AI-Proof प्रोफेशन्स की पहचान करेगा वाणिज्य मंत्रालय

The CSR Journal Magazine
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच, भारत सरकार भविष्य के रोजगार और कौशल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति तैयार कर रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि मंत्रालय को ऐसे पेशों की पहचान करने के लिए कहा गया है, जिन पर AI का कम असर पड़ेगा। यह पहल उन क्षेत्रों पर केंद्रित है, जहां तकनीक इंसानों की जगह नहीं लेगी, बल्कि उनकी कार्यक्षमता बढ़ाएगी।

AI-Proof प्रोफेशन्स की पहचान

गोयल ने स्पष्ट किया कि भारत की विशाल आबादी और रोजगार की जरूरतों को देखते हुए, यह पहल महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय को ऐसे पेशों की पहचान करनी चाहिए जो AI के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद मानव श्रम और रचनात्मकता के कारण प्रासंगिक बने रह सकते हैं। इस दिशा में कदम उठाना आवश्यक है, ताकि भविष्य में रोजगार की संभावनाएं सुरक्षित रह सकें।

हस्तशिल्प और हथकरघा में संभावनाएं

गोयल ने हस्तशिल्प और हथकरघा जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया, जहां भारत वैश्विक स्तर पर नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में भारतीय कारीगरों का अनुभव और सांस्कृतिक विरासत देश की ताकत है। AI इन उद्योगों में डिजाइन तैयार करने और बाजार के रुझानों को समझने में मदद कर सकता है, लेकिन मानवीय कौशल की भूमिका बनी रहेगी।

कला और पर्यटन में अवसर

वाणिज्य मंत्री ने कला और पर्यटन को भी ऐसे क्षेत्रों में शामिल किया, जहां भारत अपनी विशेष क्षमताओं के आधार पर आगे बढ़ सकता है। भारत की सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक स्थलों की पहचान को बढ़ावा देने के लिए AI का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन स्थानीय अनुभव और सांस्कृतिक समझ की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

140 करोड़ लोगों के भविष्य पर जोर

गोयल ने कहा कि भारत के पास ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहां देश की विशेष क्षमताओं को विकसित करके लोगों के जीवन स्तर में सुधार किया जा सकता है। यह दृष्टिकोण रोजगार सृजन, कौशल विकास और छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है। भारत की युवा आबादी को देखते हुए, शिक्षा और ट्रेनिंग व्यवस्था को उद्योगों की बदलती मांग के साथ जोड़ना आवश्यक है।

सरकार और निजी क्षेत्र का सहयोग

जब गोयल से पूछा गया कि इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए क्या विशेष प्रोत्साहन दिए जाएंगे, तो उन्होंने कहा कि यह प्रयास केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं होगा। कुछ पहल प्राइवेट सेक्टर के नेतृत्व में होंगी। AI से जुड़ी चुनौतियों का समाधान केवल एक नीति से नहीं निकलेगा, बल्कि उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और सरकार के बीच समन्वय की आवश्यकता होगी।

विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की वापसी

गोयल ने जर्मनी में भारतीय शोधकर्ताओं को भारत लौटकर देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें यह समझने की जरूरत है कि भारतीय पेशेवरों को भारत में काम करने के लिए किस प्रकार की सहायता की आवश्यकता होगी।

प्रतिभा की वापसी के लिए बेहतर रिसर्च इकोसिस्टम

गोयल ने कहा कि प्रतिभाशाली पेशेवरों को वापस लाने का मामला केवल आर्थिक लाभ तक सीमित नहीं है। इसके लिए एक सक्षम वातावरण और सहयोगी इकोसिस्टम का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने सरकारी और निजी संस्थानों के बीच साझेदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारतीय स्टूडेंट्स की उत्सुकता

गोयल ने जर्मनी में पढ़ रहे भारतीय स्टूडेंट्स का उल्लेख करते हुए कहा कि उनमें से कई भारत लौटकर देश की आर्थिक प्रगति में योगदान देने के लिए उत्सुक हैं। आंकड़ों के अनुसार, जर्मनी में भारतीय मूल के लगभग 3.3 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से 60,000 से 70,000 भारतीय स्टूडेंट्स हैं।

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