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	<title>government scheme Archives - The CSR Journal</title>
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	<title>government scheme Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>UP डिजिटल लेबर चौक ऐप लॉन्च: अब राजमिस्त्री, प्लंबर और पेंटर को मोबाइल से मिलेगा रोजगार</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/up-digital-labour-chowk-app-launch-for-construction-workers-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Yadav Jyoti]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 24 Jul 2026 09:50:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[government scheme]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से &#8216;यूपी डिजिटल लेबर चौक&#8217; ऐप लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य राजमिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, पेंटर, वेल्डर सहित अन्य निर्माण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना है। ऐप [&#8230;]</p>
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<h5 data-start="279" data-end="807">उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्माण क्षेत्र से जुड़े श्रमिकों और नियोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से &#8216;यूपी डिजिटल लेबर चौक&#8217; ऐप लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य राजमिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, पेंटर, वेल्डर सहित अन्य निर्माण श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान और पारदर्शी बनाना है। ऐप के माध्यम से श्रमिकों को काम की तलाश में पारंपरिक लेबर चौक पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी, जबकि बिल्डर, ठेकेदार और निर्माण एजेंसियां अपनी जरूरत के अनुसार सीधे पंजीकृत श्रमिकों से संपर्क कर सकेंगी।</h5>
<h2 data-section-id="gpojb0" data-start="809" data-end="857"><span role="text">घर बैठे मिलेगा काम, योजनाओं की जानकारी भी</span></h2>
<h5 data-start="859" data-end="1216">यूपी डिजिटल लेबर चौक ऐप पर पंजीकरण कराने वाले श्रमिकों को केवल रोजगार के अवसर ही नहीं, बल्कि श्रम विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी एक ही मंच पर मिलेगी। इससे पात्र श्रमिक सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए समय पर जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का उद्देश्य तकनीक के जरिए श्रमिकों तक रोजगार और सरकारी सुविधाओं की पहुंच को आसान बनाना है।</h5>
<h2 data-section-id="pf4q5c" data-start="1218" data-end="1277"><span role="text">प्ले स्टोर पर उपलब्ध, ज्यादा से ज्यादा उपयोग की अपील</span></h2>
<h5 data-start="1279" data-end="1561">श्रम विभाग के अनुसार यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। विभाग ने श्रमिकों, बिल्डरों, ठेकेदारों और अन्य नियोक्ताओं से इसे डाउनलोड कर उपयोग करने की अपील की है। विभाग का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक बनेगी।</h5>
<h2 data-section-id="1kgdavq" data-start="1563" data-end="1605"><span role="text">पंजीकृत श्रमिकों को मिलेगा सीधा लाभ</span></h2>
<h5 data-start="1607" data-end="2002">उप श्रमायुक्त दिव्य प्रताप सिंह के अनुसार निर्माण कार्य से जुड़ी संस्थाओं और श्रमिकों के बीच इस ऐप को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्रम विभाग के पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों को इस प्लेटफॉर्म के जरिए घर बैठे रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। साथ ही सरकारी योजनाओं की जानकारी भी समय पर उपलब्ध होगी, जिससे श्रमिकों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने में आसानी होगी।</h5>
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		<title>सरकार की नई स्कीम: नौकरी छूटने पर 3 महीने तक मिलेगी 50% सैलरी</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/esic-atal-beemit-vyakti-kalyan-yojana-extension-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Yadav Jyoti]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 07 Jul 2026 10:27:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[government scheme]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने अपनी प्रमुख योजना &#8216;अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना&#8217; (ABVKY) को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। यह योजना अब जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। इस योजना के तहत यदि किसी कर्मचारी की नौकरी छूट जाती है, तो उन्हें नए रोजगार की तलाश के दौरान वित्तीय सहायता मिलेगी। किसे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) ने अपनी प्रमुख योजना &#8216;अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना&#8217; (ABVKY) को एक साल के लिए बढ़ा दिया है। यह योजना अब जून 2027 तक प्रभावी रहेगी। इस योजना के तहत यदि किसी कर्मचारी की नौकरी छूट जाती है, तो उन्हें नए रोजगार की तलाश के दौरान वित्तीय सहायता मिलेगी।</h5>
<h2>किसे मिलेगा फायदा? जानें एलिजिबिलिटी</h2>
<h5>इस योजना का लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जो ESI के दायरे में आते हैं। यदि किसी कर्मचारी की नौकरी अनजाने में या जबरन समाप्त हो जाती है, तो वह इस योजना का लाभ उठा सकता है। यह योजना उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित हो रही है जो आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।</h5>
<h2>सैलरी का क्या होगा? जानिए विस्तार से</h2>
<h5>इस योजना के अंतर्गत, यदि किसी कर्मचारी की नौकरी छूट जाती है, तो उसे अगले तीन महीनों तक अपनी बेसिक सैलरी का 50% दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बेरोजगारी की स्थिति में कर्मचारियों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वे अधिक समय तक रोजगार की तलाश कर सकें।</h5>
<h2>कैसे करें आवेदन? जानें प्रक्रिया</h2>
<h5>जो भी कर्मचारी इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले अपने नजदीकी ESIC कार्यालय से संपर्क करना होगा। आवेदन पत्र भरने के बाद, उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। इसके बाद उनकी पात्रता की जांच की जाएगी। बीमित व्यक्ति को अपनी स्थिति की जानकारी भी देनी होगी।</h5>
<h2>योजना की लोकप्रियता में बढ़ोतरी</h2>
<h5>अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना कोविड-19 के दौरान शुरू की गई थी, और तब से यह कर्मचारियों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गई है। इसके तहत लाखों बेरोजगार लोगों को मदद मिल चुकी है। अब इस योजना के विस्तार से और भी अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।</h5>
<h2>आर्थिक स्थिरता की दिशा में कदम</h2>
<h5>सरकार द्वारा यह कदम आर्थिक स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है। नौकरी छूटने के बाद कर्मचारियों को वित्तीय सहायता देने से न केवल उनकी जीवनशैली खतरे में नहीं पड़ती, बल्कि यह उन्हें नए रोजगार की खोज करने में भी मदद करता है।</h5>
<h2>आगे की योजना क्या है?</h2>
<h5>यह योजना केवल एक शुरुआत है। सरकार के अन्य प्रयास भी जारी हैं, ताकि रोजगार के अवसरों में सुधार किया जा सके। ऐसे में, कर्मचारियों को आशा है कि भविष्य में और भी बेहतर योजनाएं लागू होंगी। इस योजना के तहत मिलने वाली सहायता से कर्मचारियों को आत्मनिर्भर बनने का भी मौका मिलेगा।</h5>
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		<title>अब गधे बनाएंगे करोड़पति? सरकार दे रही ₹50 लाख तक की सब्सिडी, Donkey Farming से खुल सकता है कमाई का नया रास्ता!</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/donkey-farming-subsidy-national-livestock-mission-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Mar 2026 10:05:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[government scheme]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अगर आप नया बिजनेस शुरू करने का सोच रहे हैं और पारंपरिक विकल्पों से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं, तो Donkey Farming Business आपके लिए बड़ा मौका बन सकता है। केंद्र सरकार ने National Livestock Mission (NLM) के तहत गधा पालन को बढ़ावा देने के लिए 50% तक की सब्सिडी देने की योजना शुरू [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>अगर आप नया बिजनेस शुरू करने का सोच रहे हैं और पारंपरिक विकल्पों से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं, तो Donkey Farming Business आपके लिए बड़ा मौका बन सकता है। केंद्र सरकार ने National Livestock Mission (NLM) के तहत गधा पालन को बढ़ावा देने के लिए 50% तक की सब्सिडी देने की योजना शुरू की है। यानी अगर आपका प्रोजेक्ट ₹1 करोड़ का है, तो सरकार आपको अधिकतम ₹50 लाख तक की आर्थिक मदद दे सकती है। यह स्कीम पशुपालन को Profitable Rural Business बनाने और देसी नस्लों को बचाने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।</h5>
<h2>क्या है Donkey Farming Subsidy Scheme?</h2>
<h5>सरकार अब गधा पालन को सिर्फ परंपरागत काम नहीं, बल्कि एक संगठित Agri Startup Model के रूप में देख रही है। योजना के तहत प्रोजेक्ट लागत का 50% हिस्सा सब्सिडी के रूप में मिलेगा। यह राशि दो किस्तों में जारी होगी, पहली किस्त बैंक से लोन पास होने के बाद और दूसरी किस्त प्रोजेक्ट शुरू होने के बाद। सरकार का मानना है कि इससे Rural Employment, Livestock Business और पशुधन संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।</h5>
<h2>सरकार क्यों दे रही इतनी बड़ी मदद?</h2>
<h5>2019 की पशुगणना के अनुसार देश में गधों की संख्या घटकर करीब 1.23 लाख रह गई है। देसी नस्लों के संरक्षण और पशुपालन आधारित रोजगार सृजन के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है। गधे का उपयोग अब सिर्फ पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं है। Donkey Milk Business, ऑर्गेनिक खेती, ईंट-भट्ठों और दुर्गम इलाकों में माल ढुलाई जैसे क्षेत्रों में इसकी मांग बढ़ रही है। ऐसे में यह Low Investment High Return Business Idea के रूप में उभर रहा है।</h5>
<h2>स्कीम का फायदा लेने की शर्तें</h2>
<h5>सरकार ने कुछ अनिवार्य नियम तय किए हैं। फार्म में कम से कम 50 मादा और 5 नर गधे होने चाहिए। सिर्फ देसी नस्ल के गधों पर ही सब्सिडी मिलेगी। 2024 से घोड़े और ऊंट पालन को भी इस योजना में शामिल किया गया है। इन पर ₹3 लाख से ₹50 लाख तक की सहायता मिल सकती है। यह योजना Animal Husbandry Scheme 2026 के तहत ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का हिस्सा है।</h5>
<h2>कैसे करें आवेदन?</h2>
<h5>आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और डिजिटल है। इच्छुक व्यक्ति nlm.udyamimitra.in पोर्टल पर जाकर Online Application for Donkey Farming Subsidy कर सकते हैं। बैंक से लोन स्वीकृत होने के बाद प्रोजेक्ट शुरू किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सही प्लानिंग, मार्केटिंग और मैनेजमेंट के साथ यह बिजनेस शुरू किया जाए तो यह लाखों नहीं, करोड़ों की कमाई का जरिया बन सकता है। स्पष्ट है कि सरकार पशुपालन को नए दौर का स्टार्टअप सेक्टर बनाना चाहती है। अब देखना यह है कि कितने युवा इस मौके को पहचान कर आगे बढ़ते हैं।</h5>
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		<item>
		<title>दिल्ली में 25 नई अटल कैंटीनों का उद्घाटन, गरीबों को मिलेगा भरपेट भोजन</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/twenty-five-new-atal-canteens-inaugurated-delhi-ensuring-full-meals-poor-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[The CSR Journal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 20 Feb 2026 18:27:27 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Delhi]]></category>
		<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[Atal Canteens]]></category>
		<category><![CDATA[government scheme]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>दिल्ली सरकार ने कृष्णा नगर में 25 नई अटल कैंटीनों का उद्घाटन किया है। इस योजना का उद्देश्य समाज के सबसे जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुँचाना है। यह केवल एक खाद्य योजना नहीं, बल्कि एक सम्मान जनक जीवन जीने का मौका भी है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस उद्घाटन समारोह [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h5>दिल्ली सरकार ने कृष्णा नगर में 25 नई अटल कैंटीनों का उद्घाटन किया है। इस योजना का उद्देश्य समाज के सबसे जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुँचाना है। यह केवल एक खाद्य योजना नहीं, बल्कि एक सम्मान जनक जीवन जीने का मौका भी है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस उद्घाटन समारोह में भाग लिया। अब दिल्ली में कुल 71 अटल कैंटीनें संचालित होंगी।</h5>
<h2>मुख्य उद्देश्य: 5 रुपये में पौष्टिक भोजन</h2>
<h5>उद्घाटन के अवसर पर उपराज्यपाल ने कहा कि यह योजना जरूरतमंद लोगों के लिए बहुत लाभकारी साबित हो रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अटल कैंटीन सिर्फ खाना देने की योजना नहीं है, बल्कि इसे कठिन श्रमिकों और जरूरतमंदों के लिए 5 रुपये में पौष्टिक भोजन प्रदान करने के लिए शुरू किया गया है। इस योजना की पारदर्शिता और गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है।</h5>
<h2>दिल्ली सरकार की अहम उपस्थिति</h2>
<h5>इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, पर्यावरण मंत्री आशीष सूद और कृष्णा नगर के विधायक डॉ. अनिल गोयल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और स्थानीय नागरिक भी मौजूद थे। ये कैंटीनें श्रमिक वर्ग के लिए एक महत्वपूर्ण साधन बन रही हैं, जो उन्हें कम कीमत पर साफ एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराएंगी।</h5>
<h2>अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की योजना</h2>
<h5>उपराज्यपाल ने बताया कि इस योजना की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती पर 25 दिसंबर को की गई थी। यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, मजदूरों, और छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हर थाली पर 25 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है, ताकि लोग सम्मान के साथ भोजन कर सकें।</h5>
<h2>सफाई और गुणवत्ता पर जोर</h2>
<h5>उपराज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कैंटीनों में भोजन की गुणवत्ता, पौष्टिकता, और स्वाद में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। सीसीटीवी कैमरों और डिजिटल टोकन सिस्टम के माध्यम से साफ-सफाई और पारदर्शिता का ध्यान रखा जा रहा है।</h5>
<h2>सरकार का लक्ष्‍य: 100 अटल कैंटीनें</h2>
<h5>मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का लक्ष्‍य आने वाले समय में 100 अटल कैंटीनें शुरू करना है, ताकि अधिकतम लोगों को इसका लाभ मिल सके। कैंटीनों में संतुलित भोजन के साथ-साथ दाल, चावल, रोटी और सब्जी भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं। इससे नागरिकों को सस्ता और पौष्टिक खाना मिल रहा है।</h5>
<h2>महत्वपूर्ण आंकड़े: 14 लाख से ज्यादा लोगों ने किया लाभ</h2>
<h5>दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने बताया कि 25 दिसंबर से अब तक 57 दिनों में 14,58,301 लोगों ने सिर्फ 5 रुपये में पौष्टिक भोजन लिया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस योजना ने कितनी जल्दी लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। जैसे ही नई कैंटीनें खुलेंगी, प्रतिदिन लगभग 50,000 लोगों को सहायता मिलेगी।</h5>
<h2>समाज के सहयोग की आवश्यकता</h2>
<h5>मुख्यमंत्री ने समाज से अपील की है कि वे अटल कैंटीन के कॉर्पस फंड में योगदान दें, ताकि विशेष अवसरों पर भोजन प्रायोजित किया जा सके। यह योजना केवल खाद्य वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गरीबों के</h5>
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			</item>
		<item>
		<title>Siddhivinayak Bhagyalakshmi Yojana: महाराष्ट्र &#8211; बच्ची के जन्म लेते ही मिलेंगे 10 हजार, किसे मिलेगा लाभ, जानें सब कुछ?</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/girls-will-get-rs-10000-siddhivinayak-bhagyalakshmi-yojana-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 05 Apr 2025 09:44:25 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[Maharashtra]]></category>
		<category><![CDATA[Top Stories]]></category>
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[government scheme]]></category>
		<category><![CDATA[सरकारी योजना]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>Siddhivinayak Bhagyalakshmi Yojana: श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर न्यास (Shri Siddhivinayak Ganpati Temple) ने एक नई योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना का नाम &#8216;श्री सिद्धिविनायक भाग्यलक्ष्मी&#8217; योजना (Siddhivinayak Bhagyalakshmi Yojana) है। यह योजना उन नवजात बच्चियों के लिए है जो 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women&#8217;s Day) पर सरकारी अस्पतालों [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>Siddhivinayak Bhagyalakshmi Yojana: श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर न्यास (Shri Siddhivinayak Ganpati Temple) ने एक नई योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखा है। इस योजना का नाम &#8216;श्री सिद्धिविनायक भाग्यलक्ष्मी&#8217; योजना (Siddhivinayak Bhagyalakshmi Yojana) है। यह योजना उन नवजात बच्चियों के लिए है जो 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women&#8217;s Day) पर सरकारी अस्पतालों (Government Hospital in Maharashtra) में जन्म लेंगी। इसका मकसद बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे सरकारी प्रयासों को समर्थन देना है। न्यास बालिकाओं के विकास के लिए उनके नाम पर 10,000 रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट करेगा। Government Scheme for <a href="https://thecsrjournal.in/national-girl-child-day-government-schemes-2/">Girl Child </a></h5>
<h2>Siddhivinayak Bhagyalakshmi Yojana: लड़कियों के जन्म को प्रोत्साहित करना है मकसद</h2>
<h5>श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर न्यास लड़कियों के जन्म को प्रोत्साहित करना चाहता है। वे उनकी शिक्षा के लिए आर्थिक मदद भी करना चाहते हैं। यह प्रस्ताव सरकार की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस योजना के तहत जन्म लेने वाली बच्ची के नाम पर 10,000 रुपये की राशि उसकी मां के खाते में जमा की जाएगी। यह पैसा फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में होगा। श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर न्यास की विश्वस्त समिति की बैठक 31 मार्च 2025 को हुई थी। बैठक की अध्यक्षता सदानंद सरवणकर ने की। न्यास का 2024-25 का वार्षिक विवरण और 2025-26 का बजट भी इस बैठक में पेश किया गया। न्यास को 114 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद थी, लेकिन वास्तव में 133 करोड़ रुपये की आय हुई। न्यास ने बताया  कि पिछले साल की तुलना में न्यास की आय में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। <a href="https://www.myscheme.gov.in/">Government Scheme </a></h5>
<h2>नवजात बालिकाओं के लिए &#8216;भाग्यलक्ष्मी&#8217; योजना का प्रस्ताव</h2>
<h5>मुंबई में भगवान गणेश के प्रसिद्ध मंदिर का प्रबंधन करने वाले सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट की आय पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत बढ़कर 133 करोड़ रुपये हो गई। अधिकारियों ने बताया कि आय वृद्धि में सबसे ज्यादा योगदान भक्तों द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे का रहा। इसके अलावा, पूजा और अन्य अनुष्ठानों से 20 करोड़ रुपये की आय हुई। उन्होंने बताया कि मंदिर को दान पेटियों, ऑनलाइन भुगतान, अनुष्ठानों, प्रसाद की बिक्री और सोने-चांदी की नीलामी सहित कई स्रोतों से आय हासिल हुई। इसलिए मंदिर प्रशासन इस तरह से सामाजिक काम कर रहा है। बहरहाल हम आपको बता दें कि इसके पहले भी सिद्धिविनायक ट्रस्ट लगातार इस तरह के सामाजिक कामों में आगे रहता है। Ganpati Mandir in Mumbai</h5>
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		<title>Water Supply Schemes Inaugurated Under Jal Jeevan Mission In Jammu &#038; Kashmir’s Kathua</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/water-supply-schemes-jal-jeevan-mission-jammu-kashmirs-kathua-jitendra-singh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[The CSR Journal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Feb 2025 12:54:21 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[India]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[Dr. Jitendra Singh]]></category>
		<category><![CDATA[government scheme]]></category>
		<category><![CDATA[Government schemes]]></category>
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		<category><![CDATA[Jammu and Kashmir]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>The central government on Saturday inaugurated seven water supply schemes under Jal Jeevan Mission in Jammu &#38; Kashmir’s Kathua. The schemes were launched by Union Minister of State for Personnel, Public Grievances and Pensions of India Dr Jitendra Singh in a village named Jasrota. The schemes costing Rs 25.31 crore is expected to benefit 15,881 [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h6>The central government on Saturday inaugurated seven water supply schemes under Jal Jeevan Mission in Jammu &amp; Kashmir’s Kathua. The schemes were launched by Union Minister of State for Personnel, Public Grievances and Pensions of India Dr Jitendra Singh in a village named Jasrota.</h6>
<h6>The schemes costing Rs 25.31 crore is expected to benefit 15,881 residents, covering 2584 households in 10 villages, including Jasrota, Rakh Hoshyari, Padyari, Saktha Chak, Bhadoli Charpad and Mangtian. Speaking at the launch, the Minister informed that a total of 303 water supply schemes, with an estimated cost of Rs 1369.57 crores, are being taken up in district Kathua under Jal Jeevan Mission.</h6>
<h6>Dr Jitendra Singh stated that the government is focused on completing the stalled projects to boost connectivity in remote parts of Jammu and Kashmir. The minister also assured local residents that certain issues which are being faced in the proper implementation of the schemes are being sorted out in coordination with J&amp;K government.</h6>
<h2>Kathua to become major economic hub</h2>
<h6>Dr Jitendra Singh stated that the government is working to make the district of Kathua a major hub of economy activity, offering avenues of self-employment to the local youth. He mentioned that the district has earned a unique distinction for having North India’s first Bio-tech Park, Seed Processing Plant and North India&#8217;s only Homeopathic College. The Minister urged the youth to avail the subsidy being provided by the government for the promotion of Khadi to earn their own livelihoods.</h6>
<h2>Connectivity</h2>
<h6>The Minister said that once completed, the strategic Chattergala tunnel will become a game-changer in providing all-weather connectivity between Doda and Lakhanpur. He further informed that the government has decided to build nine additional underpasses along Delhi-Amritsar-Katra Expressway, to fulfil a public demand.</h6>
<h2>Tourism</h2>
<h6>Underlining the potential of tourism to create employment opportunities and boost livelihoods, Dr Singh said that steps are also being taken to promote tourism in places such as Basohli and Mantalia in the region. The Minister informed that Mansar area of Udhampur district is also being developed as a tourist destination under Swadesh Darshan scheme.</h6>
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		<title>Labour Day पर जानिए वो सरकारी योजनाएं जो मजदूरों के लिए है वरदान</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/know-government-scheme-for-betterment-of-labour-in-india-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 May 2024 08:56:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[government scheme]]></category>
		<category><![CDATA[international labour day]]></category>
		<category><![CDATA[Mazdoor Day]]></category>
		<category><![CDATA[मजदूर]]></category>
		<category><![CDATA[मजदूर दिवस]]></category>
		<category><![CDATA[सरकारी योजना]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>International Labour Day &#8211; आज मजदूर दिवस है यानी International Labour Day। आज इस मजदूर दिवस (Mazdoor Day) पर भारत की जनता के लिए, हमारे श्रमिक भाईयों के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई उस शानदार योजनाओं के बारे में बात करेंगे, जिसने लाखों मजदूरों की जिंदगी बदल दी। इन Government Scheme के तहत ना [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>International Labour Day &#8211; आज मजदूर दिवस है यानी International <a href="https://thecsrjournal.in/world-day-against-child-labour-top-india-ngos-nonprofits/">Labour</a> Day। आज इस मजदूर दिवस (Mazdoor Day) पर भारत की जनता के लिए, हमारे श्रमिक भाईयों के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई उस शानदार योजनाओं के बारे में बात करेंगे, जिसने लाखों मजदूरों की जिंदगी बदल दी। इन Government Scheme के तहत ना सिर्फ लोगों को रोजगार मिला, बल्कि खुद को आर्थिक रूप से मजबूत करने में मदद मिली। देश में एक बड़ी आबादी असंगठित क्षेत्र से जुड़े मजदूर वर्ग के लोगों की है। ऐसे में असंगठित क्षेत्र से जुड़े लोगों की इसी समस्या को देखते हुए भारत सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का संचालन कर रही है। सरकार श्रमिकों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। ऐसे में लेबर डे के इस ख़ास अवसर पर आइये जान लेते है वो सरकारी योजनाएं जो मजदूर के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।</h5>
<h2>क्यों मनाया जाता है मजदूर दिवस यानी International Labour Day</h2>
<h5>लेकिन सबसे पहले ये जानते हैं कि आखिरकार मजदूर दिवस क्यों मनाया जाता है। मजदूर दिवस को पहली बार 1889 में मनाया गया था। इसकी शुरुआत अमेरिका के शिकागो शहर में हुई थी, जहां मजदूरों ने लगातार 15-15 घंटे काम करने को लेकर आंदोलन किया था। उसके बाद 1 मई 1889 को पहली बार मजदूर दिवस से श्रम दिवस मनाने का प्रस्ताव लाया गया। भारत में इसकी एंट्री ठीक 34 साल बाद हुई। उस समय हमारे देश में वामपंथी लोग इसका नेतृत्व कर रहे थे। 1 मई 1923 को लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान की अध्यक्षता में पहली बार मजदूर दिवस चेन्नई में मनाने का फैसला लिया गया। अब समूचे देश में लेबर डे मनाया जाता है।</h5>
<h2>मजदूरों के लिए वरदान साबित हुई ई-श्रम योजना</h2>
<h5>श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने भारत के असंगठित गरीब मजदूर के परिवारों की मदद करने के लिए ई-श्रम योजना 2022 की शुरुआत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य छोटे-छोटे मजदूरों को उनके स्किल्स के आधार पर रोजगार मुहैया कराना है। इस योजना का फायदा उठाने के लिए व्यक्ति को सरकार के ऑफिशियल पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इस योजना के तहत सिर्फ वही लोग रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं जिनकी आयु 16 से 59 वर्ष के बीच है। एक बार जब आप रजिस्टर हो जाते हैं तब आपको एक 12 अंको का यूनिक नंबर दिया जाता है, जिसकी मदद से आप सरकार के अलग-अलग योजनाओं से जुड़कर रोजगार का अवसर प्राप्त कर सकते हैं। मजदूरों को रजिस्ट्रेशन से बहुत फायदा होता है। इसका उद्देश्य असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और सेवाओं में सुधार करना है। रजिस्ट्रेशन के बाद व्यक्ति को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के तहत 2 लाख का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। भविष्य में असंगठित श्रमिकों के सभी सामाजिक सुरक्षा लाभ सीधे इस पोर्टल के माध्यम से वितरित किए जाएंगे। आपातकालीन और राष्ट्रीय महामारी जैसी स्थितियों में इस डेटाबेस का उपयोग असंगठित श्रमिकों को आवश्यक सहायता प्रदान करने के लिए किया जा सकता है।</h5>
<h2>सरकार की हर कल्याणकारी योजना मजदूरों को बना रही है सशक्त</h2>
<h5>जनता के हित में भारत सरकार कई <a href="https://dge.gov.in/dge/hi/schemes_programmes">कल्याणकारी योजनाएं</a> चला रही है। युवाओं, किसानों, महिलाओं जैसे हर एक वर्ग के लिए नरेंद्र मोदी की कुछ न कुछ Government Scheme है। ये गवर्नमेंट स्कीम मजदूरों के लिए भी होता है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) के माध्यम से जीवन और दिव्यंगता कवर प्रदान किया जाता है। आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजय) स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था सुरक्षा प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने 2019 में प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन (पीएम-एसवाईएम) पेंशन योजना शुरू की। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, गरीब कल्याण रोजगार अभियान, महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना, दीन दयाल अंत्योदय योजना, पीएम स्वनिधि, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना आदि जैसी अन्य योजनाएं भी मजदूरों सहित असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए उनकी पात्रता मानदंडों के आधार पर उपलब्ध हैं।</h5>
<h2>ये योजनाएं भी मजदूरों के लिए बड़े काम की है</h2>
<h5>इन योजनाओं के अलावा, कुछ और योजनाएं भी मजदूरों के लिए उपलब्ध हैं। आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना (एबीआरवाई), अटल बीमित व्यक्ति कल्याण योजना (एबीवीकेवाई) के तहत बेरोजगारी लाभ, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान (पीएमजीकेआरए), राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम, दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्या योजना (डीडीयू-जीकेवाई), प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान (पीएम-जीकेआरए), प्रधानमंत्री किसान मान-धन योजना (पीएम केएमडीवाई), प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि आदि अन्य योजनाओं के डेटा के साथ ईश्रम डेटा का मिलान भी किया गया है। यह पाया गया है कि ईश्रम डेटा (28.97 करोड़ से अधिक) में से 20.63 करोड़ पहले से ही वन नेशन वन राशन कार्ड (ओएनओआरसी) का लाभ उठा रहे हैं, 11.26 करोड़ आयुष्मान भारत &#8211; प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजय) में पंजीकृत हैं, 3.82 करोड़ पीएम-किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) में पंजीकृत हैं और 4.63 करोड़ लाभार्थी पीएम-उज्ज्वला योजना में पंजीकृत हैं। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान 31 विभिन्न व्यवसायों से जुड़े कुल 1.77 करोड़ से अधिक असंगठित कामगारों को ईश्रम पोर्टल में पंजीकृत किया गया है।</h5>
<h2>इस योजना से मजदूरों को मिलेगी हर महीने तीन हजार रुपये पेंशन</h2>
<h5>प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए शुरू की गई थी। इसके लिए 18 वर्ष से 40 वर्ष के व्यक्तियों को आवेदन करना होगा जिसके बाद वह असंगठित क्षेत्र के वर्कर्स को 60 साल की उम्र के बाद 3000 रुपए पेंशन मिलती है। श्रम योगी मानधन योजना के पोर्टल पर आसानी से आवेदन कर सकते हैं।  Pradhanmantri Shram Yogi Mandhan Yojana: वर्ष 2024 के लिए अंतरिम बजट में प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PMSYM) के लिए 177.24 करोड़ रुपये के आवंटन प्रस्ताव किया गया है। इस योजना का उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बुढ़ापे में पेंशन देकर सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।  इस योजना के तहत लाभार्थी को हर महीने कंट्रीब्यूशन करना होता है, जितना वो देते हैं, उतना ही सरकार उसमें मिलाती है। सरल शब्दों में कहें तो, अगर लाभार्थी इसमें 100 रुपये देते हैं, तो 100 रुपये सरकार की ओर से दिया जाता है। इसमें 60 साल की आयु तक निवेश करना होता है। 60 की उम्र के बाद आपको हर महीने 3 हजार रुपये की पेंशन इस स्कीम के अंतर्गत मिलेगी। आप श्रम योगी मानधन योजना के पोर्टल पर विजिट करके आसानी से इस स्कीम में आवेदन कर सकते हैं।</h5>
<h2>मनरेगा योजना से मजदूरों को खुद उनके गांव में मिल रहा है रोजगार</h2>
<h5>MGNREGA Yojana &#8211; देश के गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए कांग्रेस सरकार द्वारा मनरेगा योजना को शुरू किया गया था लेकिन इसे राष्ट्रीय स्तर पर प्रत्येक राज्य की सरकार द्वारा एवं वर्तमान की भाजपा सरकार ने भी अपनाए रखा है। इस योजना के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार प्रदान किया जाता है। ताकि उन्हें गांव से दूर रोजगार के लिए जाना ना पड़े। देश के सभी राज्यों में संचालित ग्राम पंचायत स्तर पर यह योजना लोगों को बहुत ही सहायता प्रदान कर रही है। मनरेगा योजना के माध्यम से अब तक देश के करोड़ों नागरिकों को लाभ मिल चुका है। मनरेगा योजना विश्व की एकमात्र ऐसी योजना है जो नागरिकों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी देती है। देश के गरीब और बेरोजगार परिवारों को आजीविका के लिए इस योजना का आरंभ किया गया हैं। इस योजना के माध्यम से कमजोर आय वर्ग के लोगों को उनके ग्राम पंचायत में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। जिससे उन्हें पलायन की करने से काफी हद तक रोका जा सकता है।</h5>
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		<title>ऐसे करें अपने गांव का विकास, बनायें अपने गांव को मॉडल विलेज</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/national-panchayati-raj-day-how-to-do-development-in-village-in-india-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Apr 2024 08:49:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
		<category><![CDATA[government scheme]]></category>
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										<content:encoded><![CDATA[<div id=":31i" class="Ar Au Ao">
<div id=":31e" class="Am aiL Al editable LW-avf tS-tW tS-tY" tabindex="1" role="textbox" contenteditable="true" spellcheck="false" aria-label="Message Body" aria-multiline="true" aria-owns=":38r" aria-controls=":38r" aria-expanded="false">
<h5>देश के विकास का रास्ता गांव की गलियों से होकर ही गुजरता है। गांव का जो रास्ता शहर की तरफ जाता है वही रास्ता गांव की तरफ भी आता है। लेकिन तमाम दावों, वादों और योजनाओं के बावजूद भी आज गांव की तरफ विकास अपना रुख नहीं कर पाया है। जिससे तरक्की का रास्ता और गुलजार हो सके, गावों में समृद्धि आ सके। सरकार बनाने में ग्रामीणों का विशेष योगदान होता है, लेकिन चुनाव के बाद गांव की तरफ शायद ही कोई जनप्रतिनिधि वहां आता हो। नेता अपने काम और जाति की दुहाई लेकर गांव में वोट मांगने जरूर आते हैं लेकिन विकास करने की बारी जब आती है तो ये नेता रफूचक्कर हो जाते है। भारत मुख्यतः गांवों का देश है, यहां की अधिकांश जनसंख्या गांवों में रहती है। आधे से अधिक लोगों का जीवन खेती पर निर्भर है, इसलिए इस बात की आप कल्पना भी नहीं कर सकते कि गांव के विकास के बिना देश का विकास किया जा सकता है।</h5>
<h2>गांव के विकास से ही राष्ट्र का विकास संभव है</h2>
<h5>गांधी जी ने कहा था &#8211; अगर आप असली भारत को देखना चाहते है तो गांवों में जाइये क्योंकि असली भारत गांवों में बसता है। आर्थिक सामाजिक जातिगत सर्वेक्षण के आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल देश में कुल 73.44 फीसदी परिवार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करते हैं। इस आधार पर गांव में ज्यादा होना चाहिए जो कि नहीं हो सका। आज भी बहुत सारे गांव में स्कूल, अस्पताल, स्वच्छ पीने के पानी की व्यवस्था, सिंचाई के साधन, खेती खलियान कृषि, छोटे उद्योग जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी है। इन सबको ठीक करने के लिए सभी सरकारों की जिम्मेदारी है लेकिन ग्राम पंचायत की ज्यादा जिम्मेदारी है। गांव के विकास के लिए शासन की न कोई योजनाबद्ध प्रणाली है और ना ही विकास कार्यों को लेकर इच्छाशक्ति दिखाई देती है।</h5>
<h2>विकसित ग्राम, विकसित प्रदेश और विकसित देश</h2>
<h5>इसी के चलते निरंतर व्याप्त निराशा और भविष्य की चिंता में गांव में भारी भरकम लोग भारी संख्या में पलायन कर रहे हैं। आज भी कई ऐसे गांव है जहां पर बिजली के खंभे तो लग गए है, तारे पहुंच गई हैं, लेकिन बिजली नहीं पहुंची है। जहां इलाज के लिए ग्रामीणों को आज भी झोलाछाप डॉक्टरों के भरोसे ही रहना पड़ता है। देश में कई ऐसे गांव है जहां आज भी पीने के पानी के लिए सिर पर पानी उठाकर लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। समस्याएं तमाम है लेकिन क्या ये जिम्मेदारी सिर्फ सरकार, प्रशासन, जिला पंचायत या फिर ग्राम पंचायत की ही है। अगर ये जिम्मेदारी हम और आप उठा लें कि हमें हमारे जिले, हमारे गांव में विकास की गंगा बहानी है तो ये संभव है।</h5>
<h2>राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर जानें कैसे आप बना सरके है अपने गांव को एक मॉडल विलेज</h2>
<h5>हम कब तक दूसरों को कोसते रहते हुए सिर्फ हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहेंगे। आज समूचे भारत में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (<a href="https://thecsrjournal.in/a-development-thinking/">National Panchayati Raj Day</a>) मनाया जा रहा है ऐसे में आइये जानते है कि ऐसा क्या करने से हमारे गांवों में विकास हो सकता है। अगर आप जिम्मेदार और जागरूक नागरिक है तो गांव के विकास में आप बहुत बड़ा योगदान दे सकते है। गांव के विकास में आपको क्या चाहिए, सबसे पहले तो ये आपको समझना होगा। सिलसिलेवार तरीके से जानते है।</h5>
<h2>एक आदर्श गांव बनाने के लिए किन-किन चीजों की जरूरत होती है</h2>
<h5><a href="https://panchayat.gov.in/">ग्राम पंचायत</a> विकास योजना के माध्यम से गांवों के समग्र विकास के लिए कार्ययोजना तैयार किया जाता है और इनके स्वीकृत होते ही गांवों और ग्रामीणों की जरूरत के अनुसार विकास एवं निर्माण कार्य कराया जाता है। किसी भी गांव को आदर्श बनाने के लिए इसकी बुनियादी ढांचे को मजबूत करनी पड़ती है। जिस प्रकार से मजबूत बुनियाद ही विशाल इमारत खड़ा करने में सक्षम है उसे प्रकार मजबूत बुनियाद गांव और पंचायत को भी सक्षम बनाती है। स्थानीय नेतृत्व व सामुदायिक भागीदारी के साथ-साथ पंचायत सरकार, राज्य सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं को गांव के विकास में लगाना एक आदर्श गांव के लिए आवश्यक है। ऐसे में आप खुद जिला मुख्यालय में जाकर ग्राम विकास के लिए कौन-कौन सी सरकारी योजनाएं है इसका लिस्ट बनाकर इन योजनाओं को अपने गांव में अमल करवाएं।</h5>
<h2>गांव के विकास में इन सरकारी योजनाओं को लाएं अमल में</h2>
<h5>राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का सपना था कि प्रत्येक गांव स्वच्छ हो, सड़क बिलकुल दुरुस्त हो, शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हो, जानवरों के लिए चारागाह हो, प्राथमिक से लेकर माध्यमिक शिक्षा का केंद्र हो जहां बच्चे बचपन से ही हुनरमंद बने, विवादों के निपटारन के लिए ग्राम पंचायत कचहरी हो, सफल और सब्जियों के लिए समुचित बाजार उपलब्ध हो, पर्यावरण सही हो, लोगों का रहन-सहन उच्च कोटि का हो। गांव में वाचनालय और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मंच और खेलकूद की पूरी व्यवस्था हो। इन सभी के लिए सरकार ने Government Scheme बनाये है। जिसका फॉलो अप लेकर आप अपने गांव में ये योजनाएं ला सकते है।</h5>
<h2>खेती किसानी के लिए ये करें काम, हो जायेंगे किसान समृद्ध</h2>
<h5>भारतीय ग्रामीणों की आय का प्रमुख साधन कृषि है। कुछ लोग पशु-पालन से अपनी जीविका चलाते हैं। तो कुछ कुटीर उद्योग से कमाते है। भारत देश की आजादी के बाद से कृषि के विकास के साथ-साथ ग्राम-विकास की गति भी बढ़ी। लेकिन अगर आपको उन्नत खेती करनी है तो आपको आज की तकनीक अपनानी होगी। पारम्परिक खेती को छोड़कर आज आपको सॉइल टेस्ट करवाना होगा, आपकी मिटटी के लिए कौन सा फसल उपयुक्त है ये पहले जानना होगा उस हिसाब के किसान खेती करेगा तो वो समृद्ध होगा। आज किसानों के पास कृषि में उपयोग किये जाने वाले यंत्र भी पाए जाते है। इसे पाने के लिए कई योजनाएं है जिसकी जानकारी जिला कृषि अधिकारी के पास मिलेगा। एक जागरूक नागरिक जाकर ये हासिल कर सकता है। भारतीय किसानों की स्थिति ख़राब होने का एक प्रमुख कारण कृषि-ऋण है। बड़े-बड़े सेठ और साहूकार किसान को थोड़ा सा लोन देकर उसे अपनी फसल बहुत कम दाम में बेचने को मजबूर कर देते हैं। इसलिए आज अधिकांश गांवों में बैंक खोले गए हैं जो मामूली ब्याज पर किसानों को ऋण देते हैं। इन Farmer Loan की जानकारी लें।</h5>
<h2>ऐसे करें शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, जिससे गांव में पीने के पानी की नहीं होगी समस्या</h2>
<h5>गांव में शुद्ध एवं पर्याप्त पानी के लिए लोग तालाब, पोखर पर ज्यादातर निर्भर होते हैं और खासकर उत्तर भारत में ग्राउंडवाटर पानी का सबसे बड़ा साधन है। ऐसे में केंद्र सरकार और राज्य सरकार द्वारा हर घर नल योजना चलायी जा रही है, आप इन योजनाओं के बारे में जानकारी लेकर जिलाधिकारी कार्यालय में अगर आपके गांव में शुद्ध पीने के पानी का व्यवस्था नहीं है तो डीएम ऑफिस में एप्लीकेशन कर सकते हैं। जिससे आपके गांव में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था हो जाएगी।</h5>
<h2>ऐसे करें इलाज, शिक्षा के लिए करें व्यवस्था</h2>
<h5>अगर आपके गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नहीं है या फिर आपके आसपास कोई डॉक्टर या फिर बीमारी के इलाज की व्यवस्था नहीं है तो आप जिलाधिकारी या फिर जिले के चीफ मेडिकल ऑफिसर से मुलाकात कर आपके गांव या फिर आसपास में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुलवाने के लिए आप उसे एक एप्लीकेशन दे सकते हैं। बात करें शिक्षा की तो प्रत्येक 2 से 3 किलोमीटर के फैसले पर राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार ने सुनिश्चित किया हुआ है कि प्राइमरी स्कूल हो या फिर सेकेंडरी स्कूल हो। अगर किसी कारणवश आपके यहां पर शिक्षा के लिए, एजुकेशन के लिए स्कूल नहीं है तो आप डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर से मुलाकात कर उसको एक ज्ञापन दे सकते हैं और यदि आपके यहां पर स्कूल है लेकिन अच्छी शिक्षा व्यवस्था नहीं है तो इसकी आप शिकायत जिला शिक्षा विभाग को कर सकते हैं। अगर जो आप अपने स्कूल में लाइब्रेरी या फिर कंप्यूटर एजुकेशन की भी सुविधा चाहते हैं तो भी आप जिला शिक्षा अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।</h5>
<h2>उद्योग और रोजगार की भी करें सुनिश्चित, ताकि हो गांव का विकास</h2>
<h5>प्रत्येक गांव में ग्राम सभा की जमीन पर्याप्त मात्रा में होती हैं। अगर आपके गांव में उद्योग और रोजगार की व्यवस्था नहीं है तो ऐसे में जिला उद्योग विभाग में जाकर उनसे मिलकर एक ज्ञापन सौंप सकते हैं। जहां पर आपके गांव में राज्य सरकार कृषि आधारित रोजगार या फिर कृषि आधारित उद्योग के लिए इंडस्ट्रीज को जमीन दे सकती है। जहां पर डेयरी, मुर्गी पालन, चरखा, कुटीर उद्योग आदि की व्यवस्था की जा सकती है।  इससे आपके गांव में न सिर्फ उद्योग होगा बल्कि रोजगार की भी व्यवस्था हो सकती है। आप अपने गांव को अगर हरा भरा बनाना चाहते हैं और पर्यावरण और ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में काम करना चाहते हैं तो हर जिले में एक सरकारी नर्सरी होती है जहां से आपको मुफ्त पौधे मिलते हैं। वहां पर जाकर आप मुफ्त पौधे लाकर आप अपने गांव में उसका रोपण कर सकते हैं।</p>
<p>आदर्श गांव बनाने के लिए सबसे पहले ग्रामीणों में इच्छा शक्ति का होना चाहिए। दूसरी चीज होती है नेतृत्व जहां जैसा नेतृत्व होता है वहां वैसे उन्नति होती है। सरकारी योजनाओं का हाल सभी जगह एक सी रहती है लेकिन अगर आप एक जागरूक नागरिक है और अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी रखते हैं तो ऐसे में आप इन तरीकों से अपने गांव को एक आदर्श ग्राम बना सकते हैं।</h5>
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		<title>योगी सरकार ने महिलाओं के लिए खोला खजाना, कन्या सुमंगला योजना की बढ़ाई राशि</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 17 Feb 2024 08:30:36 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[Yogi Adityanath]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने बेटियों से किया अपना वादा पूरा किया है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना (Mukhyamantri Kanya Sumangala Yojana) में अभी तक छह श्रेणियों में बेटियों को 15 हजार रुपये दिए जाते थे, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फाइनेंसियल ईयर 2024-25 से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की घोषणा की [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (UP CM Yogi Adityanath) ने बेटियों से किया अपना वादा पूरा किया है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना (<a href="https://mksy.up.gov.in/women_welfare/citizen/guest_login.php">Mukhyamantri Kanya Sumangala Yojana</a>) में अभी तक छह श्रेणियों में बेटियों को 15 हजार रुपये दिए जाते थे, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फाइनेंसियल ईयर 2024-25 से बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की घोषणा की थी। बेटियों के जन्म से लेकर उनके ग्रेजुएशन/डिप्लोमा में दाखिले पर यह राशि छह कैटेगरी में दी जाती है। इन सभी कैटेगरी में दी जाने वाली राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। अब इसे 15 हज़ार से बढाकर 25 हज़ार तक कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत दिए जाने वाली राशि का लाभ पहली अप्रैल से मिलने लगेगा।</h5>
<h2>योजना के तहत योगी सरकार देती थी 15 हजार रुपये, अब देगी 25 हज़ार रुपये</h2>
<h5>2017 में सत्ता संभालने के बाद <a href="https://thecsrjournal.in/ram-mandir-pran-pratishtha-ayodhya-pm-cm-speech-hindi/">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ</a> ने महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment), सम्मान व स्वावलंबन पर विशेष जोर दिया। कन्या भ्रूण हत्या खत्म करने, समान लैंगिक अनुपात स्थापित करने, बाल विवाह की कुप्रथा रोकने, बालिकाओं के स्वास्थ्य व शिक्षा को प्रोत्साहन देने, स्वावलंबी बनाने में सहायता प्रदान करने व बालिका के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने आदि के उद्देश्य से महिला कल्याण विभाग की ओर से अप्रैल 2019 से मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का आगाज किया गया था। Mukhyamantri Kanya Sumangala Yojana में छह श्रेणियों में कुल 15 हजार रुपये दिए जाते थे।</h5>
<h2>कन्या सुमंगला योजना में में दी जाने वाली रकम में की गई वृद्धि</h2>
<h5> The CSR Journal से ख़ास बातचीत करते हुए महिला कल्याण विभाग की निदेशक संदीप कौर ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस राशि को बढ़ाने की घोषणा की थी। इसके बाद छह श्रेणियों में दी जाने वाली राशियों में वृद्धि कर दी गई है। जन्म से लेकर बेटी के डिप्लोमा या ग्रेजुएशन में प्रवेश तक ये अलग अलग किस्तों में बेटियों के खाते में दिए जायेंगे। सीएम योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद महिला कल्याण विभाग ने वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए आदेश भी जारी कर दिया गया है। गौरतलब है कि बेटियों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ऐसे कई लाभकारी योजनाएं चला रही है। Mukhyamantri Kanya Sumangala Yojana भी बेटियों के लिए कारगर सिद्ध होगा।</h5>
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		<title>क्या है प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, जिसका बजट में है जिक्र</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/know-details-of-pm-kisan-sampada-yojana-union-budget-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Rahuldeo Sharma]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Feb 2024 11:19:13 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[CSR for farmers]]></category>
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		<category><![CDATA[प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>देश की फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट (Union Budget) पेश किया। उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिम बजट पर बयान देते हुए कहा कि  इस बजट में किसानों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण और बड़े निर्णय लिए गए हैं। नैनो डीएपी का उपयोग, पशुओं के लिए नई योजनाएं, पीएम मत्स्य संपदा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<h5>देश की फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट (Union Budget) पेश किया। उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरिम बजट पर बयान देते हुए कहा कि  इस बजट में किसानों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण और बड़े निर्णय लिए गए हैं। नैनो डीएपी का उपयोग, पशुओं के लिए नई योजनाएं, पीएम मत्स्य संपदा योजना के विस्तार और आत्मनिर्भर ऑयल सीड अभियान से किसानों की आय बढ़ेगी और खर्च कम होगा। वहीं अमित शाह ने बजट को किसान हितैषी बताते हुए कहा कि मोदी सरकार आज 11.8 करोड़ किसानों को वित्तीय सहायता व 4 करोड़ किसानों को फसल बीमा से सुरक्षा दे रही है।</h5>
<h2>किसानों के लिए इस बजट में ये है ख़ास</h2>
<h5>किसानों पर बात करती हुई वित्त मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना से 38 लाख किसानों को फायदा मिला है और 10 लाख रोजगार के अवसर उत्पन्न हुए हैं। कृषि क्षेत्र में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की भागीदारी मजबूत करेंगे। आत्मनिर्भर तेल बीज अभियान को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत कृषि की नई प्रौद्योगिकी और कृषि बीमा को बढ़ावा दिया जाएगा। डेयरी से जुड़े किसानों के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं। मत्स्य संपदा को भी मजबूत किया जा रहा है। सी-फूड का उत्पादन दोगुना है। मत्स्य संपदा योजना के जरिए उत्पादकता को तीन से बढ़ाकर पांच टन प्रति हेक्टेयर किया जाएगा।</h5>
<h5>रोजगार के 55 लाख नए अवसरों को उत्पन्न किया जाएगा। पांच समेकित एक्वा पार्क बनाए जाएंगे। पीएम किसान योजना के तहत 11.8 करोड़ किसानों के खातों में पैसे डाले गए। पीएम फसल बीमा योजना के तहत चार करोड़ किसानों की फसल का बीमा किया गया। ई-नाम योजना के तहत 1361 मंडियों का एकीकरण किया गया, जिनमें तीन लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। बजट में मॉडर्न स्टोरेज और प्रभावकारी सप्लाई चेन स्थापित करने पर लिए गए अहम फैसलों से हमारे अन्नदाता आर्थिक तौर पर सशक्त एवं समृद्ध बन सकेंगे। मॉडर्न स्टोरेज, फ़ूड प्रोसेसिंग और प्रभावकारी सप्लाई से किसानों को बहुत फायदा होता है। इसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार (Narendra Modi Government) प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना चला रही है जिसका आज बार-बार Finance Minister Nirmala Sitharaman ने किया। ऐसे में आइये जानते है कि आखिरकार PM Kisan Sampada Yojana (Government Scheme on Farmers) क्या है।</h5>
<h2>प्रधानमंत्री <a href="https://thecsrjournal.in/not-got-pradhanmantri-kisan-samman-yojana-installment-do-this-hindi/">किसान</a> संपदा योजना की पूरी जानकारी</h2>
<h5>केंद्र सरकार द्वारा देश के लगभग हर वर्ग के लिए कई तरह की लाभकारी और कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन्हीं में किसानों (Farmers) के लिए भी कई ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनसे उनकी आय को दोगुनी किया जा सके। उन्हीं में से एक प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना है। हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना की शुरुआत अगस्त 2017 में की गई थी। वहीं इस योजना को लेकर सरकार ने एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। दरअसल, इस योजना को 2021-22 से बढ़ाकर 2025-26 कर दिया गया है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना क्या है? इस योजना से किसानों को क्या लाभ मिलता है? इसके अलावा योजना के तहत रजिस्ट्रेशन के लिए जरूरी पात्रता और दस्तावेज क्या हैं?</h5>
<h2>प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना क्या है?</h2>
<h5>प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत केंद्र सरकार खेत से अनाज को सही तरीके से दुकानों तक पहुंचाने के प्रबंधन और आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण में मदद करती है। इसके अलावा, इस योजना के माध्यम से सरकार किसानों को अपने पैदावार को सही तरीके से बेचने का प्रबंधन करती है। वहीं, इस योजना की मदद से भारत में फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र के विकास को तेजी मिली है। इससे किसानों के लिए नये रोजगार के अवसर भी मिले हैं। मालूम हो कि प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना को आगे बढ़ाने और इसके बेहतर कार्यन्वयन के लिए केंद्र सरकार ने योजना के तहत 4600 करोड़ रूपये का बजट निर्धारित किया है।</h5>
<h2>Pradhanmantri Kisan Sampada Yojana के जरूरी दस्तावेज</h2>
<h5>पीएम किसान संपदा योजना में आवेदन के लिए आवेदक के पास आधार कार्ड, राशन कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आयु प्रमाण पत्र, ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर और पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ आदि होना जरूरी है। इसके अलावा कई और दस्तावेज़ की भी जरूरत होती है। जरूरी दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया के बारे में अधिक जानकारी के लिए <a href="https://www.mofpi.gov.in/Schemes/how-apply-documents-required">लिंक</a> पर क्लिक करें।</h5>
<h2>प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना योजना का उद्देश्य</h2>
<h5>जो भी कृषि उपज हो रही है, उसकी बर्बादी को कम करना<br />
प्रोसेसिंग लेवल को बढ़ाने से प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देना<br />
एकीकृत कोल्ड चेन यानी फसल फार्म गेट से सीधे रिटेल आउटलेट तक कुशल सप्लाई करना<br />
फूड प्रोसेसिंग और संरक्षण क्षमताओं का निर्माण या विस्तार होगा<br />
खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण करना</h5>
<p>The post <a href="https://thecsrjournal.in/know-details-of-pm-kisan-sampada-yojana-union-budget-hindi/">क्या है प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, जिसका बजट में है जिक्र</a> appeared first on <a href="https://thecsrjournal.in">The CSR Journal</a>.</p>
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