Maharashtra Drought Relief: महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों को बड़ी राहत! चारा-पानी से लेकर ₹5,000 की सहायता तक, सरकार के अहम फैसले

The CSR Journal Magazine
Maharashtra Drought Relief: महाराष्ट्र में सूखे की समस्या से जूझ रहे किसानों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को राहत देने के लिए राज्य सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। राजस्व मंत्री और सूखा राहत उपायों के लिए गठित मंत्रिमंडलीय उपसमिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पशुओं के लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराया जाए और लोगों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत की जाए। सरकार ने चारा खरीद, चारा उत्पादन, बंद पड़ी नल जल योजनाओं को दोबारा शुरू करने और किसानों को आर्थिक सहायता देने से जुड़े प्रस्तावों पर निर्णय लिया है।
मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में यह भी तय किया गया कि केवल बिजली कनेक्शन या बकाया बिजली बिल के कारण बंद पड़ी जलापूर्ति योजनाओं को फिर से चालू करने के लिए जिला योजना समितियों के माध्यम से धन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही सूखे से प्रभावित नए क्षेत्रों को राहत के दायरे में लाने की मांग पर भी विचार किया जाएगा।

Maharashtra Drought Relief: सूखाग्रस्त क्षेत्रों में चारे की कमी दूर करने की तैयारी

महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। यह समिति चारा खरीदने, उसकी खेती कराने, परिवहन और दूसरे जिलों से चारा मंगाने की व्यवस्था करेगी। समिति के कामकाज की निगरानी के लिए भी अलग व्यवस्था की गई है।
सरकार ने चारा खरीद और वितरण के लिए निर्धारित दरें भी तय की हैं। सूखे चारे का भाव 12 रुपये प्रति किलोग्राम और हरे चारे का भाव 8 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया है। चारे को जरूरतमंद क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन पर होने वाले खर्च की व्यवस्था करने के निर्देश भी जिला कलेक्टरों को दिए गए हैं।
इसके अलावा वन विभाग, राजस्व विभाग, जल संसाधन विभाग और मृदा एवं जल संरक्षण विभाग की उपलब्ध सरकारी जमीनों पर चारा उगाया जा सकेगा। इसके लिए जिला योजना समितियों के माध्यम से धन उपलब्ध कराया जाएगा। सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी जिलों में उपलब्ध अतिरिक्त चारा दूसरे सूखाग्रस्त जिलों में भेजने की भी योजना है।

Maharashtra Drought Relief: बंद पड़ी नल जल योजनाएं फिर होंगी शुरू

सरकार ने उन नल जलापूर्ति योजनाओं को दोबारा शुरू करने पर जोर दिया है, जो पानी उपलब्ध होने के बावजूद बिजली कनेक्शन कटने या बिजली बिल बकाया होने के कारण बंद हैं। ऐसी योजनाओं को चालू करने के लिए जिला योजना समितियों के माध्यम से धन उपलब्ध कराया जाएगा।
फिलहाल जिन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता के बावजूद टैंकरों से जलापूर्ति करनी पड़ रही है, वहां बिजली कनेक्शन बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं। चारा उत्पादन के लिए चुनी गई जगहों पर जरूरत के अनुसार अस्थायी बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे उपलब्ध जल स्रोतों का बेहतर इस्तेमाल करने और टैंकरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

₹5,000 की अग्रिम सहायता के लिए पात्रता तय

सूखाग्रस्त किसानों को दी जाने वाली 5,000 रुपये की अग्रिम सहायता के लिए पात्रता के मानदंड तय किए गए हैं। उपसमिति के फैसले के अनुसार, आयकर भरने वाले किसान, सरकार से वेतन लेने वाले अधिकारी और कर्मचारी तथा जनप्रतिनिधि इस सहायता के पात्र नहीं होंगे। हालांकि, यह सहायता किन अन्य शर्तों के अधीन मिलेगी और किसानों को इसके लिए किस प्रक्रिया से गुजरना होगा, इसकी जानकारी संबंधित सरकारी आदेशों के अनुसार देखी जानी चाहिए।

304 सूखाग्रस्त तालुकों के अलावा नए क्षेत्र भी हो सकते हैं शामिल

महाराष्ट्र में अब तक 304 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है। पुणे, पालघर, रायगढ़ और कोल्हापुर सहित कई जिलों के कुछ अतिरिक्त क्षेत्रों को भी सूखे की राहत सूची में शामिल करने की मांग उठी है। संबंधित जिला कलेक्टरों ने प्राथमिक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। सरकार अब वास्तविक क्षेत्रीय निरीक्षण और अंतिम रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने पर निर्णय लेगी। मदद एवं पुनर्वास मंत्री मकरंद जाधव-पाटील ने भी कहा कि नए क्षेत्रों पर निर्णय लेते समय तालुकों के अंतर्गत आने वाले सर्कल में हुई बारिश का आकलन किया जाना चाहिए। जिला कलेक्टरों की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

तालाबों की गाद हटाने पर रॉयल्टी में छूट

सरकार ने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए तालाबों की गहराई बढ़ाने से जुड़े फैसले भी लिए हैं। जल संरक्षण और जल संसाधन विभाग के तालाबों से निकली मिट्टी, गाद और मुरुम का इस्तेमाल सड़क निर्माण में किए जाने पर रॉयल्टी नहीं वसूली जाएगी।
निजी व्यक्तियों को भी निर्धारित दरों के अनुसार जल संरक्षण तालाबों और गांव के तालाबों की गाद निकालने तथा गहराई बढ़ाने के काम में प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे जल भंडारण क्षमता बढ़ाने, खेतों में मिट्टी के उपयोग और जमीन के समतलीकरण में मदद मिल सकती है।

खेती, ग्रामीण सड़कें और मत्स्य उत्पादन पर भी ध्यान

सरकार ने शेतरास्तों और पाणंद सड़कों के निर्माण में आने वाली वित्तीय बाधाओं को दूर करने का फैसला किया है। यदि कुशल और अकुशल श्रम के लिए निर्धारित 60:40 अनुपात के कारण धन की कमी होती है, तो जिला योजना समिति के माध्यम से अतिरिक्त राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इससे ग्रामीण और कृषि संपर्क मार्गों के काम रुकने से बच सकते हैं।
इसके अलावा मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए मत्स्य बीज उपलब्ध कराने पर भी जिला योजना समितियों के माध्यम से धन खर्च किया जाएगा। सरकार ने सूखा राहत संबंधी योजनाओं का लाभ पात्र आदिवासी क्षेत्रों के किसानों और सामाजिक न्याय विभाग के लाभार्थियों तक भी पहुंचाने का निर्णय लिया है। बैठक में आपदा प्रबंधन, कृषि, पशुसंवर्धन, मृदा एवं जल संरक्षण, जलापूर्ति, सहकारिता, मत्स्य व्यवसाय और ग्रामीण विकास सहित विभिन्न विभागों के मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
सरकार के इन फैसलों का मुख्य उद्देश्य सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पानी और चारे की कमी दूर करना, किसानों को राहत देना और ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। अतिरिक्त तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित करने का अंतिम फैसला क्षेत्रीय निरीक्षण और रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।

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