कमाई का नया जरिया: IIT के छात्रों ने पराली से बनाया 2.5 करोड़ का बिजनेस

The CSR Journal Magazine
हर साल सर्दियों में जब ठंड बढ़ती है, तब पंजाब और हरियाणा के खेतों में जलने वाली पराली से उठने वाला धुआं दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में प्रदूषण का बड़ा कारण बन जाता है। यह समस्या कई सालों से बनी हुई है, लेकिन अब IIT के दो ग्रेजुएट्स ने इस समस्या को एक अवसर में बदल दिया है।

आनंद और अर्पित की अनोखी सोच

आनंद बोध और अर्पित धूपर ने 2020 में ‘धरक्षा इकोसॉल्यूशंस’ की स्थापना की। इनका उद्देश्य पराली का उपयोग करके बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग मटीरियल तैयार करना है। यह मटीरियल पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले थर्मोकोल का एक बेहतरीन विकल्प है। आज यह स्टार्टअप प्रदूषण से निपटने में मदद कर रहा है और हर साल लगभग 2.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर भी हासिल कर रहा है।

समस्या का समाधान

आनंद और अर्पित ने पाया कि किसान धान की कटाई के बाद अगली फसल के लिए खेतों को तैयार करने के लिए पराली जलाने को मजबूर हैं। यह मुख्य रूप से वित्तीय और व्यावहारिक मजबूरियों के कारण होता है। इस समस्या को हल करने के लिए उन्होंने अपनी इंजीनियरिंग क्षमताओं का उपयोग किया। अपनी पर्सनल सेविंग्स से कारोबार की शुरुआत करने के बाद, उन्होंने एंजेल इन्वेस्टर्स से भी निवेश जुटाया।

धरक्षा का नाम और अर्थ

कंपनी का नाम ‘धरक्षा’ दो हिंदी शब्दों ‘धरा’ (धरती) और ‘रक्षा’ से मिलकर बना है। इसका अर्थ है धरती की रक्षा करना। यह नाम इस मिशन को दर्शाता है कि कैसे ये युवा पर्यावरण की सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं।

विशेष तकनीक का उपयोग

धरक्षा इकोसॉल्यूशंस पराली को मजबूत पैकेजिंग सामग्री में बदलने के लिए मशरूम के जड़ों वाले नेटवर्क यानी ‘मायसेलियम’ का उपयोग करती है। सबसे पहले, पंजाब और हरियाणा के किसानों से पराली एकत्र की जाती है। इसके बाद इस पराली को बारीक काटकर स्टीम करके प्रोसेस किया जाता है। इसमें विशेष रूप से विकसित मशरूम मायसेलियम मिलाया जाता है, जो पराली के रेशों को आपस में जोड़ता है।

इको-फ्रेंडली पैकेजिंग

इस प्रक्रिया में लगभग 10 दिन का समय लगता है। तैयार पैकेजिंग मटीरियल सामानों को सुरक्षित रखने के लिए थर्मोकोल का एक बेहतरीन विकल्प है। इसे अलग-अलग आकार और डिजाइन में ढाला जा सकता है। यह मटीरियल सामान्य मिट्टी के संपर्क में आने पर लगभग 60 दिनों में पूरी तरह नष्ट हो जाता है। इसकी शेल्फ लाइफ 3 साल से अधिक है।

कमाई का बड़ा आंकड़ा

कंपनी ने 2023 में एक ही सीजन में 250 एकड़ से अधिक जमीन से लगभग 750 टन पराली एकत्र की। उनके पैकेजिंग उत्पाद विभिन्न आकारों में आते हैं और उनकी कीमत आकार के आधार पर तय होती है। उदाहरण के लिए, 6 इंच के छोटे गमले की कीमत लगभग 30 रुपये है।

बाजार में प्रतिस्पर्धा

कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 2.5 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि कैसे एक छोटी सी सोच ने बड़े पैमाने पर सफलता हासिल की है। अब धरक्षा इकोसॉल्यूशंस न केवल प्रदूषण को कम कर रही है, बल्कि किसानों के लिए भी एक नई आर्थिक संभावनाएं खोल रही है।

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