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	<title>Students Councelling Needs Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>हर मेडिकल कॉलेज में बनेगा वेलबीइंग सेंटर, राज्य स्तर पर गठित होगी वेलनेस सेल</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/a-wellbeing-center-established-every-medical-college-state-level-wellness-cell-formed-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Swapna Sarita Mohanty]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 09 Feb 2026 12:17:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मेडिकल छात्रों के बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए राजस्थान सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के हर मेडिकल कॉलेज में वेलबीइंग सेंटर स्थापित होंगे और राज्य स्तर पर वेलनेस सेल का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य मेडिकल शिक्षा को संवेदनशील बनाते हुए छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त करना है। मेडिकल छात्रों [&#8230;]</p>
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<h5 dir="ltr">मेडिकल छात्रों के बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए राजस्थान सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के हर मेडिकल कॉलेज में वेलबीइंग सेंटर स्थापित होंगे और राज्य स्तर पर वेलनेस सेल का गठन किया जाएगा। इसका उद्देश्य मेडिकल शिक्षा को संवेदनशील बनाते हुए छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को सशक्त करना है।</h5>
<h2 dir="ltr">मेडिकल छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर सरकार का फोकस</h2>
<h5 dir="ltr">चिकित्सा शिक्षा को केवल अकादमिक नहीं, बल्कि मानवीय और संवेदनशील बनाने की दिशा में यह पहल की गई है। चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने बताया कि मेडिकल पढ़ाई अत्यंत दबावपूर्ण होती है, ऐसे में छात्रों को मानसिक संबल देना सरकार की प्राथमिकता है। नेशनल टास्क फोर्स की रिपोर्ट के आधार पर संस्थानों में संरचनात्मक सुधार किए जाएंगे।</h5>
<h2 dir="ltr">हर कॉलेज में वेलबीइंग सेंटर और डीन (मेंटल वेलबीइंग)</h2>
<h5 dir="ltr">प्रदेश के प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में एक समर्पित वेलबीइंग सेंटर स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही डीन (मेंटल वेलबीइंग) की नियुक्ति होगी, जो छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की निगरानी करेंगे। छात्रों और फैकल्टी के लिए नियमित ओरिएंटेशन और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।</h5>
<h2 dir="ltr">सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और ग्रिवांस रिडरेसल सिस्टम मजबूत</h2>
<h5 dir="ltr">कॉलेज और हॉस्टल परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ की जाएगी। छतों की बैरिकेडिंग, प्रभावी निगरानी तंत्र और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक विशेष स्टूडेंट ऐप विकसित होगा। इसी के माध्यम से ग्रिवांस रिडरेसल सिस्टम को मजबूत किया जाएगा। साथ ही ई-लाइब्रेरी और डिजिटल संसाधनों के विस्तार पर भी जोर रहेगा।</h5>
<h2 dir="ltr">सहयोग, काउंसलिंग और तनावमुक्त माहौल पर जोर</h2>
<h5 dir="ltr">मानसिक सहयोग के लिए सहकर्मी सहायता समूह, करियर काउंसलिंग और पूर्व छात्रों के अनुभव साझा करने की व्यवस्था की जाएगी। योग सत्र, खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों को नियमित किया जाएगा। संकट की स्थिति में टेली-मानस हेल्पलाइन का व्यापक प्रचार होगा। इसके साथ ही हॉस्टलों में बेहतर सुविधाएं, ड्यूटी डॉक्टरों के लिए 24 घंटे कैंटीन और कार्यभार संतुलन जैसे कदम भी लागू किए जाएंगे।</h5>
<h5>सरकार का स्पष्ट संदेश है कि लक्ष्य केवल कुशल डॉक्टर तैयार करना नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत चिकित्सक बनाना है, जो बेहतर ढंग से समाज की सेवा कर सकें।</h5>
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		<title>छात्र ने की आत्महत्या, तीन दिन कमरे में पड़ा रहा शव, मौत का कुआं बन रहा IIT कानपुर</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/maximum-numbers-students-suicide-iit-kanpur-raised-quations-institute-management-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Oct 2025 09:06:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
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		<category><![CDATA[Students Councelling Needs]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>IIT कानपुर में बीटेक फाइनल ईयर के छात्र की आत्महत्या ने सबको झकझोर दिया। तीन दिन तक उसका शव हॉस्टल के कमरे में पड़ा रहा। किसी को भनक तक नहीं लगी। छात्र के कमरे से जब बदबू आने लगी, अगल-बगल के कमरे में रहने वाले छात्रों को वारदात के बारे में पता चला। इससे प्रबंधन [&#8230;]</p>
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<h5>IIT कानपुर में बीटेक फाइनल ईयर के छात्र की आत्महत्या ने सबको झकझोर दिया। तीन दिन तक उसका शव हॉस्टल के कमरे में पड़ा रहा। किसी को भनक तक नहीं लगी। छात्र के कमरे से जब बदबू आने लगी, अगल-बगल के कमरे में रहने वाले छात्रों को वारदात के बारे में पता चला। इससे प्रबंधन में हड़कंप मच गया।</h5>
<h2>IIT कानपुर के छात्र धीरज सैनी ने की आत्महत्या</h2>
<h5>IIT कानपुर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र धीरज सैनी (22) ने फंदा लगाकर जान दे दी। उसका शव बुधवार को पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़कर बाहर निकाला। वह रविवार की रात से छात्रावास में दिखाई नहीं दिया था। उसके कमरे से बदबू आने पर संस्थान प्रशासन ने पुलिस को सूचना दी थी। छात्र के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस प्रथमदृष्टया खुदकुशी का कारण अवसाद में रहना मान रही है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। तीन दिन तक उसका शव हॉस्टल के कमरे में पड़ा रहा। किसी को भनक तक नहीं लगी। जब बदबू आने लगी तक अगल-बगल के कमरे में रहने वाले छात्रों को वारदात के बारे में पता चला। इससे प्रबंधन में हड़कंप मच गया।</h5>
<h2>I<a href="https://www.iitk.ac.in/">IT कानपुर में दो साल में सातवीं घटना </a></h2>
<h5>धीरज की मौत पिछले दो साल में IIT कानपुर में सातवीं छात्र आत्महत्या है। इन घटनाओं के बावजूद संस्थान का दावा है कि हर छात्र की काउंसलिंग की जाती है। उनकी निगरानी की जाती है। लेकिन लगातार हो रही आत्महत्याएं दिखाती हैं कि काउंसलिंग और प्रशासनिक निगरानी केवल दावे तक ही सीमित रह गई हैं। हरियाणा के रहने वाले सतीश सैनी का बेटा धीरज सैनी, 22 वर्षीय बीटेक फाइनल ईयर का छात्र, केमिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई कर रहा था। वह IIT कानपुर के हॉस्टल नंबर-1 में अकेले कमरे में रहता था। उसके साथियों ने उसके कुछ दिनों से गुमसुम रहने की जानकारी दी। किन कारणों से गुमसुम था, इसका पता लगाया जा रहा है।</h5>
<h2>तीन दिन बाद खुला दरवाजा, न सुसाइड नोट, न कोई सुराग</h2>
<h5>बुधवार की सुबह धीरज सैनी के कमरे से तेज बदबू आने लगी। पहले पास के कमरे में रहने वाले छात्रों ने कुछ और सोचा, फिर जब बदबू और अधिक बढ़ गई तो उन्हें अंदेशा हुआ कि कुछ गंभीर है। धीरज के फंदा लगाने के 48 घंटे हो जाने से उसकी बॉडी डिकम्पोज हो रही थी। उसके शरीर से खून और पानी बहकर कमरे की फर्श और दरवाजे तक आ गया। बुधवार की सुबह अन्य छात्रों को कमरे से बाहर रिसता खून नजर आया। यह देखकर अनहोनी की आशंका से छात्र भयभीत हो गए। हॉस्टल प्रशासन और पुलिस को सूचना दी गई। जब कमरे का दरवाजा खोला गया, तो सामने का नजारा देखकर सबके होश उड़ गए। कमरे में धीरज का शव पड़ा था। दावा किया जा रहा है कि यह घटना कम से कम तीन दिन पहले हुई थी। धीरज के कमरे में कोई भी सुसाइड नोट नहीं मिला। एसीपी रंजीत कुमार का कहना है कि प्रारंभिक अनुमान के अनुसार छात्र ने तीन दिन पहले अपनी जान ली होगी। पोस्टमार्टम के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट होंगे। इस रहस्यमय अंत ने परिवार और सहपाठियों को हिला कर रख दिया। कोई नहीं जानता कि तीन दिन तक क्यों कोई हॉस्टल स्टाफ या साथी छात्र उसकी ओर ध्यान नहीं दे पाए।</h5>
<h2>परिवार का दर्द, दिसम्बर में घर आने वाला था धीरज</h2>
<h5>सतीश सैनी और उनके परिवार के लिए यह सदमे से कम नहीं। पिता सतीश ने बताया कि  हमारे बेटे के साथ ऐसा हुआ और हमें इसका पता तीन दिन तक नहीं चला। सतीश सैनी ने बताया कि बेटे ने उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी नहीं बताई थी। उसने दिसंबर में छुट्टियां होने पर घर आने की जानकारी दी थी। पांच दिन पहले बेटी मोनिका ने उसे कॉल की लेकिन उसने पढ़ाई में व्यस्त बताकर ज्यादा बात नहीं की थी। बाद में बात करने के लिए कहा था। सतीश के मुताबिक बेटे ने उन्हें मार्च में नौकरी मिलने व जनवरी से कैंपस में कंपनियों के इंटरव्यू के लिए आने की बात बताई थी। धीरज ने छठवीं से हाईस्कूल तक हरियाणा के हैप्पी स्कूल से पढ़ाई की। वहां उसकी तीन लाख फीस जमा न होने पर स्कूल प्रबंधन ने उसकी हाईस्कूल की सर्टिफिकेट रोक ली थी। किसी तरह चाचा संदीप ने लोगों से उधार लेकर 1.50 लाख रुपए स्कूल में जमा किए थे। तब उसकी सर्टिफिकेट स्कूल प्रबंधन ने दी थी।</h5>
<h2>धीरज को क्रिकेट का था शौक</h2>
<h5>वीडियोग्राफी के बीच धीरज सैनी का पोस्टमार्टम किया गया। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे धीरज सैनी के ताऊ सत्येंद्र का कहना था कि मेरा बच्चा बहुत आरक्षित प्रकृति का था। ताऊ का कहना था कि आखिरी बार वह मई में घर आया था। वह बहुत ही अच्छा एथलीट था, पढ़ाई के अलावा उसे क्रिकेट का शौक था। वह IIT क्रिकेट टीम का वाइस कैप्टन भी था।</h5>
<h2>छात्र आत्महत्या के बढ़ते मामले चिंताजनक</h2>
<h5>यह कोई पहला मामला नहीं है जबकि IIT कानपुर के किसी छात्र ने जान दी हो। इससे पहले भी कई छात्र आत्महत्या कर चुके हैं। अब यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आखिर इसकी वजह स्टडी प्रेशर है या कुछ और? इस पर कोई बोलने को तैयार नहीं। दरअसल, पिछले कुछ समय से IIT Kanpur में छात्र छात्राओं के आत्महत्या का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। साल 2024 में भी कई मामले सामने आए थे। अब साल 2025 में भी एक के बाद एक छात्र जिंदगी छोड़ मौत को गले लगा रहे हैं। इस साल की शुरुआत में ही पीएचडी कर रहे एक छात्र ने अपने कमरे में एक सुसाइड नोट लिखकर फंदा लगा जान दे दी थी। अब बंद कमरे में एक छात्र का शव तीन दिन से फंदे से लटका था लेकिन इसकी जानकारी IIT प्रशासन को हुई,  न छात्रों को। बदबू आने पर कमरा खोलकर देखा गया तो छात्र का शव फंदे से लटक रहा था। वहीं, फरवरी में शोधार्थी अंकित ने आत्महत्या की थी।</h5>
<h2>काउंसलिंग विशेषज्ञ 24/7 उपलब्ध-IIT प्रशासन का दावा</h2>
<h5>IIT प्रशासन ने 24 घंटे आनलाइन हेल्पलाइन चालू रखने के साथ विशेषज्ञ काउंसलर किए हैं। IIT कानपुर में पिछले वर्षों में आत्महत्या के मामले बढ़े हैं। छात्र हो या कर्मचारी, किसी न किसी वजह से आत्महत्या कर रहा है। हालांकि IIT प्रशासन इन मामलों की रोकथाम के लिए सजग होने का दावा करता है। संस्थान में विद्यार्थियों व कर्मचारियों के लिए 24 घंटे में किसी भी समय काउंसलिंग करने के लिए विशेषज्ञ काउंसलर नियुक्त हैं। आनलाइन हेल्पलाइन की व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित है। संस्थान में मनोचिकित्सक व मनोवैज्ञानिक की नौ सदस्यीय टीम 24 घंटे काउंसलिंग के लिए रहती है। छात्रों, शिक्षकों, छात्रावास व अन्य को लगातार Prevention Of India Foundation के माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाता है। 30 स्नातक विद्यार्थियों पर नियुक्त फैकल्टी सलाहकार समय-समय पर काउंसलिंग करके विद्यार्थियों, कर्मचारियों के मानसिक स्तर का आकलन करके उन्हें उचित परामर्श प्रदान करते हैं। अब ऐसे में इतनी सारी व्यवस्थाएं होने के बाद भी एथलीट और बीटेक छात्र धीरज सैनी के आत्महत्या के प्रकरण ने IIT की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला दिया है।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/depression-psychiatrist-sagar-mundada-exclusive-interview/">मैं क्विट कर रहा हूं- IIT कानपुर में पीएचडी छात्र अंकित ने की आत्महत्या</a></h2>
<h5>नोएडा के जागृति अपार्टमेंट सेक्टर 71 के रहने वाले रामसूरत यादव का बेटा अंकित यादव IIT कानपुर में केमिस्ट्री से पीएचडी कर रहा था। अंकित ने यूजीसी फोलोशिप के तहत जुलाई 2024 में दाखिला लिया था। वह हॉस्टल के रूम नंबर एच 103 में रहता था। 11 फरवरी 2025 की शाम को हॉस्टल के कमरे से अंकित बाहर नहीं निकला। साथियों के फोन मिलाने पर मोबाइल भी नहीं उठा। खिड़की से कमरे के भीतर झांक कर देखा तो अंकित पंखे में नायलॉन की रस्सी के सहारे झूलता मिला। IIT प्रशासन को सूचना देने के बाद छात्रों ने दरवाजे को तोड़कर अंकित को फंदे से उतारा। उसे कैंपस में बने हॉस्पिटल में लेकर पहुंचाया, जहां डॉक्टरों से मृत घोषित कर दिया। कमरे से मिले सुसाइड नोट में अंकित ने लिखा कि मैं क्विट कर रहा हूं। यह मेरा अपना निर्णय है। इसमें और कोई शामिल नहीं है। हालांकि पुलिस को परिजनों और साथियों से बातचीत के बाद भी सुसाइड का स्पष्ट कारण नहीं मिल सका। पुलिस की प्राथमिक जांच में छात्र के डिप्रेशन में होने की बात पता चली। हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पूछताछ में साथियों ने बताया कि अंकित दो-तीन दिनों से गुमसुम सा रह रहा था। वह अपने साथियों से भी ज्यादा बात नहीं कर रहा था।</h5>
<h2>विकास के सुसाइड से उठे सवाल</h2>
<h5>11 जनवरी 2024 को मेरठ निवासी एमटेक छात्र विकास मीणा ने आत्महत्या की थी। विकास के कमरे से पुलिस को जो सुसाइड नोट मिला था, जिसमें लिखा था कि उसका अकादमिक प्रदर्शन बेहतर न होने के चलते उसने यह कदम उठाया था। उस समय IIT के प्रशासनिक अफसरों ने दावा किया था कि वह कैंपस का माहौल बेहतर बनाएंगे। लेकिन घटना के एक सप्ताह बाद ही 18 जनवरी 2024 को झारखंड निवासी पीएचडी छात्रा प्रियंका जायसवाल ने आत्महत्या कर ली। इससे साफ है कि IIT छात्रों को वह बेहतर माहौल नहीं दे सका, जिसकी छात्रों को जरूरत है।</h5>
<h2><a href="https://thecsrjournal.in/supreme-court-why-are-so-many-students-dying-by-suicide-in-kota/">अवसाद,अकेलापन और पढ़ाई के दबाव में जान दे रहे मेधावी छात्र </a></h2>
<h5>19 दिसंबर 2023 को ओडिशा के कटक निवासी 34 वर्षीय पल्लवी चिल्का ने बतौर शोध फैकल्टी सदस्य के रूप में काम करते आत्महत्या कर ली। पल्लवी ने अगस्त में ही उसी साल अगस्त में IIT कानपुर में ज्वाइनिंग ली थी। डा. पल्लवी आइआइटी जैविक विज्ञान व बायो इंजीनियरिंग विभाग से जुड़ी थी।</h5>
<h5>11 अक्टूबर 2024 को मूलरूप से उरई निवासी वर्तमान में चकेरी के सनिगवां में रहने वाली पीएचडी छात्रा प्रगति खायरा कैंपस में ही आत्महत्या कर ली थी। प्रगति ने पांच पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा था। हालांकि उसमें उसने किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया था। प्रगति ने अकेलेपन की वजह से आत्मघाती कदम उठाया था।</h5>
<h5>11 जनवरी 2024 को मेरठ निवासी एमटेक छात्र विकास मीणा ने आत्महत्या की थी। विकास के कमरे से पुलिस को जो सुसाइड नोट मिला था, जिसमें लिखा था कि उसका अकादमिक प्रदर्शन बेहतर न होने के चलते उसने यह कदम उठाया था। उस समय IIT के प्रशासनिक अफसरों ने दावा किया था कि वह कैम्पस का माहौल बेहतर बनाएंगे। लेकिन माहौल उतना बेहतर न हो सका जितने की छात्रों को जरूरत है।</h5>
<h5>18 जनवरी 2024 को कैंपस में झारखंड निवासी पीएचडी छात्रा प्रियंका जायसवाल ने आत्महत्या कर ली थी। प्रियंका 29 दिसंबर 2023 को IIT कानपुर पहुंची थी और महज 21 दिनों बाद ही प्रियंका ने कैंपस में आत्महत्या कर ली थी।</h5>
<h5>तीन मई 2006 को छात्र शैलेश कुमार शर्मा ने दी थी जान।</h5>
<h5>25 अप्रैल 2007 को जे भारद्वाज ने की थी आत्महत्या।</h5>
<h5>12 अप्रैल 2008 को छात्र प्रशांत कुमार कुरील ने की आत्महत्या।</h5>
<h5>30 मई 2008 को छात्र टोया चटर्जी ने दी जान।</h5>
<h5>तीन जनवरी 2009 को एमटेक छात्र जी सुमन ने आत्महत्या की।</h5>
<h5>19 अप्रैल 2018 को फिरोजाबाद की पीएचडी छात्र भीम सिंह ने दी जान।</h5>
<h5>सात सितंबर 2022 को वाराणसी की पीएचडी छात्र प्रशांत ने दी जान!</h5>
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