाले भारत में कुछ खास एनजीओ (NGOs), सामाजिक कार्यकर्ता और विशिष्ट विचार मंच (Think Tanks) हो सकते हैं। ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस पैसे का इस्तेमाल देश में आंतरिक अशांति फैलाने, नीतियों के खिलाफ माहौल तैयार करने या चुनावी व घरेलू राजनीति में अनैतिक रूप से हस्तक्षेप करने के लिए किया जा रहा था।

मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी दखल की वैश्विक साजिश

इस मामले ने भारत की आंतरिक सुरक्षा और वित्तीय संप्रभुता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “यह केवल कर चोरी या सामान्य मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) का मामला नहीं है। यह भारत के लोकतांत्रिक और घरेलू ताने-बाने को अस्थिर करने के उद्देश्य से की गई एक सुनियोजित वैश्विक साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है। छह देशों की सीमाओं को पार करते हुए पैसे को इस तरह घुमाना स्पष्ट करता है कि इसके पीछे कोई बहुत बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।” कैरेबियन देश सेंट किट्स एंड नेविस जैसे टैक्स हैवन का उपयोग अक्सर दुनिया भर के बड़े आर्थिक अपराधी और राष्ट्र-विरोधी तत्व अपने अपराध की कमाई या अवैध फंडिंग को छुपाने के लिए करते हैं। इस मामले में भी इसी पैटर्न का पालन किया गया है, जहां डिजिटल करेंसी, हवाला और शेल कंपनियों का त्रिकोणीय गठजोड़ देखने को मिला है।

जांच के अगले कदम और कानूनी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के कड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर जांच को आगे बढ़ा रहा है।
एलआर (Letters Rogatory) जारी करने की तैयारी: ईडी विदेशी अदालतों और जांच एजेंसियों से आधिकारिक सहयोग प्राप्त करने के लिए जर्मनी, कनाडा, लिथुआनिया और ब्रिटेन को ‘लेटर रोगेटरी’ (न्यायिक अनुरोध पत्र) भेजने की प्रक्रिया में है ताकि संबंधित विदेशी संस्थाओं के बैंक खातों की पूरी जानकारी हासिल की जा सके।
डिजिटल फॉरेंसिक जांच: लिथुआनिया और दुबई के बीच हुए क्रिप्टो परिसंपत्तियों के ट्रांसफर को ट्रैक करने के लिए ब्लॉकचेन एनालिटिक्स और डिजिटल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
भारतीय प्राप्तकर्ताओं से पूछताछ: दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु सहित भारत के कई शहरों में संदिग्ध प्राप्तकर्ताओं को बहुत जल्द समन जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है, जिसके बाद कुछ संपत्तियों को कुर्क (Freeze) किए जाने की भी संभावना है। यह मामला सामने आने के बाद भारत सरकार के गृह मंत्रालय और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU) ने भी सतर्कता बढ़ा दी है, ताकि देश की सीमाओं के पार से होने वाले ऐसे किसी भी संदिग्ध वित्तीय प्रवाह पर पैनी नजर रखी जा सके।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store – https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos