पीएम मोदी ने गिनाए देश के 3 दुश्मन, रावण दहन के बाद बोले- मिलकर लड़ना होगा

The CSR Journal Magazine
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार, 20 अक्टूबर को दिल्ली में विजयादशमी के मौके पर रावण दहन किया। इस दौरान उन्होंने देशवासियों को दशहरे की शुभकामनाएं दीं और देश के सामने मौजूद चुनौतियों से मिलकर लड़ने का संदेश दिया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में तीन ऐसी ताकतों और विचारों का जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने देश के लिए चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मान-सम्मान, सामाजिक एकता और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए सभी को एकजुट होकर काम करना होगा।

पीएम मोदी ने बताए देश के तीन दुश्मन

दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव ग्राउंड में आयोजित दशहरा समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के मान-सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें, समाज में फूट डालने वाले लोग और भारतीय संस्कृति से नफरत करने वाली सोच ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका मुकाबला मिलकर करना होगा। पीएम मोदी के संदेश में देश की एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत बनाए रखने पर जोर रहा। उन्होंने विजयादशमी के महत्व को याद दिलाते हुए कहा कि यह त्योहार बुराई के खिलाफ खड़े होने और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।

विजयादशमी से मिलता है अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश

प्रधानमंत्री ने कहा कि विजयादशमी अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। यह पर्व भगवान राम के आदर्शों और उनके बताए रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। रावण दहन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। पीएम मोदी ने इस अवसर पर राम राज्य की अवधारणा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राम राज्य का मतलब ऐसी व्यवस्था है, जहां किसी के साथ भेदभाव न हो, सभी को न्याय मिले और हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का समान अवसर प्राप्त हो।

राम राज्य में जनकल्याण और न्याय पर जोर

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि शासन का उद्देश्य जनता की भलाई होना चाहिए। राम राज्य की कल्पना में न्याय, समान अवसर और जरूरतमंदों की सेवा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने गरीबों और वंचितों की मदद करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उनके संदेश के मुताबिक, सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसे लोगों को आगे बढ़ने का मौका मिले, जिन्हें अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है। विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचना जरूरी है।

आत्मनिर्भर भारत के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी

पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य का जिक्र करते हुए देशवासियों से अपनी क्षमता और संसाधनों पर भरोसा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मेहनत के साथ लोगों की भागीदारी भी जरूरी है। जब देश के लोग किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए मिलकर काम करते हैं, तो बड़ी चुनौतियों का सामना करना आसान हो जाता है। विजयादशमी के मौके पर प्रधानमंत्री का संदेश देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत बनाने पर केंद्रित रहा। उन्होंने सामूहिक प्रयासों की अहमियत बताते हुए बुराई के खिलाफ साहस और सही सोच के साथ खड़े होने का संदेश दिया।

संस्कृति और परंपरा का संरक्षण

दशहरे के अवसर पर पीएम मोदी का यह संबोधन सामाजिक एकता, सांस्कृतिक पहचान और राष्ट्रीय विकास के मुद्दों को सामने लाता है। उनका संदेश है कि देश के सामने आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए नागरिकों की भागीदारी और आपसी एकजुटता महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने इस अवसर पर संस्कृति और परंपरा के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपने धार्मिक त्योहारों को मनाने के साथ-साथ उनकी गहराई और अर्थ को भी समझना चाहिए। विजयादशमी हमें यह सिखाती है कि हमें हमेशा सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और बुराई के खिलाफ खड़े रहना चाहिए।

देशभर में उत्सव का माहौल

इस साल विजयादशमी का पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर रामलीलाओं का आयोजन किया जा रहा है, जहां लोग भगवान श्रीराम के जीवन के विभिन्न पहलुओं को देख रहे हैं। रावण दहन के कार्यक्रम में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
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