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	<title>Snapdeal Archives - The CSR Journal</title>
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		<title>नकली Woodland बेल्ट-वॉलेट के 2019 के विवाद में आमिर खान को नोटिस</title>
		<link>https://thecsrjournal.in/aamir-khan-served-notice-alleged-online-fake-woodland-products-case-hindi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Anju Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 08 Aug 2026 12:18:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Header News]]></category>
		<category><![CDATA[National News]]></category>
		<category><![CDATA[हिन्दी मंच]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>2019 के मामले में आमिर खान को18 सितंबर को पेश होने का आदेश, शिकायतकर्ता का आरोप- ऑनलाइन मंगाए Woodland बेल्ट और वॉलेट जांच में निकले कथित नकली ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर ब्रांडेड सामान की बिक्री और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट को लेकर एक पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राजस्थान के कोटा जिला उपभोक्ता विवाद [&#8230;]</p>
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<h2>2019 के मामले में आमिर खान को18 सितंबर को पेश होने का आदेश, शिकायतकर्ता का आरोप- ऑनलाइन मंगाए Woodland बेल्ट और वॉलेट जांच में निकले कथित नकली</h2>
<h5>ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर ब्रांडेड सामान की बिक्री और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट को लेकर एक पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। राजस्थान के कोटा जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में चल रहे कथित नकली उत्पाद बिक्री से जुड़े मामले में बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान को नोटिस जारी किया गया है। आयोग ने आमिर खान समेत तीन संबंधित पक्षों को आगामी 18 सितंबर 2026 को अपना पक्ष रखने के लिए पेश होने का निर्देश दिया है।</h5>
<h2>2019 में ऑनलाइन शॉपिंग का मामला</h2>
<h5>यह मामला वर्ष 2019 में किए गए एक ऑनलाइन ऑर्डर से शुरू हुआ था। शिकायतकर्ता अधिवक्ता इंद्रमोहन सिंह ‘हनी’ ने आरोप लगाया था कि उन्होंने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म Snapdeal पर Woodland ब्रांड के बेल्ट और वॉलेट का विज्ञापन देखा और इसके बाद दोनों उत्पाद ऑनलाइन मंगाए। सामान मिलने के बाद उन्हें उत्पादों की प्रामाणिकता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने उत्पादों को अधिकृत Woodland शोरूम में दिखाया। शिकायत के अनुसार, शोरूम स्तर पर की गई जांच में इन उत्पादों को कथित तौर पर असली Woodland उत्पाद नहीं बताया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने मामले को उपभोक्ता विवाद के रूप में उठाया। 2019 में इस विवाद को लेकर Snapdeal के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की खबरें भी सामने आई थीं। उस समय रिपोर्टों में Snapdeal के संस्थापकों कुणाल बहल और रोहित बंसल के खिलाफ कथित नकली उत्पाद बिक्री को लेकर मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई थी।</h5>
<h2>डुप्लीकेट सामान बेचने पर उठे सवाल</h2>
<h5>उपलब्ध पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने जुलाई 2019 में Snapdeal के माध्यम से Woodland के नाम से बेल्ट और वॉलेट खरीदे थे। उत्पाद मिलने के बाद उन्होंने इसकी प्रामाणिकता को लेकर संबंधित ब्रांड के अधिकृत स्टोर से जांच कराई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि जो सामान उन्हें मिला, वह Woodland के वास्तविक उत्पादों के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के खिलाफ शिकायत की। उस समय नकली ब्रांडेड सामान की ऑनलाइन बिक्री को लेकर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों की जवाबदेही पर भी सवाल उठे थे। खासतौर पर ऐसे मामलों में यह महत्वपूर्ण प्रश्न बनता है कि किसी प्लेटफॉर्म पर किसी विक्रेता द्वारा बेचे जा रहे उत्पाद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है और यदि उपभोक्ता को नकली सामान मिलता है तो उसकी भरपाई तथा जवाबदेही कैसे तय होगी।</h5>
<h2>अब आमिर खान का नाम क्यों आया?</h2>
<h5>मामले में आमिर खान का नाम इसलिए सामने आया है क्योंकि वह उस दौर में Snapdeal के प्रमुख ब्रांड एंबेसडर रहे थे और कंपनी के विज्ञापनों में दिखाई देते थे। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, अब कोटा उपभोक्ता आयोग ने सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और उपभोक्ता विवाद से जुड़े पहलू पर भी संबंधित पक्षों का पक्ष जानने के लिए नोटिस जारी किया है। यहां यह अंतर समझना बेहद जरूरी है कि किसी विज्ञापन में किसी सेलिब्रिटी का दिखाई देना और किसी कथित नकली उत्पाद की बिक्री में उसकी प्रत्यक्ष भूमिका होना दो अलग-अलग बातें हैं।आमिर खान को नोटिस जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि आयोग ने उन्हें दोषी ठहरा दिया है। आयोग आगे संबंधित पक्षों की दलीलें, दस्तावेज और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि मामले में उनकी कोई कानूनी जिम्मेदारी बनती है या नहीं।</h5>
<h2>Snapdeal और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट पर फिर सवाल</h2>
<h5>यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें दो अलग-अलग पहलू एक साथ जुड़े हैं—पहला, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कथित नकली ब्रांडेड उत्पाद की बिक्री और दूसरा, उस प्लेटफॉर्म का सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट। आमिर खान और Snapdeal का व्यावसायिक संबंध नया नहीं है। अभिनेता वर्ष 2015 में कंपनी के ब्रांड एंबेसडर बने थे। बाद में उनके कुछ बयानों को लेकर Snapdeal को राजनीतिक और सोशल मीडिया विवाद का सामना भी करना पड़ा था। 2016 में कंपनी ने उनका कॉन्ट्रैक्ट आगे नहीं बढ़ाया था। हालांकि, मौजूदा उपभोक्ता विवाद 2019 में कथित Woodland उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री से संबंधित है। इसलिए पुराने राजनीतिक या सोशल मीडिया विवाद को वर्तमान उपभोक्ता मामले के साथ जोड़ना उचित नहीं होगा।</h5>
<h2>उपभोक्ता की शिकायत में क्या है मुख्य आरोप?</h2>
<h5>शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने ऑनलाइन विज्ञापन देखकर उत्पादों को ब्रांडेड Woodland सामान समझकर खरीदा था। उपभोक्ता के लिए किसी ब्रांड का नाम, लोगो, तस्वीर और उत्पाद की प्रस्तुति खरीद के फैसले को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण कारक होते हैं। यदि किसी उपभोक्ता को किसी स्थापित ब्रांड के नाम पर उत्पाद बेचा जाता है और बाद में वह नकली पाया जाता है, तो मामला केवल खराब गुणवत्ता वाले सामान की बिक्री तक सीमित नहीं रहता। इसमें उत्पाद की वास्तविक पहचान, विक्रेता की भूमिका, प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी और उपभोक्ता को उपलब्ध कानूनी राहत जैसे प्रश्न भी उठते हैं। इसी वजह से <a href="https://thecsrjournal.in/amazon-delivery-scam-bengaluru-techie-gets-tile-piece-instead-samsung-smartphone-worth-one-lakh-eighty-thousaand-hindi/">ऑनलाइन मार्केटप्लेस</a> पर बिकने वाले ब्रांडेड उत्पादों की प्रामाणिकता को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं।</h5>
<h2>2019 में पुलिस कार्रवाई की भी खबर आई थी</h2>
<h5>इस मामले से संबंधित 2019 की रिपोर्टों में बताया गया था कि शिकायतकर्ता द्वारा कथित नकली Woodland बेल्ट और वॉलेट मिलने की शिकायत के बाद Snapdeal से जुड़े लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई थी। उस समय की रिपोर्ट के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उन्हें प्लेटफॉर्म के माध्यम से नकली ब्रांडेड सामान भेजा गया था और Snapdeal के संस्थापकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, किसी FIR या पुलिस केस का दर्ज होना अपने आप में आरोप साबित होने के बराबर नहीं है। आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होता है।</h5>
<h2>उपभोक्ता आयोग में मामला क्यों महत्वपूर्ण है?</h2>
<h5>भारत में उपभोक्ता संरक्षण कानून का उद्देश्य केवल खराब उत्पाद मिलने पर उपभोक्ता को राहत देना नहीं है, बल्कि अनुचित व्यापार व्यवहार और भ्रामक विज्ञापन जैसे मामलों पर भी कार्रवाई का रास्ता उपलब्ध कराना है। ऑनलाइन खरीदारी में उपभोक्ता अक्सर विक्रेता से सीधे संपर्क में नहीं होता। वह वेबसाइट या ऐप पर दिखाई गई तस्वीर, ब्रांड का नाम, कीमत, विवरण और विज्ञापन के आधार पर निर्णय लेता है। ऐसे में यदि उत्पाद की वास्तविकता विज्ञापन या ऑनलाइन विवरण से अलग निकलती है, तो उपभोक्ता के सामने शिकायत और मुआवजे का सवाल खड़ा होता है।मौजूदा मामले में आयोग यह भी देख सकता है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध हैं तथा संबंधित पक्षों की भूमिका क्या रही।</h5>
<h2>18 सितंबर को क्या होगा?</h2>
<h5>आयोग ने आमिर खान समेत तीन पक्षों को 18 सितंबर 2026 को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है। उस तारीख को संबंधित पक्ष अपने जवाब, दस्तावेज और कानूनी दलीलें प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके बाद आयोग मामले की आगे की सुनवाई करेगा। यह संभव है कि सुनवाई के दौरान विज्ञापन से संबंधित दस्तावेज, उत्पाद की कथित प्रामाणिकता की जांच, ऑनलाइन ऑर्डर का रिकॉर्ड, भुगतान संबंधी जानकारी और संबंधित पक्षों की भूमिका जैसे मुद्दे चर्चा में आएं। फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि 18 सितंबर को ही मामले का अंतिम फैसला आ जाएगा। वह आगे की न्यायिक प्रक्रिया और आयोग के आदेश पर निर्भर करेगा।</h5>
<h2>सेलिब्रिटी विज्ञापन की जिम्मेदारी पर भी बहस</h2>
<h5>इस मामले का एक व्यापक पहलू सेलिब्रिटी विज्ञापन से जुड़ा है। भारत में बड़ी संख्या में उपभोक्ता किसी उत्पाद को खरीदने से पहले उसके विज्ञापन और उसमें दिखाई देने वाले लोकप्रिय चेहरे से प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि भ्रामक विज्ञापनों में सेलिब्रिटी की भूमिका को लेकर पिछले कुछ वर्षों में नियामकीय और कानूनी बहस तेज हुई है। यदि किसी विज्ञापन में किसी उत्पाद के बारे में ऐसा दावा किया जाता है जो बाद में गलत साबित होता है, तो यह सवाल उठता है कि विज्ञापन में दिखाई देने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी किस सीमा तक होनी चाहिए। हालांकि हर मामले में सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी स्वतः तय नहीं होती। यह विज्ञापन की प्रकृति, सेलिब्रिटी की भूमिका, उसके द्वारा किए गए दावे, उपलब्ध जानकारी और संबंधित कानूनों पर निर्भर करता है।</h5>
<h2>आमिर खान के लिए नोटिस का मतलब क्या?</h2>
<h5>मौजूदा स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आमिर खान को नोटिस जारी किया गया है, दोषी घोषित नहीं किया गया है। आयोग उन्हें मामले में अपना पक्ष रखने का अवसर दे रहा है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आयोग उनके खिलाफ शिकायत में लगाए गए आरोपों को किस कानूनी दृष्टिकोण से देखता है। इसी तरह Snapdeal या किसी अन्य संबंधित पक्ष के खिलाफ लगाए गए आरोपों को भी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।</h5>
<h2>ऑनलाइन खरीदारों के लिए क्या सबक?</h2>
<h5>यह मामला <a href="https://thecsrjournal.in/mumbai-nurse-online-shopping-fraud-dress-scam-cyber-crime-hindi/">ऑनलाइन खरीदारी</a> करने वाले उपभोक्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण संदेश देता है। ब्रांडेड उत्पाद खरीदते समय केवल कीमत और तस्वीर देखकर ऑर्डर करने के बजाय विक्रेता की रेटिंग, रिव्यू, उत्पाद विवरण और रिटर्न पॉलिसी की जांच करना जरूरी है। यदि सामान संदिग्ध लगे तो उसकी पैकेजिंग, बिल, ऑर्डर आईडी, डिलीवरी रिकॉर्ड और उत्पाद की तस्वीरें सुरक्षित रखना उपयोगी हो सकता है। यदि किसी अधिकृत ब्रांड स्टोर से उत्पाद की जांच कराई जाती है, तो उपलब्ध लिखित प्रमाण या जांच रिपोर्ट भी संभालकर रखनी चाहिए।</h5>
<h2>फैसला आने तक आरोपों को आरोप ही माना जाएगा</h2>
<h5>कोटा उपभोक्ता आयोग का यह मामला ऑनलाइन शॉपिंग, नकली ब्रांडेड सामान और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट—तीनों को एक साथ जोड़ता है। 2019 में शुरू हुआ विवाद अब 2026 में एक बार फिर चर्चा में आया है। फिलहाल आयोग ने संबंधित पक्षों को नोटिस देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। 18 सितंबर 2026 की सुनवाई के बाद मामले की दिशा और स्पष्ट हो सकती है। जब तक आयोग या सक्षम अदालत की ओर से अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक शिकायत में लगाए गए आरोपों को केवल आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आमिर खान समेत किसी भी पक्ष की कानूनी जिम्मेदारी अंतिम आदेश के बाद ही तय मानी जा सकती है।</h5>
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