RSS का संगठनात्मक ढांचा बदलेगा: 11 क्षेत्र घटकर 9 होंगे, 46 प्रांतों से बनेंगे करीब 90 संभाग

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अपने संगठनात्मक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रहा है। इस बदलाव में 11 क्षेत्रों को घटाकर 9 करने और नए संभाग बनाने की योजना है। सूत्रों के अनुसार, RSS के मौजूदा 46 प्रांतों को फिर से व्यवस्थित कर लगभग 90 संभाग बनाए जाएंगे। यह पहली बार है जब RSS राज्य स्तर पर संगठनात्मक इकाइयां बनाएगा, जिसमें केवल राज्य प्रचारक और राज्य कार्यवाह शामिल होंगे। इस नई व्यवस्था में राज्य संघचालक का पद नहीं होगा, जो कि एक बड़ा परिवर्तन है।

ABKM की महत्वपूर्ण बैठक

RSS की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल (ABKM) की वार्षिक बैठक 2 से 4 नवंबर तक मध्यप्रदेश के इंदौर में होगी। इस तीन दिवसीय बैठक में संगठन के पुनर्गठन, शताब्दी वर्ष की गतिविधियों और विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। यह बैठक RSS के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जहां संगठन की दिशा और रणनीतियों पर विचार किया जाएगा।

विकेंद्रीकरण की दिशा में कदम

प्रस्तावित बदलावों का मुख्य उद्देश्य RSS के कामकाज को विकेंद्रीकृत करना है। इसके तहत जिम्मेदारियों को अधिक प्रभावी ढंग से बांटने और विभिन्न स्तरों पर तालमेल को बेहतर बनाने की योजना है। अधिक संख्या में संभाग बनने से संगठनात्मक गतिविधियों का प्रबंधन आसान होने की उम्मीद है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रमों को लागू करने में भी मदद मिलेगी।

नई बैठक व्यवस्था

RSS की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली संस्था, अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक अब हर साल नहीं होगी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यह बैठक हर तीन साल में नागपुर में आयोजित की जाएगी। क्षेत्रीय स्तर की बैठकें हर दो साल में होंगी। इन बदलावों का उद्देश्य क्षेत्रों, संभागों और राज्य स्तर की इकाइयों के बीच तालमेल को मजबूत करना है। यह बदलाव RSS के प्रशासनिक और संगठनात्मक ढांचे में बड़ा पुनर्गठन लाएगा।

इंदौर में होने वाली ABKM बैठक

इंदौर में होने वाली ABKM बैठक में RSS प्रमुख मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और सभी छह सह-सरकार्यवाह शामिल होंगे। इसके अलावा, सभी अखिल भारतीय विभागों के प्रमुख और संगठन की कार्यकारी संस्था के सदस्य भी बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक RSS के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकती है।

संघ के भविष्य की दिशा

RSS के नए संगठनात्मक ढांचे के तहत, राज्य स्तर पर केवल राज्य प्रचारक और राज्य कार्यवाह होंगे। इससे संगठन की गतिविधियों में अधिक स्पष्टता और जिम्मेदारी आएगी। यह बदलाव संघ के कामकाज को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संगठन की इस नई व्यवस्था से कार्यकर्ताओं को अपने कार्यों में अधिक स्वतंत्रता और जिम्मेदारी मिलेगी।

संघ की शताब्दी वर्ष की गतिविधियाँ

बैठक में शताब्दी वर्ष की गतिविधियों की समीक्षा भी की जाएगी। RSS के शताब्दी वर्ष के अवसर पर कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। यह बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जिससे संघ की गतिविधियों को और भी मजबूती मिलेगी।

नए बदलावों की चुनौतियाँ

हालांकि, नए बदलावों के साथ कुछ चुनौतियाँ भी होंगी। संगठन के कार्यकर्ताओं को नए ढांचे के अनुसार खुद को ढालना होगा। इसके अलावा, नए संभागों और क्षेत्रों के बीच तालमेल बनाए रखना भी एक चुनौती होगी। लेकिन संघ का मानना है कि यह बदलाव संगठन को और मजबूत बनाएगा।

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